क्या आपने सुना है “लोटा विवाह परम्परा” के बारे में ?

ज्ञान दर्पण पर मैंने अपने एक लेख में राजस्थान की खांडा विवाह परम्परा के बारे में लिखा था| इतिहास में ऐसे कई विवाह प्रकरण आते है जिन्हें पढकर मालूम होता है कि खांडा विवाह सिर्फ राजपूतों में ही नहीं वरन उस वक्त लगभग सभी जातियों में थी जो लोग सैन्य गतिविधियों से जुड़े थे वे अक्सर खांडा विवाह करते थे| इतिहास में कई जगह मुसलमान शासकों द्वारा भी शादी के समय अपनी तलवार भेजा जाना पढ़ने को मिलता है|
पर जो सैनिक जातियां नहीं थी या जिनका सैन्य पेशा नहीं था उनमे भी शादी के समय दुल्हे के उपलब्ध न होने की स्थिति में उसकी जगह लोटा(कलश) रखकर विवाह की रस्म पूरी कर देने की परम्परा थी|

अभी कुछ ही दिन पहले अपने ऑफिस में मैं राजस्थान की खांडा विवाह परम्परा के बारे में बातचीत कर रहा था तभी मेरे ऑफिस के स्टोर मेनेजर श्री टीकम सिंह चौधरी ने मुझे ये जानकारी दी| श्री चौधरी के अनुसार उनके क्षेत्र में पहले शादी के वक्त किसी वजह से दुल्हे के उपस्थित न होने पर बारात के साथ एक लोटा(कलश) भेज दिया जाता था जिसके साथ लड़की के फेरे लगवाकर शादी की रस्म पूरी करवा दी जाती थी| हालाँकि अब यह परम्परा एकदम विलुप्त हो चुकी है और नई पीढ़ी तो इस परम्परा से बिल्कुल अनजान है|

मेरे ये पूछने पर कि- क्या कभी अपने जीवन में ऐसी शादी देखि है?

मेरे प्रश्न का उतर देते हुए उन्होंने बताया कि- अब तो नहीं होती पर मैंने अपने बचपन में दो तीन शादियाँ इस परम्परा से होते देखि है|ज्ञात हो टीकम सिंह जी नंदगांव के पास भडोकर गांव के रहने वाले है|

नोट :- उपरोक्त जानकारी श्री टीकमसिंह जी के बताएनुसार दी गयी है मैं उनके क्षेत्र की संस्कृति से ज्यादा परिचित नहीं हूँ|

16 Responses to "क्या आपने सुना है “लोटा विवाह परम्परा” के बारे में ?"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.