लिनक्स के साथ मेरा अनुभव

शनिवार को अपने कंप्युटर में उबुन्टु लिनक्स इंस्टाल करने के बाद से लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल कर रहा हूँ इससे पहले बड़ी हिचक थी कि पता नही लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम कैसे चलता होगा कही इसे इंस्टाल करने के बाद न चला सकूँ और अपनी विण्डो भी ख़राब कर बेठुं, लेकिन ये उबुन्टु लिनक्स भी बड़ा आसान निकला विण्डो एक्सपी से भी इस्तेमाल में आसान |
न इंस्टालेशन में कोई दिक्कत आई और न ही इसके इस्तेमाल में | मजे की बात है कि मैंने लिनक्स अपने कंप्युटर के F Drive इंस्टाल किया है जिससे मेरा विण्डो ऑपरेटिंग सिस्टम भी जस का तस है उसे भी जब मन करे इस्तेमाल कर सकता हूँ | जब भी कंप्यूटर ऑन करता हूँ मेरे सामने विण्डो एक्सपी और उबुन्टु लिनक्स चलाने के दोनों आप्शन आते है जिसे इस्तेमाल करना हो उसी को चुन लो मतलब कि आप दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम अपने कंप्युटर में रख सकते है और जब जी चाहे मन पसंद ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करलो |
और हाँ लिनक्स इंस्टालेशन के बाद डिस्पले,ऑडियो,ब्लूटूथ आदि किसी के भी ड्राईवर की भी जरुरत नही पड़ती ये सब उबुन्टु लिनक्स में पहले से मौजूद है जबकि विण्डो एक्सपी इंस्टाल करने के बाद इन सब को अलग से इंस्टाल करना पड़ता है यदि कंप्युटर के मदर बोर्ड की सी डी न हो तो इन ड्राईवर को डालने में बड़ी दिक्कत हो जाती है
इसके अलावा भी लिनक्स में बहुत सारी चीजें है जो विण्डो एक्सपी में नही है और उन्हें अलग से इंस्टाल करनी पड़ती है मसलन
१- माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस एक्सपी में अलग से इंस्टाल करना पड़ता है जबकि लिनक्स में ओपन ऑफिस.ओ आर जी पहले से ही मौजूद है जिसमे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में वर्ड,एक्सेल व पावरपॉइंट की जगह रायटर,स्प्रेडसीट और प्रजेंटेशन तीनो मौजूद है |
२-फोटो शॉप भी एक्सपी में अलग से डालना पड़ता है जबकि लिनक्स में GIMP Image Editor पहले से साथ है |
३- Nero जेसे सी डी राइट करने के सोफ्टवेयर की जगह भी लिनक्स में Brasero Disk Burning सोफ्टवेयर पहले से ही मौजूद है इन्हे अलग से इंस्टाल करने की कोई जरुरत नही |
४- इन्टरनेट चलाने हेतु फायर फॉक्स, आउट लुक की जगह Evolution Mail, फोटो एडिट करने लिए Fspot Photo Manger, Paint की जगह ओपन ऑफिस का Drawing भी मौजूद है इसके अलावा वे सभी सुविधाए मौजूद है जो हमें विण्डो एक्सपी में मिलती है जिन्हें लिखना बहुत लंबा हो जाएगा |
कुल मिलाकर लिनक्स में ऐसे कई सोफ्टवेयर पहले से ही मौजूद है जबकि विण्डो एक्सपी में इन्ही कामों के लिए अलग सोफ्टवेयर लाकर इंस्टाल करने पड़ते है |
और हाँ उबंटू में एक और प्रोग्राम पिडगिन इन्टरनेट मेसेंजर भी मिला जिसके द्वारा में याहू , एमएसएन, जीमेल आदि साइट्स पर ऑनलाइन अपने दोस्तों से चेट कर सकता हूँ इसके लिए मुझे अलग-अलग मेसेंजर डाउनलोड कर इंस्टाल करने की भी जरुरत नही है | कुल मिलाकर मुझे तो लिनक्स इस्तेमाल करने में बहुत आसान लगा यदि आप भी इसे ट्राई करना चाहते है तो यहाँ चटका लगाकर इसे डाउनलोड कर सकते है या फ़िर यहाँ चटका लगाकर उबुन्टु लिनक्स की फ्री सी डी मंगवाने का अनुरोध भेज सकते है | जब मेरे जैसा नॉन टेक्नीकल आदमी भी लिनक्स आसानी से इंस्टाल कर इस्तेमाल कर सकता है तो आप क्यों नही ! और हाँ इस्तेमाल में कोई छोटी-मोटी दिक्कत आए तो उनके समाधान के लिए हमारे हिन्दी चिट्टाजगत में कई सारे तकनीकी धुरंधर बैठे ही ह ना !

17 Responses to "लिनक्स के साथ मेरा अनुभव"

  1. Amit   December 31, 2008 at 4:45 am

    चलिए आपको अच्छा लग रहा है..सही है….हमने भी लिनुक्स मैं काम किया हुआ है….”सूजी”, “फोएनिक्स” ,”रेड हट” और “फेडोरा” इन सभी में हमने काम किया हुआ है….Linux में काम करने का मज़ा ही कुछ और है…..

    नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये

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  2. संजय बेंगाणी   December 31, 2008 at 4:55 am

    लिनक्स पर आने की बधाई.

    उबंतु कहाँ से पाया? मैं तीन बार इसे डाउनलोड करने में नाकाम रहा.

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  3. रंजन   December 31, 2008 at 6:58 am

    ये लेख अच्छा रहा.. सिखाने का हौसला डबल कर दिया.. वैसे स्पीड़ के बारे में क्या अनुभव है?

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  4. P.N. Subramanian   December 31, 2008 at 7:09 am

    बहुत सुंदर. बधाई हो. लगता है २००९ लिनक्स का रहेगा. नव वर्ष मंगलमय हो.

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  5. ताऊ रामपुरिया   December 31, 2008 at 9:02 am

    शेखावत जी म्हारे लिये तो काला अक्षर भैंस बराबर !

    अपको और आपके परिवार को नये साल की घणी रामराम!

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  6. हम भी सीडी मंगा देखते हैं।

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  7. Kunnu Singh   December 31, 2008 at 10:12 am

    Maine november me “Puppy linux”(94 MB) ka load kiya tha. Ye seedhe CD se he chal gaya tha par Aap jo ubuntu linux bata rahe hain wo sach me majedaar hai. Mai ne bhi cd request bheja hai.
    “puppy linux” mujhe bekaar laga kyo ki ishme drive bhi neahi khula aur bahut kum program chal rahe the.

    Ubuntu Linux mila to saara shrey aapka hi hoga.

    Aapko naye saal ki dher saare subh kamnaye. Nav Varsh ki subhkamna

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  8. लवली कुमारी / Lovely kumari   December 31, 2008 at 11:04 am

    उबन्तु इस्तेमाल करके आपको अच्छा लगा यह बहुत अच्छी बात है.हमारे एक ब्लोगर बंधू उन्मुक्त जी ओपन सोर्स के प्रचार के लिए कटिबद्ध है.
    नव वर्ष की हार्दिक सुभकामनाएँ और बधाई

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  9. Suresh Chiplunkar   December 31, 2008 at 12:13 pm

    ताऊ की तरह ही हमारे समझ में कुछ खास तो नहीं आया, एक बात बतायें कि यदि लिनुक्स पर कोई वर्ड फ़ाइल/पावर प्रेजेन्टेशन बनायें तो क्या दूसरे कम्प्यूटर पर जिसमें XP हो, उसमें वह चलेगा? और जैसा कि आपने अपने को “नॉन-टेक्नीकल” आदमी कहा, क्या मेरे जैसा व्यक्ति भी इसका इंस्टालेशन और उपयोग कर सकता है, क्योंकि मैं तो आपसे भी गया-गुजरा हूँ… मुझे हार्ड डिस्क फ़ॉर्मेट करने के नाम से ही पसीना आने लगता है…
    आपका एक (महा नॉन-टेक्नीकल) भाई
    सुरेश चिपलूनकर

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  10. अनुनाद सिंह   January 3, 2009 at 7:20 am

    आपका ‘ज्ञानदर्पण’ बहुत तेजी से अपने नाम को सार्थक करता प्रतीत हो रहा है। हिन्दी में यह बहुत ही उपयोगी लेख है; लोगों को विश्वास दिलाने के लिये काफी है कि लिनक्स ही बेहतर है।

    लिनक्स ही क्यों, लगभग सभी मुक्त-स्रोत प्रोग्रामों के साथ मेरा भी यही अनुभव है। जब कभी कोई नया मुक्त-स्रोत प्रोग्राम आजमाता हूँ (अधिकांशत: इंजिनीयरिंग के – कैड/कैम/सीएई आदि) तो उनके परिणामों को आशा से अधिक पाता हूँ, खरीदे जाने वाले प्रोग्रामों से बीस पाता हूँ। और अन्त में एक सवाल दिमाग में कौंधने लगता है – लोग नि:शुलक व अधिक उपयोगी मुक्तस्रोत को छोडकर मालिकाना साफ़्टवेयरों पर पैसा बर्बाद क्यों करते हैं? पैसा देकर भी ‘कम’ से ही क्यों सन्तुष्ट हो जाते हैं? इसमें अज्ञानता का रोल तो नहीं?

    Reply
  11. अनुनाद सिंह   January 3, 2009 at 7:21 am

    आपका ‘ज्ञानदर्पण’ बहुत तेजी से अपने नाम को सार्थक करता प्रतीत हो रहा है। हिन्दी में यह बहुत ही उपयोगी लेख है; लोगों को विश्वास दिलाने के लिये काफी है कि लिनक्स ही बेहतर है।

    लिनक्स ही क्यों, लगभग सभी मुक्त-स्रोत प्रोग्रामों के साथ मेरा भी यही अनुभव है। जब कभी कोई नया मुक्त्स-स्रोत प्रोग्राम आजमाता हूँ (अधिकांशत: इंजिनीयरिंग के – कैड/कैम/सीएई आदि) तो उनके परिणामों को आशा से अधिक पाता हूँ, खरीदे जाने वाले प्रोग्रामों से बीस पाता हूँ। और अन्त में एक सवाल दिमाग में कौंधने लगता है – लोग नि:शुलक व अधिक उपयोगी मुक्त स्रोत को छोडकर मालिकाना साफ़्टवेयरों पर पैसा बर्बाद क्यों करते हैं? पैसा देकर भी ‘कम’ से ही क्यों सन्तुष्ट हो जाते हैं? इसमें अज्ञानता का रोल तो नहीं ?

    Reply
  12. मै भी इसे डालना चाहता हूँ। आज लिनक्स की मैगजीन में इसकी एक सीडी मिली है ubuntu live 9.04 | इस सीडी में क्या है? आप इसकी सुरक्षा सम्बधी खासियत भी बताए। सुना है इसकी सुरक्षा बहुत अच्छी होती है यानिकी एक्स पी से अच्छी। मै इसके बारें ज्यादा जानना चाहता हूँ। क्या आप मार्गदर्शन करेगे।

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  13. उन्मुक्त   June 20, 2009 at 12:04 pm

    अरे यह चिट्ठी इतने दिनों तक मेरी नजर में कैसे नही आयी।
    पेन्ग्युन की दुनिया में स्वागत है।

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  14. susenj   September 9, 2009 at 6:21 pm

    Linux ki duniya me aapka swagat hai…
    Main bhi ubuntu hi use karta hoon.

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  15. SUNIL KUMAR   March 25, 2010 at 2:29 pm

    waakayi ubuntu ka to jabab nahin

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  16. Sociologist Dr. Anil   December 16, 2010 at 5:27 am

    लिनक्स में अधिकतर साफ़्ट्वेयर काम नही करते। क्योकी सामान्यतः साफ़्टवेयर windows xp और windows 7 के लिये बनाये जाते है। लिनक्स इस्तेमाल करने वाले दुनिया मे कम लोग है, इसलिये लिनक्स के लिये सोफ़्टवेयर बनाना कंपनी के लिये फ़ायदा का सौदा नही होगा। लेकिन लिनक्स ने या IT शुभचिंतको ने कोई एसा साफ़्टवेयर बानाया या जुगाड. खोजा होगा जिससे win के साफ़्टवेयर लिनक्स में काम कर सके।
    इस समस्या के संबंध मे मेरा मार्ग दर्शन करे
    मेरा ई मेल है [email protected] में भी मार्ग दर्शन कर सकते है।
    लिनक्स संत की जय, "जो देता है लेकिन लेता कुछ नही"

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  17. विकास गुप्ता   November 5, 2012 at 6:57 pm

    लिनक्स मे मेरा भी काम करने का मन बहुत कर रहा है पर नया लैपटाप होने की वजह से गारंटी की शर्तों के कारण नया आपरेटिंग सिस्टम अभी अपने लैपटाप पर नहीं डाल सकता हूँ इसके लिए अभी थोडा इन्तजार करना पडेगा ।

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