रिश्ते

रिश्ते

एक दिन चला था जिंदगी के सफ़र, पर कुछ रिश्तो को लेकर ……

कुछ को कांधे बैठाया कुछ को पलकों पर ……….
चला कुछ को गोद लिए, कुछ दिल मे दबा कर……..

चलता रहा एक पहर………., दो पहर ……….

किसी ने बोला धुप लगी ,बदन से कुरता उतार कर मैने छाया कर दी…..

किसी को भूख लगी ,अपने हिस्से की रोटी दे दी …….

तीसरे पहर थोड़ी थकान सी महसुस की …,

तो मैं बोला, रिश्तो तुम मेरा ख्याल रखना ,

मैं थोडा सुस्ता लेता हूँ ,एक चैन भरी झपकी पा लेता हूँ ,……..

……………………………………………………………………….. ………………………………………………. …………………………..

जब साँझ ढले आँख खुली तो देखा ,

एक झुरमुट सा एक दूजे का हाथ पकडे दूर चला जा रहा था ,……

मैने गौर से अपनी धुंधलाई नजरो से देखा तो ,वो मेरे ही रिश्ते थे .

अब मेरे पास बचे वही जो मेरे दिल मे दबे थे …………..

20 Responses to "रिश्ते"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.