रिश्ते : कल्पना जड़ेजा

रिश्तों को न थामों तुम मुट्ठी में रेत की तरह …
सरक जायेंगे वो भी वक़्त की तरह ..
महसूस करो तुम उनको हर एक साँस की तरह …
रिश्ते जब बंधते है तो ख़ुशी देते है …
टूटते है तो कांच की तरह.
अनगिनित परछाई में बंट जाते है …
आसान है बिखरे मोती इकट्टे करना …
रिश्ता तो रहता है बंद मुठी में पानी की तरह …
पानी बह जाता है ..हथेली गीली छोड़ कर ..
और रिश्ते भी दे जाते है अपनी नरमी पानी की तरह |
कल्पना जड़ेजा

18 Responses to "रिश्ते : कल्पना जड़ेजा"

  1. Gajendra singh shekhawat   March 21, 2012 at 3:02 am

    rishte bhi de jate hai apni narmi pani ki tarah…..wah bahut khoob

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  2. Rajul shekhawat   March 21, 2012 at 3:40 am

    बढ़िया अभिव्यक्ति

    Reply
  3. प्रवीण पाण्डेय   March 21, 2012 at 4:26 am

    सच कहा आपने, थोड़ी नमी तो आवश्यक है, संबंधों में।

    Reply
  4. pooja   March 21, 2012 at 4:42 am

    awesum………

    Reply
  5. दिगम्बर नासवा   March 21, 2012 at 5:31 am

    रिश्ते थामने की नहीं निभाने की चीज़ है …
    बहुत लाजवाब …

    Reply
  6. dheerendra   March 21, 2012 at 5:50 am

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,……

    my resent post

    काव्यान्जलि …: अभिनन्दन पत्र………… ५० वीं पोस्ट.

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  7. परी देश की शह्जादी   March 21, 2012 at 12:12 pm

    बहूत खूब….काफी सुन्दर रचना…………..

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  8. बहुत सुन्दर रचना

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  9. रिश्ते वाकई ऐसे ही होते हैं.

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  10. विष्णु बैरागी   March 22, 2012 at 5:53 am

    एक बार फिर 'वही खुशी, वही गम।' वर्तनी की अशुध्दियॉं सुन्‍दर भावाभिव्‍यक्ति का सारा आनन्‍द नष्‍ट कर देती हैं।

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  11. Ratan Singh Shekhawat   March 22, 2012 at 4:47 pm

    @ विष्णु बैरागी जी
    आपको पिछली पोस्ट की टिप्पणी में भी वर्तनियों की अशुद्धियाँ बताने का अनुरोध किया था पर न तो आपने पिछली पोस्ट की अशुद्ध वर्तनियाँ बतायी न इस पोस्ट पर उन वर्तनियों का जिक्र किया जो अशुद्ध है!!
    आपसे एक बार फिर अनुरोध है कि कृपया बताएं इस पोस्ट में कौन कौनसी वर्तनियाँ अशुद्ध है ताकि उन्हें सुधारा जा सके|

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  12. विष्णु बैरागी   March 23, 2012 at 4:40 am

    मैं रचनाओं को कॉपी नहीं कर पा रहा हूँ। कृपया मुझे'एडिटेबलफार्म' में मेल कर दें।

    Reply
  13. Ratan Singh Shekhawat   March 23, 2012 at 3:42 pm

    @ विष्णु बैरागी जी

    पोस्ट में अशुद्ध वर्तनियाँ बताने के लिए कॉपी करने की कहाँ जरुरत है ? आप तो वे वर्तनियाँ लिख दीजिए जो इस रचना में आपको अशुद्ध दिख रही है|

    Reply
  14. नवज्योत कुमार   March 29, 2012 at 8:50 am

    रतन सिंह शेखावत जी,
    मुझे आपकी मदद चाहिए.
    क्या आप यह बता सकेंगे की आपने अपने ब्लॉग को कॉपी होने से रोकने के लिए किस ट्रिक का इस्तेमाल किया है.
    मैं भी यह ट्रिक अपनाना चाहता हूँ.
    क्योंकि मेरी कई पोस्टे हुबहू कॉपी हो रही है.
    मैं बहुत उदास हूँ इस कारण.
    कृपया मेरी मदद करे और जो ट्रिक आपने लगाईं है अपने पोस्टो में उस ट्रिक को हमें भी बताये

    Reply
  15. dheerendra   March 31, 2012 at 2:39 pm

    वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,रतन जी,…
    बेहतरीन भाव प्रस्तुति,….

    MY RECENT POST…काव्यान्जलि …: तुम्हारा चेहरा,

    Reply
  16. Vaneet Nagpal   April 13, 2012 at 3:54 am

    मेरे ख्याल से मुठी को मुठ्ठी होना चाहिए |

    टिप्स हिंदी में

    Reply

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