रिश्ते : कल्पना जड़ेजा

रिश्तों को न थामों तुम मुट्ठी में रेत की तरह …
सरक जायेंगे वो भी वक़्त की तरह ..
महसूस करो तुम उनको हर एक साँस की तरह …
रिश्ते जब बंधते है तो ख़ुशी देते है …
टूटते है तो कांच की तरह.
अनगिनित परछाई में बंट जाते है …
आसान है बिखरे मोती इकट्टे करना …
रिश्ता तो रहता है बंद मुठी में पानी की तरह …
पानी बह जाता है ..हथेली गीली छोड़ कर ..
और रिश्ते भी दे जाते है अपनी नरमी पानी की तरह |
कल्पना जड़ेजा

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