राष्ट्रपति भवन को टक्कर देता है राजपूताने का यह स्वप्निल महल

राष्ट्रपति भवन को टक्कर देता है राजपूताने का यह स्वप्निल महल

जोधपुर की छितर नामक पहाड़ी पर 26 एकड़ क्षेत्र में हल्के गुलाबी पीले बालुई रंग के पत्थरों से बना यह महल किसी तिलिस्म या स्वपन महल से कम नहीं है| बहुत कम लोग जानते है कि 1929 ई. से 1944 ई. के लम्बे समय में 1,09,11,228 रूपये की सम्पूर्ण लागत से बना यह महल अकाल के समय जनता को रोजगार देने के पवित्र उद्देश्य के लिए बनवाया गया था| अकाल राहत के लिए कार्य शुरू करने के लिए जोधपुर के सूर्यवंशी महाराजा श्री उम्मेदसिंह जी राठौड़ ने इस भवन की नींव 18 नवम्बर 1929 को रखी थी|

जी हाँ ! हम बात कर रहे है, जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस की| छितर नामक पहाड़ी पर बना होने के कारण इस महल को स्थानीय जनता छितर पैलेस के नाम से भी पुकारती है| अकाल राहत कार्य में बना यह महल अपनी वास्तुकला, चित्रकला, सजावट, शानदार बाग-बगीचों के चलते आज राष्ट्रपति भवन को टक्कर देता है| उम्मेद भवन पैलेस के लिए प्रस्तर खण्डों (पत्थरों) को लाने के लिए बाकायदा रेल की लाइन बिछाई गई थी| महल निर्माण में बड़े बड़े पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट चूने की जगह जटिल इण्टरलोकिंग पद्धति का प्रयोग किया गया है| फर्श व दीवारों पर मकराने के सफ़ेद संगमरमर के साथ ईटली से आयातित काले संगमरमर का भी प्रयोग किया गया है|

347 कमरे, 15 बड़े स्तम्भों के केन्द्रीय गुम्बज वाले इस स्वपन महल का डिजाइन लन्दन के वास्तुकार मैसर्स लैंकस्टर एंड लॉज ने किया था व निर्माण की देखरेख के लिए वास्तु एवं शिल्पविद जी.ए.गोल्ड स्ट्रा उनके प्रतिनिधि के रूप में यहाँ रहे| भवन निर्माण का ठेका आर.बी. शिवरतन मोहता को दिया गया था| भवन के अन्दर बीस हजार घन फुट बर्मा टीक लकड़ी का प्रयोग किया गया है| नृत्यशाला की स्थापत्य कला, छतों पर झूमर, मेहराबों पर बारीक़ नक्काशी का काम दर्शकों का मन मोह लेता है| दरबार हाल व तरणताल में पोलैण्ड के प्रसिद्ध चित्रकार एस. नोरवलिन ने दो वर्ष में चित्रकारी पूरी की थी| भवन में ढोला-मारू व रामायण के भी चित्र दर्शनीय है| इतने बड़े वातानुकूलित भवन में विद्युत व्यवस्था के लिए दस लाख मीटर लम्बाई के विद्युत तारों का प्रयोग किया गया है| शुरू में इस भवन के निर्माण हेतु 52,12,000 रूपये की राशी का प्रावधान किया गया था, जो निर्माण पूर्ण होने तक खर्च 1,09,11,228 रूपये पहुँच गया|

15 एकड़ भूमि पर सुन्दर बगीचे के साथ 195 x 103 मीटर लम्बाई-चौड़ाई में बने इस स्वप्निल महल उम्मेद भवन पैलेस का प्रवेश मुहूर्त 25 मई 1944 ई. में महाराजा श्री उम्मेदसिंह जी के चतुर्थ महाराज कुमार श्री देवीसिंह जी के कर कमलों से हुआ था| आज विश्व में राजस्थान की शान समझे जाने वाले महल का स्वामित्व जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंहजी राठौड़ के पास है| महल के एक भाग में जहाँ पांच सितारा होटल संचालित है, वहीं दूसरे भाग में आम जनता व पर्यटकों को देखने के लिए संग्रहालय बना है, जिसे वर्षभर में लाखों पर्यटक देखने आते है|

राष्ट्रपति भवन को टक्कर देने वाले उम्मेद भवन पैलेस के मध्य मुख्य भाग में इस भवन के स्वामी सूर्यवंशी राठौड़ क्षत्रिय राजवंश के पूर्व महाराजा का परिवार रहता है|

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