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Sunday, October 2, 2022

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रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया : कुं.अमित सिंह

रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया,
आजकल का रंग -ढंग कैसा अजब हो गया|

जो वस्त्र होता था नीचा वो ऊँचा ,
और जो होना था ऊँचा वो नीचा हो गया|

जब तक “जोकी” लिखा न दिखे ,इनको आता चैन नहीं
अगर करे कोई टोका-टोकी होता इनको सहन नहीं
कन्यायें भी त्याग रही पहनावे के सरे संस्कार
टॉप हो रहा ऊँचा -ऊँचा,भूल गयी सूट-सलवार|

अब हम भी क्या कहें,कई माँ-बाप ही देते हैं उनका साथ,
फैशन करने में वो भी आगे हैं उनसे दो हाथ|

माँ ये सोचे,समझें सब उसको बेटी की बहन,
बाप को भी बेटी की सहेली का अंकल कहना नहीं सहन|

हे मेरे मालिक तुमने “अमित” के साथ ये क्या गजब किया
क्या मैं इसके लायक था, जो मुझे ये सब देखने भेज दिया|

मेरे भाइयो और बहनों न भूलो अपना सनातन इतिहास
आधुनिक बनो पर ऐसे कि कोई उड़ा न सके आपका उपहास||

”जय श्री राम”
AMIT KUMAR SINGH

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15 COMMENTS

  1. पढने-सुनने और कहने में ये बातें बहुत ही अच्‍छी लगती हैं। उपदेश सदैव दूसरों के लिए होते हैं। हममें से प्रत्‍येक यदि अपना-अपना घर सम्‍हाल ले तो यह दशा हो ही नहीं। कोई भी बात कहने से पहले हम यदि खुद को उसमें शरीक कर लें तो कहने से पहले सौ बार सोचना पड जाता है। हम सब उपदेश दे रहे हैं और आचरण से परहेज कर रहे हें। ऐसे में अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है। इसका चरम तो आना बाकी है। खुद को तैयार रखिए और प्रतीक्षा कीजिए। उपदेश देने के लिए और अधिक तथा बेहतर स्थितियॉं मिलेंगी।

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