रानी पद्मावती पर फिल्म बनाने के पीछे ये मंशा है फ़िल्मी भांडो की

तमाम विवादों व विरोध के बाद भी फिल्म निर्माता भंसाली रानी पद्मावती पर फिल्म बनाने में कामयाब हो गया। किसी भी ऐतिहासिक पात्र व महापुरुष पर कोई फिल्म बने उस देश के वासी अपने राष्ट्र नायक, नायिका को सिनेमा के सुनहले पर्दे पर देख खुश होते है। जबकि रानी पद्मावती पर बनी फिल्म शुरू से विवादों के दायरे में रही है। यही नहीं राष्ट्र नायकों पर फिल्म बनाने वाले निर्माता का सम्मान होने की जगह भंसाली को थप्पड़ पड़े, सेट पर तोड़फोड़ और आगजनी हुई। क्यों ?

क्योंकि भंसाली को रानी पद्मावती पर फिल्म बनाकर सिर्फ धन कमाने से ही मतलब नहीं है। उसे इतिहास की इस नायिका की कहानी से छेड़छाड़ कर भारतीय संस्कृति व इतिहास पर हमला कर उसे विकृत करने से भी मतलब है। आपको बता दें फिल्म उद्योग में लेखकों से लेकर कलाकार, निर्माता आदि ज्यादातर लोग वामपंथी है और उनका प्रयास रहता है- येनकेन प्रकारेण भारतीय संस्कृति खासकर हिन्दू संस्कृति पर हमला करना। इतिहास साक्षी है वामपंथी विचारधारा के कथित फर्जी इतिहासकार भारत के सही इतिहास लेखन के सबसे बड़े बाधक तत्व रहे है। इनका एक ही ध्येय रहा है, किसी बहाने हिन्दुओं के आत्म-सम्मान पर चोट कर उसे तोड़ना। यही कारण है कि फिल्म उद्योग में घुसे ये तत्व हमेशा हिन्दू देवी देवताओं का चरित्र हनन करने के साथ हिन्दू मूल्यों का मजाक उड़ाने वाले सीरियल, फिल्म्स आदि बनाते है।

पिछले दिनों जयपुर में करणी सैनिकों द्वारा भंसाली की पिटाई के बाद फिल्म जगत के कथित प्रगतिशील लेखकों की प्रतिक्रिया में उनकी उक्त मंशा साफ झलक रही थी। यही नहीं कुछ लेखकों द्वारा लिखी हिन्दू संस्कृति व इतिहास पर आगे गहरी चोट करने की धमकियाँ भी सोशियल साइट्स पर नजर आई।

आज फिल्म पद्मावती के खिलाफ क्षत्रिय संगठन मैदान में है, लेकिन हिन्दुत्त्व के नाम पर राजनीति करने वाले इस मसले को क्षत्रियों का समझ चुप है। जबकि इन तत्वों को क्षत्रियों से नहीं सम्पूर्ण हिन्दुत्त्व पर चोट करने से मतलब है। आज इतिहास से छेड़छाड़ कर क्षत्रियों के आत्म सम्मान पर चोट की जा रही है, कल ये तत्व किसी अन्य हिन्दू जाति की भावनाओं पर चोट करेंगे। ये तत्व जानते है कि देश के सभी हिन्दुओं का विरोध वे नहीं झेल पायेंगे। अतः वे जातियों में बंटे हिन्दू समाज की विभिन्न जातियों की भावनाओं पर अलग अलग चोट करते है, ताकि उन्हें व्यापक विरोध का सामना नहीं करना पड़े।

अतः इन तत्वों को जबाब देने के लिए सभी को एकजुट होकर फिल्म पद्मावती का विरोध करना चाहिए और सरकारों को इस पर रोक लगाने के लिए मजबूर कर देना चाहिए। दो चार फिल्मों में आर्थिक नुकसान होने के बाद ये फिल्मी भाण्ड, जो धन कमाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते है, अपने आप ऐसी फिल्में बनाने से बाज आयेंगे। आर्थिक नुकसान इन फिल्मी भांडों पर सबसे बड़ी चोट साबित होगा।

क्षत्रिय समाज जिसने इस देश के लिए बड़े से बड़े बलिदान दिए है, वह भंसाली जैसे तत्व से निपटने में सक्षम है। फिर भी उनकी इस लड़ाई में यदि हिन्दू संगठन कंधे से कन्धा मिलाकर साथ नहीं देंगे, तो हिन्दुत्त्व के इन पैरोकार संगठनों को सिर्फ धर्म के नाम पर दूकानदारी समझा जाएगा और भविष्य में जब हिन्दू हितों की बात आएगी, तब क्षत्रिय समाज भी किनारा कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वो हिन्दुत्त्व को बड़ा नुकसान होगा।

2 Responses to "रानी पद्मावती पर फिल्म बनाने के पीछे ये मंशा है फ़िल्मी भांडो की"

  1. Neeraj Chib   November 5, 2017 at 8:07 pm

    Right rajputo ke sath sbi hinduo ko ana chahiye
    Yhi time hai Hindu ekta dikhane ka

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  2. viram singh   November 5, 2017 at 8:09 pm

    bilkul sahi likha hkm.
    yh filmy bhand hindutv ke virodh hi film bnate have.
    padmavati film ke virodh me bade hinduvadi sngthn kuchh bol hi nahi rahe have.

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