40 C
Rajasthan
Wednesday, May 25, 2022

Buy now

spot_img

राजिया रा सौरठा -5

कृपाराम पर द्वारा लिखित राजिया के नीति सम्बन्धी दोहे |

मानै कर निज मीच, पर संपत देखे अपत |
निपट दुखी व्है नीच , रीसां बळ-बळ राजिया ||

नीच व्यक्ति जब दुसरे की सम्पति को देखता है तो उसे अपनी मृत्यु समझता है,इसलिए ऐसा निकृष्ट व्यक्ति मन में जल-जल कर बहुत दुखी होता है |

खूंद गधेडा खाय, पैलां री वाडी पडे |
आ अणजुगति आय , रडकै चित में राजिया ||

यदि परायी बाड़ी में गधे घुस कर उसे रोंदते हुए खाने लगे, तब भी हे राजिया ! यह अयुक्त बात है जो मन में अवश्य खटकती है |

नारी दास अनाथ, पण माथै चाढयां पछै |
हिय ऊपरलौ हाथ, राल्यो जाय न राजिया ||

नारी और दास अनाथ होते है ( इसीलिय इन दोनों को स्वामी की जरुरत होती है ) किन्तु एक बार इन्हें सिर पर चढा लेने से ये छाती-ऊपर का हाथ बन जाते है जिसे हटाना आसान नहीं होता |

हियै मूढ़ जो होय. की संगत ज्यांरी करै |
काला ऊपर कोय, रंग न लागै राजिया ||

जो व्यक्ति जन्म-जात मुर्ख होते है, उन पर सत् संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, हे राजिया ! जैसे काले रंग पर कोई अन्य रंग नहीं चढ़ता |

मलियागिर मंझार , हर को तर चनण हुवै |
संगत लियै सुधार, रुन्खां ही नै राजिया ||

मलयागिरि पर प्रत्येक पेड़ चन्दन हो जाता है , हे राजिया ! यह अच्छी संगति का ही प्रभाव है , जो वृक्षो तक को सुधार देता है |

पिंड लछण पहचाण, प्रीत हेत कीजे पछै |
जगत कहे सो जाण, रेखा पाहण राजिया ||

किसी भी व्यक्ति से प्रेम व घनिष्ठता स्थापित करने से पहले उसके व्यक्तित्व की पूरी जानकारी कर लेनी चाहिय | यह लोक मान्यता पत्थर पर खिंची लकीर की भांति सही है |

ऊँचे गिरवर आग, जलती सह देखै जगत |
पर जलती निज पाग , रती न दिसै राजिया ||

ऊँचे पहाडो पर लगी आग तो सारा संसार देखता है ,परन्तु हे राजिया ! अपने सिर पर जलती हुयी पगड़ी कोई नहीं देखता | अर्थात दूसरो में दोष देखना बहुत आसान है किन्तु कोई अपने दोष नहीं देखता |

सुण प्रस्ताव सुभाय, मन सूं यूँ भिडकै मुगध |
ज्यूँ पुरबीयौ जाय , रती दिखायां राजिया ||

मुग्धा ( काम-चेष्ठा रहित युवा स्त्री ) नायिका रतिप्रस्ताव सूनकर इस प्रकार चौंक कर भागती है जैसे चिरमी दिखाने पर रंगास्वामी |

जिण बिन रयौ न जाय, हेक घडी अळ्गो हुवां |
दोस करै विण दाय, रीस न कीजे राजिया ||

जिस व्यक्ति के घड़ी भर अलग होने पर भी रहा नही जाय , एसा ममत्व वाला व्यक्ति यदि कोइ ग़लती करे तो उसका बुरा नहीं मानना चाहिय |

समर सियाळ सुभाव , गळियां रा गाहिड़ करै |
इसडा तो उमराव, रोट्याँ मुहंगा राजिया ||

जिन लोगों का युद्ध में तो गीदड़ का सा स्वभाव हो किन्तु महफ़िल गोष्ठियों में अपनी बहादुरी की बातें करे , हे राजिया ! ऐसे सरदार (उमराव) तो रोटियों के बदले भी महंगे पड़ते है |

कही न माने काय, जुगती अणजुगती जगत |
स्याणा नै सुख पाय, रहणों चुप हुय राजिया ||

जहाँ लोग कही हुयी उचित-अनुचित बात को नहीं मानते हों वहां समझदार व्यक्ति को चुप ही रहना चाहिय, इसी में सार है |

पाटा पीड उपाव , तन लागां तरवारियां |
वहै जीभ रा घाव, रती न ओखद राजिया ||

शरीर पर तलवार के लगे घाव तो मरहम पट्टी आदि के इलाज से ठीक हो सकते है किन्तु हे राजिया ! कटु वचनों से हुए घाव को भरने की कोई ओषधि नहीं है |
डा. शक्तिदान कविया द्वारा लिखित पुस्तक “राजिया रा सौरठा” से साभार |
क्रमश:………

Related Articles

11 COMMENTS

  1. हमेशा की तरह एक बार पुनः आभार.
    आप को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  2. बड़ी अच्छी बातें कही गयी है दोहों में, वो नारी और दास वाला पसंद नही आया।

  3. पाटा पीड उपाव , तन लागां तरवारियां |
    वहै जीभ रा घाव, रती न ओखद राजिया ||

    होली के शुभकामाऐं.. और ये बात होली पर विशेष ध्यान रखने की है..

  4. बहुत सुंदर….
    आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी ओर बहुत बधाई।
    बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Stay Connected

0FansLike
3,329FollowersFollow
19,600SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles