राजस्थान में इतिहास का सबसे बड़ा प्रकाशक है यह संस्थान

राजस्थान में इतिहास का सबसे बड़ा प्रकाशक है यह संस्थान

वर्ष 1977 ई. में क्षत्रिय युवक संघ के पूर्व प्रमुख स्व. कुंवर आयुवानसिंह जी शेखावत, हुडील की स्मृति में “आयुवानसिंह स्मृति संस्थान” की स्थापना हुई| ठाकुर रघुवीरसिंह जी जावली संस्थान के पहले अध्यक्ष बने। ठाकुर रघुवीरसिंह जी जावली के कार्यकाल में कुंवर आयुवानसिंह द्वारा लिखी गई समस्त पुस्तकों का पुनः प्रकाशन हुआ। ज्ञात हो स्व. कुंवर आयुवानसिंह जी शेखावत महान चिन्तक, संगठनकर्ता होने के साथ एक उच्च कोटि के साहित्यकार भी थे| कुंवर आयुवानसिंह जी ने कई पुस्तकें लिखी, जिनमें “राजपूत और भविष्य” नामक पुस्तक किसी भी राजपूत युवक के लिए गीता से कम नहीं| हरियाणा के पूर्व आईएएस श्री हुकमसिंह राणा ने ज्ञान दर्पण के एक प्रश्न का जबाब देते हुए बताया कि उनके आईएएस बनने के पीछे कुंवर आयुवानसिंह जी की पुस्तक “राजपूत और भविष्य” मुख्य आधार रही है| श्री राणा के अनुसार स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल करने के दौरान उन्हें “राजपूत और भविष्य” पुस्तक पढने का सौभाग्य मिला, पुस्तक पढने व मनन करने के बाद उनके जीवन की दशा और दिशा ही बदल गई और वे देश की प्रतिष्ठित सेवा आईएएस में सफल रहे|

शुरू में संस्थान ने कुंवर आयुवानसिंह जी की पुस्तकें प्रकाशित कर क्षत्रिय युवक संघ की विचारधारा को बढ़ावा देने व क्षत्रियोचित संस्कार निर्माण करने हेतु आयोजित शिविरों में संघ के स्वयं सेवकों को यह साहित्य उपलब्ध कराना शुरू किया| कुंवर आयुवानसिंह जी के साहित्य के साथ साथ संस्थान ने क्षत्रिय समाज के अन्य विद्वान लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकें प्रकाशित करवाना शुरू किया, साथ ही संस्थान ने राजपूत इतिहास में फैली भ्रांतियों को दूर करने व इतिहास शुद्धिकरण की आवश्यकता महसूस कर इतिहास शुद्धिकरण अभियान के तहत इतिहास पुस्तकें प्रकाशित करवाना शुरू किया| वर्तमान में संस्थान अपने विभिन्न आयोजनों के समय पुस्तक मेले का आयोजन करता है, जिसमें संस्थान के प्रकाशन के साथ विभिन्न प्रकाशनों की इतिहास व साहित्य की पुस्तकें उपलब्ध रहती है| आपको बता दें संस्थान पुस्तक प्रकाशन व विक्रय सिर्फ लागत मूल्य पर करता है| इस कार्य में संस्थान किसी भी तरह का आर्थिक लाभ नहीं रखता| यही कारण है कि संस्थान जहाँ अपनी प्रकाशित पुस्तकें सस्ते मूल्य पर बेचता है, वहीं अन्य प्रकाशकों से भी भारी छूट पर पुस्तकें खरीदकर उसी मूल्य पर बेचता है, जिसका लाभ पुस्तक प्रेमियों को मिलता है|

लागत मूल्य पर इतिहास व साहित्यिक पुस्तकें उपलब्ध कराने के चलते संस्थान द्वारा आयोजित पुस्तक मेलों में लाखों रूपये की पुस्तकों का विक्रय होता है| वर्तमान पीढ़ी द्वारा इतिहास में कम रूचि रखने के चलते इतिहास प्रकाशन घाटे का व्यापार रह गया है| ऐसे में ज्यादातर प्रकाशन इतिहास किताबें के प्रकाशन से दूर हो गए, लेकिन आयुवानसिंह स्मृति संस्थान ने इसकी कमी पूरी कर दी| आज राजस्थान में इतिहास की पुस्तकें सबसे ज्यादा यह संस्थान ही प्रकाशित कर रहा है| जिसका प्रमाण विभिन्न बड़े पुस्तक विक्रेताओं द्वारा इतिहास पुस्तकों पर संस्थान पर निर्भर होना है| आज बड़े बड़े पुस्तक विक्रेता इतिहास की पुस्तकें आयुवानसिंह स्मृति संस्थान से खरीदकर बेचते है|

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