राजपूत प्रतीक हटाने के षड्यंत्र में यह पहला कदम तो नहीं ?

राजपूत प्रतीक हटाने के षड्यंत्र में यह पहला कदम तो नहीं ?

सीकर के राजकीय महाविद्यालय का नाम पिछले 65 वर्षों से सीकर के लोकप्रिय राव राजा कल्याणसिंह जी के नाम पर श्री कल्याण राजकीय महाविद्यालय था| आपको बता दें राव राजा कल्याणसिंह जी लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए इतिहास में जाने जाते है| सीकर शहर में स्कूल, कालेज ही नहीं बल्कि चिकित्सालय, विभिन्न जातियों के छात्रों के लिए छात्रावासों के लिए भूमि, भवन आदि राव राजा कल्याणसिंह जी ने दिए थे| ताकि ये भवन जनकल्याण में उपयोग आते रहे और उनकी स्मृति भी चिरस्थाई बनी रहे|

लेकिन उन्हें नहीं पता था कि जिस कथित राष्ट्रवादी पार्टी को उनके वंशज पाल पोषकर बड़ा कर रहे है, सत्ता के शीर्ष पर बैठाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर रहे है, उसी दल की सरकार उनके नाम को विस्मृत करने का दुस्साहस करेगी| ज्ञात हो राव राजा के वंशज देश में सबसे ज्यादा दिन राज करने वाली व राजाओं की सबसे बड़ी विरोधी समझी जाने वाली कांग्रेस पार्टी के कट्टर विरोधी रहे है और उसके सामने राष्ट्रवाद के नाम पर छाती कूटने वाली भाजपा के सहयोगी रहे| लेकिन यह हैरान कर देने वाली बात है कि राजपूत विरोधी समझी जाने वाली कांग्रेस ने इस कालेज से राव राजा का नाम हटाने का कभी भी प्रयास नहीं किया|

पर राजपूत समर्थित भाजपा ने सत्ता में आते ही यह कारनामा कर दिखाया| आज कालेज से राव राजा कल्याणसिंह जी का नाम हटाया है, कल हो सकता है भाजपा अपने किसी नेता के नाम से इस भवन में चल रही कालेज का नामकरण भी कर दे| शेखावाटी विश्वविद्यालय का नामकरण इसका ज्वलंत उदाहरण है| शेखावाटी विश्वविद्यालय के नामकरण के समय भी स्थानीय राजपूत नेताओं ने अपने तुच्छ राजनैतिक स्वार्थों के चलते चुप्पी साधे रखी थी| शायद उसी चुप्पी को भांप कर भाजपा सरकार ने यह कृत्य किया है| श्री कल्याण राजकीय महाविद्यालय के नामकरण मामले को देखकर लगता है कि सरकार ने राजपूत प्रतीकों व नामों को हटाने की दिशा में एक प्रयोग किया है ताकि राजपूत समाज की प्रतिक्रिया देखकर, आगे की रणनीति तय कर, इस काम में तीव्रता लाई जा सके|

ऐसा लगता है जैसे राजपूत प्रतीकों को नेपथ्य में धकलने का यह पहला प्रयास है|

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