ये क्षेत्र था कभी भारत का शक्तिशाली सत्ता केंद्र

ये क्षेत्र था कभी भारत का शक्तिशाली सत्ता केंद्र

 भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना के समय अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान इस देश के सबसे शक्तिशाली शासक थे| उनके राज्य की राजधानी अजमेर थी| अजमेर से पहले चौहानों की राजधानी साम्भर थी और साम्भर के ही शक्तिशाली चौहानों ने देश के कई राजाओं को अपने अधीन कर इस देश में चौहान साम्राज्य का परचम लहराया था| पर क्या आप जानते है, उस काल साम्भर के चौहान राज्य को किस नाम से जाता था| यदि नहीं तो हम आज हम बता रहे है कि कभी सत्ता के शक्तिशाली रहे इस चौहान साम्राज्य को सपादलक्ष देश के नाम से जाना जाता था|

पृथ्वीराज चौहान और उनका काल पुस्तक के लेखक डा. पारस नाथ सिंह अपनी पुस्तक में लिखते है- स्कन्द पुराण में भारत के विभिन्न स्थलों की सूची में सयम्भर सपादलक्ष देश का नामोल्लेख है जिसकी स्थिति साम्भर झील के चातुर्दिक बताई गयी है। मारवाड़ के नागौर जिले के आंशिक भू-भाग को सवालाख अथवा सावालाख से सम्बोधित किया जाता रहा है जो सपादलक्ष का बिगड़ा हुआ रूप है। इस प्रकार चौहानों का राज्य और उसकी राजधानी अजमेर, सपादलक्ष देश नाम से विख्यात था और उनके विकास के साथ-साथ उनके राज्य का भी विस्तार हुआ । विभिन्न स्थलों पर चौहानों को भारत के सर्वोच्च शासकों के रूप में वर्णित किया गया है।”

सपालदक्ष की राजधानी रही साम्भर को इतिहास में शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है| इसीलिए सपालदक्ष के चौहानों शासकों को शाकम्भरीश अथवा शाकम्भरी नृपति से भी संबोधित किया जाता रहा है| अन्य क्षत्रिय वंशों की तरह चौहान भी शक्तिरूपा देवी के उपासक रहे है| साम्भर स्थिति चौहानों की कुलदेवी को भी इसलिए शाकम्भरी देवी कहा जाता है|

कभी देश के सबसे शक्तिशाली शासकों की कर्मस्थली व राजधानी रही शाकम्भरी नगरी यानी साम्भर का आज भी देश में महत्त्वपूर्ण स्थान है, यहाँ स्थित नमक की झील आज भी भारत के नागरिकों को नमक की आपूर्ति करती है|

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