यूपी भाजपा सरकार का राजपूतों को बड़ा तोहफा

यूपी भाजपा सरकार का राजपूतों को बड़ा तोहफा

उत्तर प्रदेश की राष्ट्रवादी योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में महाराणा प्रताप की जयंती मनाने की अनुमति ना देकर अपने समर्थक राजपूत समुदाय को उसके घनघोर समर्थन के बदले तोहफा दिया है| ज्ञात हो सहारनपुर में पिछले वर्ष महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर राजपूत-दलित संघर्ष हुआ था, जिसमें कुछ जानें भी गई थी| इस बार 9 मई आने से पहले ही भीम सेना ने राजपूतों को महाराणा प्रताप की जयंती ना मनाने की चेतावनी देते हुए जयंती मनाने पर हिंसा करने की धमकी दी| भीम सेना की इस गुंडई भरी धमकी से डर कर अपने आपको घनघोर व प्रखर राष्ट्रवादी होने का दिखावा करने वाले योगीजी की सरकार ने वीर शिरोमणि, स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती मनाने पर रोक लगा दी|

आपको बता दें राजपूत समाज भारतीय जनता पार्टी की मानसिक गुलामी की हद तक समर्थन करता है| भाजपा नेताओं को पता है कि राजपूतों के कोई काम हो या नहीं हो, उनके स्वाभिमान की चिंता रखो या ना रखो, वोट तो ये राष्ट्रवाद व हिन्दुत्त्व के नाम पर भाजपा को ही देंगे, ऐसे में भाजपा राजपूतों की भावनाओं की कोई चिंता नहीं करती, राजपूतों के वोट पक्के समझ वह उनके स्वाभिमान की कीमत पर दलित वोटों को अपने पाले में लाने के खेल खेलती है और इसी खेल के तहत सहारनपुर में सरकार ने राजपूतों के स्वाभिमान की जगह दलित तुष्टिकरण को ज्यादा अहमियत दी है|

ज्ञात हो उत्तर प्रदेश के ज्यादातर युवा संघ-भाजपा के छद्म हिन्दुत्त्व से प्रभावित है और जब भी भाजपा को इस मुद्दे पर किसी से लड़ने की आवश्यकता होती है, उक्त छद्म विचारधारा से प्रभावित राजपूत युवा आगे आकर लड़ते हैं और अपना कैरियर ख़राब करते हैं| 9 मई को महाराणा प्रताप की जयंती मनाने की अनुमति ना देने पर उक्त छद्म विचारधारा से प्रभावित राजपूत युवाओं को समझ लेना चाहिए कि पार्टी उन्हें सिर्फ इस्तेमाल करती है, उनके स्वाभिमान से भाजपा को कोई लेना देना नहीं है अब ना भी समझे तो वो जाने, उनका काम जाने !  यदि भाजपा सरकार को राष्ट्रवाद व राष्ट्र के स्वाभिमान से थोड़ा बहुत भी लेना देना होता, तो जयंती पर रोक लगाने के बजाय भीम सेना की गुंडई पर कार्यवाही करती| आपको ज्ञात होगा पद्मावत फिल्म मुद्दे पर भी योगीजी सबसे ज्यादा मुखर थे, पर सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद उनकी सरकार ने डंडे के जोर पर फिल्म प्रदर्शित करवाई, जबकि सुप्रीमकोर्ट के आदेश तो राजस्थान, गुजरात में भी उसी स्तर के थे|

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