यह दुनियां

यह दुनियां

आप सब लोगों ने पढ़ी मेरी पहली कविता “क्यूँ यह दुनियां?” जो सिक्के का एक पहलु थी | जिसमे सिर्फ बुराइयाँ थी,दुनियां से शिकायतें थी | पर जब मैंने सिक्के का दूसरा पहलु देखा तो उसमे बुराइयाँ ही नहीं,कुछ और भी था | जानना चाहेंगे?
“यह दुनियां”
आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
फिर भी जीना सिखाती है यह दुनियां ,
हाँ यह दुनियां ……
रोते को मुस्कुराहट दिलाती है यह दुनियां ….
है मुशुकिलें पग-पग पर यहाँ …..
फिर भी मुश्किलों से लड़ना सिखाती है यह दुनियां…..
क्या हुआ अगर कोई नहीं है अपना यहाँ ……
फिर भी रिश्तों के बंधन मे बांधती है यह दुनियां…..
फूलों की तरह खिलखिलाते चहरे है यहाँ …….
बारिश की बूंदों जैसे ख़ुशी के आंसू है यहाँ ……..
हाँ कुदरत का करिश्मा है यह दुनियां ……..
है लोगों के दिलों मै नफरत यहाँ …….
फिर भी प्यार के दो मीठे बोल से नफरत मिटाती है यह दुनियां …….
आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
फिर भी जीना सिखाती है यह दुनियां , हाँ यह दुनियां……
मुस्कुराकर जीने का नाम ही है यह दुनियां ……..!!

तो यह था सिक्के का दूसरा पहलु ,नहीं-नहीं माफ़ कीजिएगा ….सिक्के का नहीं दुनियां का दूसरा पहलू |

कु.राजुल शेखावत

राजस्थानी भाषा में कुछ शब्द वाक्य जिन्हें बोलना त्याज्य है
ताऊ डाट इन: ताऊ पहेली – 88

13 Responses to "यह दुनियां"

  1. Uncle   August 22, 2010 at 1:29 am

    Nice

    Reply
  2. क्षत्रिय   August 22, 2010 at 1:31 am

    बहुत बढ़िया रचना

    Reply
  3. Ratan Singh Shekhawat   August 22, 2010 at 1:40 am

    दुनियां को जिस नजर से देखो वैसी ही नजर आती है ये दुनियां

    Reply
  4. प्रवीण पाण्डेय   August 22, 2010 at 2:37 am

    किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार,
    ..
    ..
    बड़ी सुन्दर कविता।

    Reply
  5. Pagdandi   August 22, 2010 at 6:26 am

    hmmmmmmm bhut khub ……ye hui na bat………jesi drashti wesi srashti..lov u rajul……

    Reply
  6. Rakesh   August 22, 2010 at 7:52 am

    आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …
    फिर भी जीना सिखाती है यह दुनियां , हाँ यह दुनियां……
    मुस्कुराकर जीने का नाम ही है यह दुनियां ……..!!

    usha ….aap bahut hi badhiya liokh gayi hai ..jeevan ka her kshan jo es duniya ke saath hamara gujarta hai pratipal hame sikhaata hai sahajta se bina kisi banawat ke alankar ke aapne sampreshit ker diya …layatmkta ….kavya ko gati dene wali hai ….

    Reply
  7. राज भाटिय़ा   August 22, 2010 at 9:43 am

    अजी हमे तो इस दुनियां का दूसरा पहलू क्या सभी पहलू मंजुर है, सब देख चुके है,लेकिन कर कुछ नही सकते. धन्यवाद

    Reply
  8. Mithilesh dubey   August 22, 2010 at 10:34 am

    बहुत बढ़िया रचना………..

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  9. नरेश सिह राठौड़   August 22, 2010 at 10:36 am

    दुनिया के रंग इतने ही नहीं है और भी आयेंगे थोड़ा समय है | सुन्दर विचारों के लिए आभार |

    Reply
  10. Coral   August 22, 2010 at 12:29 pm

    nice one !

    Reply
  11. चैन सिंह शेखावत   August 22, 2010 at 1:32 pm

    bahut sunder…abhaar..

    Reply
  12. ताऊ रामपुरिया   August 22, 2010 at 1:57 pm

    बहुत सही पहलू पेश किया, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    Reply
  13. अन्तर सोहिल   August 23, 2010 at 11:16 am

    हाँ पहले कुछ अधूरापन सा था
    अब रचना पूर्ण हो गई

    प्रणाम स्वीकार करें

    Reply

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