म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव

म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।
कोरा कोरा मटका रो सोंधो -सोंधो पाणी।
गर्मी रा मौसम को कलेवो, छाछ – राबड़ी और धाणी
पीपल अर खेजड़ा री, ठंडी शीतळ छांव
म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।।(1)

पावणा रो अठै होवै मोकलो सत्कार
टाबर ,जिव -जिनवारां न हेत रो पुचकार
सीधा सांचा लोग अठा रा, त्योंहारा रो चाव

म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।।(2)
केर कमटिया सांगरी का मेवा री सुवास
धर्म दान और वीरता रा मंड्या पड्या इतिहास
नर -नारयां रो अठे ,फुटरो बणाव्
म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।।(3)

प्याऊ ठंडा पानी का, हेला रो हेत अठै
मीठी बोली ऱी अपणायत आ सोना जेड़ी रेत् कठै
दुबड़ी ऱी जड़ की तरियां, आपस रो जुडाव
म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।।(4)

गजेन्द्र सिंह शेखावत

शब्दार्थ- 1.कलेवा- नाश्ता, 2.पावणा-मेहमान,3. मोकल़ो- खूब अच्छा,4.टाबर -बच्चे ,4.फुटरो- सुंदर,5.बणाव्- श्रृंगार, 6.हेत-अपणायत – नेह ,आत्मीयता

6 Responses to "म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव"

  1. ब्लॉ.ललित शर्मा   April 14, 2013 at 8:26 am

    भोत सोणी रचना

    Reply
  2. दुबड़ी ऱी जड़ की तरियां, आपस रो जुडाव
    म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव ।।,,,वाह वाह ,,,
    बहुत बढ़िया उम्दा प्रस्तुति,आभार
    Recent Post : अमन के लिए.

    Reply
  3. अरे वाह! बहुत ख़ूब

    और

    यह भी!

    केतना हमे सतइबू हमार सजनी!

    Reply
  4. पूरण खण्डेलवाल   April 14, 2013 at 1:13 pm

    सुन्दर कविता !!

    Reply
  5. ताऊ रामपुरिया   April 14, 2013 at 3:27 pm

    गर्मी रा मौसम को कलेवो, छाछ – राबड़ी और धाणी
    पीपल अर खेजड़ा री, ठंडी शीतळ छांव
    म्हारे मरुधर देश रा प्यारा ढाणी-गाँव

    बहुत सुंदर, अभी कल ही इस माहोल से वापस लौटे हैं.आपने अनुभव को शब्द दे दिये.

    रामराम.

    Reply

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