मै हूँ नेता तेरे देश का

लोगों को भड़काता हूँ, आपस में लड़वाता हूँ !
उनकी धन संपदा लेकर, फ़िर मै मौज मनाता हूँ !!
गबन करके सरकार की, आंखों में धुल उडाता हूँ !
गेहूँ,चावल,दाल दबाकर, महंगे दाम कमाता हूँ !!
बढ़ गई है आबादी देश की, दंगे करके मरवाता हूँ !
स्वार्थ सिद्ध करने को अपने, लोगों की बलि चढाता हूँ !!
तिकड़म से कुर्सी करता हासिल,सबकी सरकार गिरता हूँ !
एक्टिंग में भी हूँ मै माहिर,घडियाली आंसू बहाता हूँ !!
काले करतूतों की कालिख लगने पर,नोटों से दाग छुड़ाता हूँ !
मै हूँ नेता तेरे देश का, तुम सब पर राज चलाता हूँ !!

ऑरकुट और HI5.com पर भी बड़ी मजेदार स्क्रब और मेसेज मिलते रहते है इसी कड़ी में उपरोक्त कविता Hi5.com पर सकलदीप चौरसिया ने मुझे भेजी जो रोमन टंकण थी जिसे हिन्दी में टाइप कर मैंने यहाँ परोस दी !

11 Responses to "मै हूँ नेता तेरे देश का"

  1. Datar Singh   January 2, 2009 at 2:48 am

    शानदार ! ऐसे ही है हमारे देश के नेता !

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  2. P.N. Subramanian   January 2, 2009 at 3:08 am

    अपने यहाँ अमरीका जैसा लोकतंत्र आ जाए तो कुछ राहत मिल सकती है.

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  3. नारदमुनि   January 2, 2009 at 4:08 am

    aaj ke neta. ha.. ha.. narayan narayan

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  4. ताऊ रामपुरिया   January 2, 2009 at 4:19 am

    बहुत सही चित्रण किया है।

    रामराम।

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  5. यह नेता का चित्रण है जो नेतृत्व नहीं करता पर उस के सारे सुख लेता है।

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  6. रंजन   January 2, 2009 at 4:54 am

    बहुत ्सही!!

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  7. mehek   January 2, 2009 at 5:05 am

    bahut khub

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  8. dhiru singh {धीरू सिंह}   January 2, 2009 at 7:04 am

    जिस तरह हाथ की सभी ऊँगली एक सी नही होती उसी तरह सब नेता एक से नही होते . अब यह कौन से नेता क जिक्र किया वह भी बताएं

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  9. हिमांशु   January 2, 2009 at 7:30 am

    सकलदीप चौरसिया जी व आपको इस कविता के लिये धन्यवाद.

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  10. रंजना   January 2, 2009 at 1:29 pm

    dhanyawaad ! achhi cheejon ko kitni baar bhi padho achcha hi lagta hai.

    sahi vyangya panktiyan hain.

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  11. नरेश सिह राठौङ   January 2, 2009 at 1:54 pm

    ९९% नेताओं का चरित्र एसा ही है ।

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