मैनेजर ताऊ और तीन लिफाफे

मैनेजर ताऊ और तीन लिफाफे

कई सालों से मैनेजर ताऊ अपनी कम्पनी को बढ़िया तरीके से लाभ में चला रहा था | कम्पनी में काम करने वाले कई सहकर्मी मैनेजर ताऊ की इस सफलता से मन ही मन बड़े जलते थे | लेकिन ताऊ के आगे उनकी एक न चलती थी लेकिन जब से सेठ के छोरे ने विदेश से प्रबंधन की पढाई कर लौटने के बाद कम्पनी का कार्यभार संभाला ताऊ विरोधियों ने उसे ताऊ के खिलाफ बहला फुसला दिया | चापलूसों से घिरा सेठ का छोरा उनके कहने पर कम्पनी कार्यों में कई उल्टे सीधे निर्णय लेने लगा जाहिर है ऐसे में कम्पनी का नुकसान होना तय था | मेनेजर ताऊ ने सेठ के छोरे को खूब समझाया कि ये हिंदुस्तान है यहाँ सफल होने के लिए सिर्फ पढाई से काम नहीं चलता ” पढाई के साथ गुणाई भी चाहिए जो विदेशों में नहीं सिर्फ ताऊ प्रबंधन विश्वविद्यालय में ही मिलती है जिसका पास आउट मै हूँ इसलिए मेरा कहना मान वर्ना इन चमचो के कहने से चलेगा तो तेरी ये कम्पनी एक दिन बंद हो जायेगी | पर चमचों से घिरे सेठ के छोरे को ताऊ की बात कहाँ समझ आने वाली थी |
बदली परिस्थितियां देखा मैनेजर ताऊ ने इस्तीफा देकर किसी अन्य कम्पनी की राह पकड़ी | पर ताऊ को पता था कि अब ये चापलूस मण्डली कोई भी आने वाले मैनेजर को ढंग से काम नहीं करने देगी और घाटे में जाने के कारण बेचारे की नौकरी ना चली जाए अतः ताऊ ने नए मैनेजर को कार्यभार सौंपते हुए तीन लिफाफे यह कहते हुए दिए कि जब भी तुम्हारी नौकरी के ऊपर कोई संकट आये तब इन लिफाफों में से लिखे नंबर के अनुसार बारी बारी से खोलना तुम्हे संकट से निकलने का रास्ता मिलेगा |
साल भर बाद जैसे ही कम्पनी का लाभ-हानि खाता बना कम्पनी घाटे में थी इस वजह से अपनी नौकरी पर लटकी तलवार का संकट देख नए मैनेजर को ताऊ के लिफाफे याद आये उसने तुंरत लिफाफा न. १ खोला जिसमे लिखा था –
” अपनी नाकामयाबियों का सारा दोष मेरे ऊपर डाल दो ” |
मैनेजर ने यही किया सेठ को कह दिया कि ” ताऊ के कार्यकाल में उसके द्वारा लिए गए गलत निर्णयों की वजह से कम्पनी में घाटा हुआ है यह तो मै था सो कम्पनी को कुछ संभाल लिया वरना ताऊ तो पूरी कम्पनी को ही डुबोने का काम कर गया था |
इस तरह मैनेजर ने अपनी नाकामयाबी का दोष ताऊ के सिर मढ़ अपनी नौकरी बचा ली | पर अगले साल फिर कम्पनी घाटे में | फिर मैनेजर ने ताऊ का लिफाफा खोला | लिखा था -” सारा दोष सरकारी नीतियों पर डाल दो ” मैनेजर पढ़कर समझ गया और उसने यही किया सारा दोष सरकार की बदली नीतियों पर डाल कर फिर नौकरी बचा ले गया |
तीसरी साल कम्पनी फिर घाटे में | मैनेजर ने ताऊ द्वारा दिया तीसरा लिफाफा खोला जिसमे लिखा था|
“अब बहुत हो गया इसलिए अब इस्तीफा देकर नए मैनेजर के लिए तू भी ऐसे ही तीन लिफाफे तैयार करले ”

16 Responses to "मैनेजर ताऊ और तीन लिफाफे"

  1. वाह क्या बात है?

    जिधर देखता हूँ,
    उधर तू ही तू है।
    दिलों मे समाया हुआ
    ताऊ ही है।।

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  2. Udan Tashtari   October 26, 2009 at 1:11 am

    बहुत भीषण मेनेजमेन्ट गुरु है ताऊ!! 🙂

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  3. Mishra Pankaj   October 26, 2009 at 1:40 am

    बहुत सही भाई ताऊ के किस्से नेक
    बोदूराम भी हमारा ताऊ आश्रम से ही पढा है 🙂

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  4. Vivek Rastogi   October 26, 2009 at 2:23 am

    हमको भी ऐसे ही किसी मेनेजमेन्ट मन्त्र की तलाश थी।

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  5. ललित शर्मा   October 26, 2009 at 2:47 am

    वाह ताउ जी की बात निराली है
    इनके पास हर ताळे की ताळी है
    म्हारा ताऊ किसी ते कम नही सै
    सारी दुनिया इसकी देक्खी भाळी है

    जय हो रतन सिंग जी

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  6. यह मजाक नहीं है। मैं तो इस तरह एक नंबरी कंपनी को कंगाल होते देख चुका हूँ और नतीजा भुगता बेचारे कर्मचारियों ने।

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  7. खुशदीप सहगल   October 26, 2009 at 3:14 am

    ये आईआईएम वाले क्या खाक सिखाएंगे…ताऊ ने तो एक झटके में पूरा प्रबंधन शास्त्र सिखा दिया…

    जय हिंद…

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  8. तीन साल ब्लॉगरी में हो जाते, तब ये गुर खोलते तो सेफ रहता! 🙂

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  9. कुन्नू सिंह   October 26, 2009 at 6:06 am

    रतन जि, आपका वो ब्लाग वाला काम प्रोग्रेस मे है..

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  10. ताऊ रामपुरिया   October 26, 2009 at 7:40 am

    "ताऊ मेनेजमैंट कालेज" की इस साल भी सारी सीटे इसीलिये फ़ुल हो गई हैं शायद?:)

    रामराम.

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  11. राज भाटिय़ा   October 26, 2009 at 10:16 am

    यह देश भी तो ऎसे ही चल रहा है, पहले साल जीत की खुशियो मे बीत जाता है, दुसरे साल ताऊ का पहला लिफ़ाफ़ा खुलता है, तीसरे साल दुसरा लिफ़ाफ़ा, चोथे साल तीसरे लिफ़ाफ़े की जगह आरोप … ओर फ़िर पांचवे साल झॊपडी मे सोने का नाटक…
    बहुत सुंदर,

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  12. सुशील कुमार छौक्कर   October 26, 2009 at 1:45 pm

    वाह जी वाह ताऊ जी तो हर जगह छाये रहते है। अच्छी पोस्ट।

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  13. रंजन   October 29, 2009 at 3:48 am

    मजेदार…

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  14. नरेश सिह राठौङ   April 11, 2010 at 8:16 am

    चारो और ताऊ का है शोर |

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  15. White-World   July 4, 2012 at 12:29 pm

    Tau to Kamaal Hai…

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  16. BHANWARSARATHORE JOSHSHRI   December 28, 2014 at 1:34 pm

    ताऊ के एक नंबर लिफाफे की तरह ही आज की सरकारे भी यही कर रही है और मजे से अपने 5 वर्ष बिता कर चलती बनती है !!!!! और सारा दोष पुराणी सरकारों पर डालती रहती है !!!

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