मानव मूल्य

मानव मूल्य


उपरोक्त रचना फेसबुक मित्र श्री हरिकृष्ण लाल सचदेव द्वारा ज्ञान दर्पण पर प्रकाशनार्थ भेजी गयी जो आपके सम्मुख प्रस्तुत है

संघर्ष एवं क्षत्रिय |
pc to phone काल करे जी मेल के द्वारा
ताऊ अस्पताल में बाबाश्री ललितानंद जी महाराज
हिंदुस्तान का दिल है दिल्ली !

11 Responses to "मानव मूल्य"

  1. विवेक सिंह   September 10, 2010 at 3:46 pm

    बहुत सुन्दर !

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  2. Uncle   September 10, 2010 at 3:55 pm

    Nice

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  3. मनोज कुमार   September 10, 2010 at 4:14 pm

    आप की इस ग़ज़ल में विचार, अभिव्यक्ति शैली-शिल्प और संप्रेषण के अनेक नूतन क्षितिज उद्घाटित हो रहे हैं।

    अंक-8: स्वरोदय विज्ञान का, “मनोज” पर, परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!

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  4. honesty project democracy   September 10, 2010 at 4:14 pm

    सार्थक और उम्दा प्रेरक विचार …

    Reply
  5. ललित शर्मा   September 10, 2010 at 5:25 pm

    बहुत सुंदर विचार हैं
    आभार

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  6. राज भाटिय़ा   September 10, 2010 at 5:42 pm

    बहुत सुन्दर !धन्यवाद

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  7. प्रवीण पाण्डेय   September 10, 2010 at 5:45 pm

    बहुत प्रेरक, मुझे भी मानव ही रहने दिया जाये।

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  8. ललित शर्मा   September 11, 2010 at 2:16 am


    गणेश चतुर्थी एवं ईद की बधाई

    हमीरपुर की सुबह-कैसी हो्गी?
    ब्लाग4वार्ता पर-पधारें

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  9. ताऊ रामपुरिया   September 11, 2010 at 6:08 am

    बहुत सुंदर, गणेश चतुर्थी एवम ईद की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  10. Pagdandi   September 11, 2010 at 7:47 am

    itna bura na karo ki hewan ban jawo,
    itna accha bhi na karo ki bhagwan ban jawo,
    bas karo itna hi ki insan ban jawo …….

    manv ko manv hi rahane do …bhut accha

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  11. नरेश सिह राठौड़   September 11, 2010 at 10:45 am

    बहुत सुंदर रचना है | आजकल मनुष्य बने रहना भी बहुत बड़ी बात है |

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