माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी

एक बेटी के मन की आवाज माँ के लिए

माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी |
सगळा रिश्तां में, माँ तूं है सै सूं न्यारी निरवाळी ||

नौ महीना गरभ मै राखी, सही घणी तूं पीड़ा |

ना आबा द्यूं अब, कोई दुखड़ा थारै नेड़ा ||

तूं ही माँ म्हनै हिंडायो, चौक तिबारा में पालणों |

माँ तूं ही सिखायो म्हनै, अंगणिया में चालणों ||

सोरी घणी आवै निंदड़ळी, माँ थारी गोदी मै |

इतराती चालूं मैं पकड़ नै, माँ थारी चुन्दड़ी का पल्ला नै ||

हुई अठरा बरस की लाडी, करयो थै म्हरो सिंणगार |

मथी भेजो म्हनै सासरिये, थां बिन कियां पड़ेली पार ||

मथी करज्यो थै कोई चिंता, संस्कारी ज्ञान दियो थै मोकळो |
म्हूं थारी ही परछाई हूँ, ना आबा द्यूं ला कोई थानै ओळमो ||

राजुल शेखावत

10 Responses to "माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.