भ्रष्टाचार की समाप्ति जन लोकपाल विधेयक से संभव ही नहीं

“कुँवरानी निशा कँवर”
उच्च कोटि के सामाजिक कार्यकर्ता श्री अन्ना हजारे निश्चित रूप से साधु वाद के पात्र है !किन्तु आज की इस विषाक्त क्षीण एवं चहूं ओर से पतन पर पहुँची दयनीय व्यवस्था (शासन एवं प्रशासन ही नहीं बल्कि शिक्षा सहित समूचा तंत्र ) के लिए निश्चित रुप से पतन की पराकाष्ठा को पार कर चुका भ्रष्ट नेतृत्व ही उत्तरदायी है !यह आप सभी से छिपा हुआ नहीं है !वर्तमान परिवेश मे जहाँ मानवीय मूल्यों के साथ आमजन का जीवन दु:भर हो गया है !इस अराजक बेलगाम, झूठ से परिपूर्ण, दुश्चरित्र शक्तियों के व्यवस्था संचालन के अनैतिक, दिशाहीन, कुकृत्यों ने संपूर्ण मानव जाति को विनाश के गहरे गर्त में गोते लगाने के लिए छोड़ दिया है! आज की इस विभत्स परिस्तिथि में यह सरकार श्री अन्ना हजारे के आमरण अनशन ,के बल पर तथाकथित “जन लोक-पाल विधेयक”को पारित करने के लिए झुकी है |और इसका सर्वत्र स्वागत भी होरहा है |किन्तु मै एक सच्ची क्षत्राणी हूँ और मेरी दूर द्रष्टिता जो देख रही है वह कुछ भिन्न स्थिति है |स्वामी रामदेव के साथ जब पराक्रमी, सद्चरित्र,ईमानदार,केवल आर्थिक ही नहीं सभी प्रकार के भ्रष्टाचरण से मुक्त लोगो के संघटन “श्री क्षत्रिय युवक संघ” और “श्री क्षत्रिय वीर ज्योति’ जैसे संगठनों के हुए गुप्त समझौते की जानकारियां आखिर कुछ राजनितिक दलों ने हासिल कर ही ली |और वर्तमान हर क्षेत्र में भ्रष्ट होचुके तंत्र ने अपने अस्तीत्व को बचाने के लिए यह “जन लोक-पाल विधेयक “के द्वारा संपूर्ण भ्रष्टाचार को समाप्ति के खिलाफ तैयार हुए इस ज्वार को शांत करने का यह नया बहाना ढूंढ़ ही लिया | इससे वर्तमान राजनितिक दल और भ्रष्ट तंत्र कुछ और दिन बरक़रार रहेगा | लगभग अनाम वकील श्री शांति भूषण जैसे लोग जो पहले अच्छी मलाई ,कांग्रेस में मंत्री रह कर खा चुके है|अब नए सिरे से अपनी और अपने पुत्र-पौत्रों के लिए स्थायी मलाई का इंतजाम जनता के प्रतिनिधि बन कर रहें है | जिस ड्राफ्ट कमिटी में कांग्रेस का पूर्व सिपहसलार अध्यक्ष होगा ,वह जनता का प्रतिनिधि कैसे होगयी और जो अन्य मंत्री गण है वो जनता के प्रतिनिधि कैसे नहीं है |यह बात स्वस्थ मानसिकता वाले व्यक्ति के गले से नीचे कैसे उतरेगी | इस ड्राफ्ट कमिटी में दोनों औरसे कांग्रेस और सरकार या यो कहे की भ्रष्टाचार में आकंठ नहीं तो बहुत कुछ हिस्से तक तो डूबे हुए या भ्रष्ठाचार में सहायक रहे लोग ही है |श्री अन्ना जी यातो इस चाल को समझ नहीं पा रहे है या समझना ही नहीं चाह रहे है |यह लोकपाल कैसे स्वयं भ्रष्टाचार से मुक्त होगा यह बात समझ से परे है ???जब पूरा की पूरा तंत्र ही भ्रष्ट है तब “लोक-पाल महोदय” की नियुक्ति कैसे और कहाँ से होगी ???? क्या यह अहम् सवाल नहीं है ????? एक और भी बात है की “जनता के प्रतिनिधि” या जनता की ओरसे यह क्या नया शिगूफा है ????क्या संसद सदस्य ,विधायक गण,या अन्य जन-प्रतिनिधि जनता के नुमयन्दे नहीं है ????या जनता द्वारा उन्हें चुना नहीं गया और क्या स्वतन्त्र स्वायत-शासी बोड़ी द्वारा उनका चुनाव नहीं हुआ है ????? और यदि हुआ है तो फिर यह नए विधेयक जन लोक-पाल के द्वारा “लोक-पाल महोदय “ऐसा क्या झुनझुना फिरादेंगे कि उससे भ्रष्टाचार समाप्त होजायेगा ?????और क्या इससे पहिले कोई और स्वतन्त्र बोड़ी ऐसी नहीं है क्या ????कोई बताये कि ,सर्वोच्च न्यायलय सहित सभी न्यायलय, चुनाव-आयोग, केंद्रीय जाँच ब्यूरो,और अन्य जाँच योग व निगम , राज्यपाल ,और माननीय राष्ट्रपति महोदय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए पहिले से ही मोजूद है |क्या इसमें कोई भी रोक लगाना तो दूर तनिक भी भ्रष्टाचार को कम कर पाया???यदि नहीं तो फिर राष्ट्र को अब इस नए लोकपाल कि नियुक्ति कि झूंठी दिलासा देना का छल न किया जाये |
और भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए उठ रहे तूफान कि आंधी को ऐसे बहकावे से रोकने का असफल प्रयास न किया जाये |हां एक बात और श्री अन्ना हजारे जी उस ड्राफ्ट कमिटी में क्या लागू करवा लेंगे जिसमे बाकि सभी अपने स्वार्थो और वंशवाद के भ्रष्टाचार को माथे पर बिठाये हुए है |ध्यान रहे माननीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ,भूतपूर्व प्रधान मंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री,क्षत्रिय हट के लिए प्रसिद्द श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे लोग जिस भ्रस्टाचार को केबिनेट और सरकार के मुखिया रह कर तनिक भी कम न कर सके ,वहां केवल एक ड्राफ्ट कमिटी कि ५०% के केवल सदस्य मात्र बन कर श्री अन्ना हजारे क्या कर लेंगे ????जिन प्रधानमंत्रियों का उदहारण दिया है वे स्वयं व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से कोसो दूर है केवल संग दोष के मारे है |तो इस प्रकार के संगदोष जिससे स्वयं राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी नेहरू की चौकड़ी के संग-दोष से नहीं बच पाए |जब स्वयं महात्मा गाँधी के रहते हुए भी नेहरु ने १४ अगस्त १९४७ अंग्रेजों की भ्रष्ठाचार की जननी शासन व्यवस्था और कानून व्यवस्था जिसे ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर भी कहते है और उनकी सभी पद्दति लागू करवा दी | इस प्रकार के संगदोष श्री अन्ना हजारे कैसे बच पायेंगे ????????यह एक हकीकत से सराबोर सवाल है और कोई भी सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी इसे नकार नहीं सकता |इसलिए यह भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ खड़े हुए जन सैलाब को ठंडा कर वर्तमान भ्रष्ट राजनितिक और प्रशासनिक तंत्र को पुनर्जीवन देना का एक कुत्सित प्रयास मात्र के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है |

“जय क्षात्र-धर्म”
“कुँवरानी निशा कँवर”
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

11 Responses to "भ्रष्टाचार की समाप्ति जन लोकपाल विधेयक से संभव ही नहीं"

  1. फिलहाल बिल तो ठीक ठाक ही लग रहा है. जरूरत है कि जो व्यक्ति बैठे वह कलाम साहब की तरह हो और ऐसा न हो कि एक की जगह तीन लोकपाल बना दिये जायें, चुनाव आयोग की तरह.. फिर यह क्यों भूला जाये कि बाबा रामदेव जी के रूप में अच्छा विकल्प है..

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  2. प्रवीण पाण्डेय   April 10, 2011 at 4:27 pm

    15 अगस्त तक ही सच पता चल पायेगा।

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  3. PADMSINGH   April 11, 2011 at 12:40 am

    मुश्किलें ज़रूर हैं… आपके प्रश्न भी विचारणीय हैं… लेकिन यह सोच कर प्रयास ही बंद कर देना उचित नहीं होगा… देखते हैं क्या होता है.

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  4. Udan Tashtari   April 11, 2011 at 1:54 am

    आगे आगे देखिये…होता है क्या

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  5. अजय कुमार झा   April 11, 2011 at 4:32 am

    इतनी जल्दी ही इसका आकलन/विश्लेषण करके और खासकर नकारात्मक अंदेशों आशंकाओं के बल पर कब तक ऐसे प्रयासों पर प्रश्नचिन्ह लगाते रहेंगे हम आप । सबसे अहम बात ये है कि सिर्फ़ प्रश्न और अंदेशे ही हैं हमारे पास कोई कारगर विकल्प नहीं तो फ़िर जो सोच रहे हैं , जो कर रहे हैं उनका साथ ही क्यों न दिया जाए और ऐसा तब तक किया जाए जब तक कि सब ठीक न हो जाए । क्योंकि साथ छोडते चले जाने से तो फ़िर इस देश का रसातल में जाना तय ही है । हम सब अब भी उस ग्रामीण जनसंख्या को भूल रहे हैं जो अभी भी बहुत से नगरीय दूषण और विचारों से अछूता है । एक सजग नागरिक बनने की कोशिश जारी रखिए , निराश नागरिक नहीं ..

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  6. नरेश सिह राठौड़   April 11, 2011 at 9:55 am

    मै आपकी बात से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ | ये जो बदलाव की आंधी आई है इसे बहने दीजिए, कुछ ना कुछ बदलाव जरूर आएगा |

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  7. Ramkesh patel   April 11, 2011 at 5:16 pm

    देखते है क्या होता है |

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  8. kunwarani nisha kanwar   April 11, 2011 at 5:55 pm

    aisa nahi hai yah ek gahari chal hai ,,,,,,,,swami ramdevji ke sath huye samjhoute ke bare me rajnitik dalo ne suchanye ektrit karne ke bad ramdev ji ke us andolan ki yah ek nayi kaat khoji gayi hai,,,,,,,,,varna isme SHANTI BHUSHAN AUR PRASHANT BHUSHAN JAISE LOG NA KEVAL HAI BALKI SHRI SHANTI BHUSHAN JI TO ADHYAKSHA BHI HAI ,UNKE BARE JYADA LIKHNA ACHCHHA NAHI HOGA KISI BHI KANUN KE KSHETRA KE VYAKTI SE JANKARI LI JASAKTI HAI KI BHRASHTACAR ME UNKA GRAPH KITNA UNCHA HAI

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  9. kunwarani nisha kanwar   April 11, 2011 at 5:59 pm

    सलमान खुर्शीद ने भी कहा है कि लोकपाल बिल से बहुत कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने सिब्बल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भगवान है तब भी अपराध होते ही हैं।

    इससे पहले सिब्बल ने कहा कि जरूरत लोकपाल बिल की नहीं बल्कि व्यवस्था को बदलने की है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि जहां सुविधा ही नहीं है, वहां लोकपाल बिल क्या करेगा। उन्होंने कहा था कि किसी गरीब को अपने मरीज को अस्पताल में भर्ती करना होता है, लेकिन बिना किसी नेता के फोन बिना यह हो नहीं पाता, वहां लोकपाल बिल क्या करेगा? एक गरीब बच्चे को स्कूल में दाखिला नहीं मिलता। उनके लिए पर्याप्त स्कूल नहीं हैं और शिक्षा की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में लोकपाल बिल क्या करेगा? उन्होंने पूछा कि क्या लोकपाल बिल से लोगों को सिलेंडर, बिजली, पानी, फोन जैसी जरूरी सुविधाएं मिल पाएंगी?
    ISKA KYA ARTH HAI ,,,,,,,?????
    AUR DRAFTING COMMETEE ME SHRI NANNA JI KEVAL EK MEMBER HAI NA KI KOI ADHYAKSHA YA VEETO POWER HOLDER AUR SHRI ANNA HAJARE JI SHRI SHARAD PAWAR SAHAB KE BAHUT PURANE SATHI HAI YAH KISSE CHHIPA HAI???????

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  10. kunwarani nisha kanwar   April 11, 2011 at 6:00 pm

    यह लोकपाल कैसे स्वयं भ्रष्टाचार से मुक्त होगा यह बात समझ से परे है ???जब पूरा की पूरा तंत्र ही भ्रष्ट है तब "लोक-पाल महोदय" की नियुक्ति कैसे और कहाँ से होगी ???? क्या यह अहम् सवाल नहीं है ?????

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  11. RAJNISH PARIHAR   April 12, 2011 at 4:57 am

    भ्रष्टाचार चारो और फ़ैल गया है ,लेकिन इसका मतलब ये नही है की हम कोई प्रयास ही ना करें….आपने तो एकतरफा निर्णय ही सुना दिया है !अन्ना ने एक पहल की है ,उन्हें कोई जादू की छड़ी नही मिली की सब ठीक हो जाये…शरुआत है …वांछित परिणाम मिलने में कुछ समय लगेगा पर मिलेंगे जरूर….!लोकपाल से सब कुछ भले ही ना मिले लेकिन कुछ न कुछ अवश्य ही मिलेगा…

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