श्री भैरों सिंह शेखावत की प्रशस्ति में -3

श्री भैरों सिंह जी शेखावत के जन हित कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्वान कवि डा. उदयवीर शर्मा द्वारा रचित कुछ दोहे – था कुदरत रो दिवाला,था कुदरत री जोत |
के था कुदरत कोराणी,थारो उजलो गोत ||२२

मरुधर माटी मुलकरी,चितचधिया चतुरेश |
गावे गीत गुमानिया,गावे गीत गणेश ||२३

हे नरपुंगव सरल चित,गौरव गावे गीत |
हे मरुधर का महारथी,दीं-हीन रा मीत ||२४

“भैरू बाबो”बजिया,जुड्या हिये रा तार |
जस गाथा थारी सरस,जन-मन हेतु अपार ||२५

कीरत कुम्भ सुहावनो,राख्यो करम रे द्वार |
ठायोसो पायो सहज,जस-मानक रो हार ||२६

दुनिया भागे नित घणी,पण नि हेत विराट |
हेत भाव जिन रखियो,बण्यो हिये समराट ||२७

जेपर तज दिल्ली गया,म्हे नी सका भुलाय |
प्यारे गोकल-कण ज्यूँ,आवो याद सवाय ||२८

धीरो धाकड़ धुन-घणी,सांचल सिंध सपूत |
शेखावाटी सेवरो,अनभय अडिग अभूत ||२९

थांका गुण दीपे सदा,समरसता री हाट |
पुरसारथ रे बल गुनी,बावन बण्यो बिरात ||३०

मंगल थांकी भवना,मंगल म्हारा भाव |
सौ बरसा लग थे रामो,जन सु रख जुडाव ||३१

श्री सोभाग्य सिंहजी,भगतपुरा के संकलन से

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