पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी के आपातकाल कारावास का काव्य वर्णन

इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाये आपातकाल के दौरान शेर-ए-राजस्थान पूर्व राष्ट्रपति स्व. भैरोंसिंह जी को भी कारावास जाना पड़ा| उनके कारावास का राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्य सिंह जी ने राजस्थानी काव्य में इस तरह वर्णन किया-

आफत कांठल ऊमड़ी, आंधी संग घणघोर |
हाथ रात सूझी नयी, कुहलाया जन मोर ||१

वारंट वारिद गड़ गड़या, सम्पा समन सलाव |
नद नाला जल ऊफण्या, भरग्या जेल तलाव ||२

धीरज धार पाल्यो धरम, थमगो विपद बयार |
विकसी जनमन वाटिका, रौनक बाग़ बाजार ||३

पूत देवकी जनम घर, मास गुनीस बिताय |
रण चुनाव कंसणी हरा, सत्ता दी पलटाय ||४

कोप कंसणी कालिका, चंड प्रचंडी चाल |
लोकतंत्र मोलो पड्यो, राजनीति बेहाल ||५

विपख विरोधी युवा व्रध, बंदी लिया बणाय |
बरस एक ऊपर नवम, बीता कारा मांय ||६

बरस गुणिस चालीस बे, पिता तजी जद देह |
भार पड्यो भैरव भुजां, झेल लियो कंधेह ||६

जायी लाल जवाररी, ब्याही पीरोजेह |
ललचायी सत्ता ललक, तुरत दियो तिण || ७

जायी जवाहर लाडली, पीरोजै ब्याही |
विपख जेल पधराविया, इंदिरा जी बाईह ||८

आपात काल अचाल मन, भोग्यो कारावास |
मोदी पीलू महतो असोक, लाल देवी ज ख़ास ||९

पटनायक बीजू पुणा, बखत सिकंदर साथ |
राजनीत रण रा रसिक, विपदा घाली बाथ ||१०

छंटिया काला बादला, बूठौ बोटां मेह |
कांगरेस करतूत री, उड़गी सगलै खेह ||११

संसद सभा विधान सह, सरवर सरित समान |
जनमत मेघो बरसियो, निपज्यो सतमत धान ||१२

रजवाड़ी रजथांन री, सत्ता लिवी संभाल |
धन धीणों धापो- धपी, मिट्यो काल जंजाल ||१३

सौभाग्य सिंह शेखावत

3 Responses to "पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी के आपातकाल कारावास का काव्य वर्णन"

  1. Vinod Saini   May 16, 2012 at 5:25 am

    बहुत सून्‍दर प्रस्‍तुती

    Reply
  2. bkaskar bhumi   May 17, 2012 at 12:31 pm

    रतन सिंह शेखावत जी
    पूर्व में हुई चर्चा के अनुसार आपके ब्लॉग से कुछ लेख को अपने दैनिक समचार पत्र भास्कर भूमि में प्रकाशित किया है। अखबार का प्रतियां आप तक भेजना चाहते है। आप अपने घर की पता भेजने की कृपा करे……[email protected]

    ैभास्कर भूमि का ई पेपर देखें……www.bhaskarbhumi.com

    Reply
  3. Harun Ar   May 22, 2012 at 8:31 pm

    Hmmm …, very good

    Reply

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