भाजपा द्वारा स्व. भैरोसिंह शेखावत को मुख्यमंत्री बनाने का सच

भाजपा द्वारा स्व. भैरोसिंह शेखावत को मुख्यमंत्री बनाने का सच

टेलीविजन पर चुनावी बहसों में भाजपा के नेताओं ने जब भी स्व. भैरोसिंह शेखावत की बात चली, जबाब देते सुना गया कि भाजपा ने भैरोंसिंह जी मुख्यमत्री बनाया| जबकि हकीकत कुछ और है | यदि हम भाजपा जो तत्कालीन समय में जनसंघ के नाम से जानी जाती थी, का राजस्थान में इतिहास खंगाले तो भाजपा द्वारा भैरोंसिंह जी शेखावत को मुख्यमंत्री बनाने के दावों की सच्चाई स्वत: उजागर हो जायेगी| इसके लिए हम आपके प्रस्तुत कर रहे 1977 तक राजस्थान विधानसभा चुनावों के आंकड़े जिन्हें पढने के बाद स्व. भैरोसिंह जी शेखावत मुख्यमंत्री कैसे बने आप खुद समझ जायेंगे और भाजपा नेताओं के झूठे बयानों की असलियत पता चल जाएगी|

जनसंघ को 1951 के विधानसभा चुनाव में 8, 1957 के चुनाव में 6, 1962 के चुनाव के 15, 1967 के चुनाव में 22 और 1972 के चुनाव में मात्र 8 सीटें मिली थी। इन सभी चुनावों के नतीजों को देखकर आप अनुमान लगा सकते है कि तब राजस्थान में जनसंघ का क्या वजूद था।  इसके विपरीत रामराज्य परिषद और बाद में स्वतंत्र पार्टी कांग्रेस के बाद दूसरे स्थान पर रहा करती थी। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव में राम राज्य परिषद ने 24, 1957 में 17 सीटें जीती। 1962 में राजाओं व सेठों की बनाई पार्टी स्वतंत्र पार्टी ने 36 सीटें जीती व रामराज्य परिषद ने 3 सीटें जीती। 1967 में स्वतंत्र पार्टी 48 सीटों पर जीतकर कांग्रेस के बाद दूसरी बड़ी पार्टी बनी। 1972 में भी स्वतंत्र पार्टी ने भाजपा यानी जनसंघ से ज्यादा सीटें जीती थी।

1977 में जब सभी दलों का जनता पार्टी में विलय कर चुनाव लड़ा गया तब भी मोरारजी देसाई की पुरानी कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ स्वतंत्र पार्टी के 33 उम्मीदवारों ने चुनाव जीता। इस चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के लोगों के संख्या बल को देखते हुए महारावल लक्ष्मणसिंह को मुख्यमंत्री चुना जाना तय हुआ। पुरानी कांग्रेस के सदस्यों में से मास्टर आदित्येन्द्र भी मुख्यमंत्री बनने का दावा पेश कर रहे थे। जनसंघ के इतने सदस्य ही नहीं थे कि उसके किसी सदस्य को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की जा सके या उसका कोई सदस्य दावा कर सके। फिर भी भैरोसिंह शेखावत ने अपने दम पर मुख्यमंत्री बनने का दावा पेश किया, जबकि जनसंघ के जनता पार्टी से इतने सदस्य जीते भी नहीं थे।

स्वतंत्र पार्टी के महासचिव कल्याणसिंह कालवी ने तब भैरोंसिंह शेखावत को समर्थन दिया और वे मुख्यमंत्री बन गए। भैरोंसिंह शेखावत के मुख्यमंत्री बनने के बारे में कहा जाए कि वे अपनी पार्टी जनसंघ के दम पर नहीं, बल्कि अपने संपर्कों के दम पर मुख्यमंत्री बने थे और भाजपा को उसका मुख्यमंत्री होने का गौरव प्रदान किया तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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