भरतपुर राजवंश का यदुवंशी जादौन राजपूत वंश से ये है सम्बन्ध

भरतपुर राजवंश का यदुवंशी जादौन राजपूत वंश से ये है सम्बन्ध

सोशियल मीडिया पर अक्सर भरतपुर राजघराने को लेकर जाट-राजपूत युवाओं के बीच बहस छिड़ जाती है| जाट युवा भरतपुर के राजाओं की वीरता के नाम गाल फुलाते नजर आते हैं तो कुछ नासमझ राजपूत युवा प्रत्युतर में उन वीर राजाओं का चरित्रहनन करने वाली टिप्पणियाँ कर देते है| पर दोनों ही मानसिकता वाले युवा कभी भरतपुर राजघराने का इतिहास नहीं पढ़ते| जिन्होंने पढ़ा है वे जानते है कि भरतपुर के राजाओं का जितना सम्बन्ध जाटों से है उतना राजपूतों से भी है| इस बहस के चक्कर मे युवा ये नही जानते कि भरतपुर जाट घराने का निकास भी जादौन राजपूत वँश से ही हुआ है। इस हिसाब से वो हमारे अपने हुए ना कि पराए|

इतिहास पढेंगे तो आप पायेंगे कि करौली के जादौन राजपूत राजपरिवार व भरतपुर के जाट राजपरिवार के पूर्वज एक ही है| दोनों परिवार यदुवंशी जादौन राजा सिंधपाल के खानदान से जुड़े है| सिंधपाल की बारहवीं में राजा थानपाल हुए, इतिहास में इनका नाम तिमनपाल भी मिलता है| दामोदर लाल गर्ग द्वारा लिखित “करौली राज्य के इतिहास” के अनुसार तिमनपाल 1058 ई. में थे| गर्ग के अनुसार तिमनपाल के पुत्र सुआपाल के वंशज जाट कहलाये और उन्होंने मौजा सिनसिनी आबाद किया व भरतपुर पर काबिज हुए|

रॉयल आर्क डॉट नेट वेब साईट भरतपुर राजपरिवार द्वारा उपलब्ध कराई जानकारी के अनुसार थानपाल का तीसरे पुत्र मदनपाल भरतपुर राजपरिवार का पूर्वज है| मदनपाल के वंशज व सिनसिनी के जागीरदार बालचंद की जाट पत्नी से दो पुत्र हुए बिरद (बिज्जी) व सूरद (सिज्जी)| बालचंद के इसी जाट पत्नी से उपन्न पुत्र बिरद का वंशज खानुचंद आगे जाकर जाटों का नेता बना और उसके वंशज भरतपुर की राजगद्दी पर काबिज हुए|  सिनसिनी के जागीरदार खानुचंद के बाद चुड़ामन सिनसिनी का ठाकुर बना| जिसे बादशाह बहादुरशाह ने सन 1707 में 1500 जात और 500 सवार का मनसब दिया| 1721 में चुड़ामन के निधन के बाद उसका पुत्र मुहकमसिंह सिनसिनी जागीर का ठाकुर बना, जिसे कुछ माह बाद ही मार्च 1722 में जयपुर के महाराजा जयसिंह ने हराकर भगा दिया और चुड़ामन के भतीजे बदनसिंह को डीग व भरतपुर का राज्य सौंप दिया|

यही नहीं जयपुर के राजा जयसिंह द्वितीय ने बदनसिंह को बृजराज राजा महेंद्र की उपाधि भी दी व बादशाह से उसका अनुमोदन भी करा दिया| इस तरह बदनसिंह बृजराज राजा महेंद्र बदनसिंह के नाम से भरतपुर के विधिवत राजा बने, जिन्होंने हमेशा अपने आपको जयपुर के सामंत से ज्यादा नहीं समझा यही नहीं उनके पुत्र और राजस्थान इतिहास के जाने-माने वीर सूरजमल ने भी जयपुर के साथ वैसा ही आत्मीय रिश्ता रखा, जैसा बदनसिंह ने रखा|

इस तरह भरतपुर राजपरिवार का सम्बन्ध जितना जाटों से है उतना राजपूतों से भी है| आपको बता दें राजपूत जाति में राजपूत उसी को माना जाता है जिसके माता-पिता दोनों राजपूत हों| चूँकि भरतपुर राजपरिवार के पूर्वज जादौन राजपूत बालचंद की जाट पत्नी से उत्पन्न पुत्र थे, अत: उन्हें राजपूत नहीं मानकर उनकी माता की जाति का समझा गया और आगे चलकर वे जाट राजा कहलाये|

One Response to "भरतपुर राजवंश का यदुवंशी जादौन राजपूत वंश से ये है सम्बन्ध"

  1. Punam singh   April 29, 2018 at 2:36 pm

    Very nice information hukum

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