भगतपुरा का इतिहास | History of Bhagatpura

भगतपुरा : शेखावाटी आँचल के सीकर जिले में सीकर – लोसल – डीडवाना सड़क मार्ग पर बसा है भगतपुरा गांव | कभी यह गांव राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार और इतिहासकार ठाकुर सौभाग्यसिंहजी शेखावत की वजह से देशभर में जाना जाता था, तो आज इन्टरनेट की दुनिया में हिन्दीजगत के जाने माने ब्लॉगर व इतिहासकार रतनसिंह शेखावत व यूट्यूब पर प्रसिद्ध वीरू फौजी की वजह से देश विदेश में जाना जाता है |  यही नहीं देश के उपराष्ट्रपति और तीन बार मुख्यमंत्री रहे भैरोंसिंहजी शेखावत ने भी 1952 में अपने पहले चुनाव का प्रचार अभियान इसी गांव से शुरू किया था | खूड़ के जागीरदार ठाकुर रूपसिंहजी के छोटे पुत्र नवलसिंहजी को पिता से आजीविका के लिए छ: हजार बीघा कृषि भूमि मिली | नवलसिंहजी ने इसी कृषि भूमि में रहने के लिए एक कच्ची मेड़ी का निर्माण कराया और वि.सं. 1802 यानी सन 1745 में खूड़ और रुपगढ़ के गढ़ व महलों को त्याग कर यहाँ रहने लगे | 13 वर्ष बाद वि.सं. 1815 यानि सन 1758  में नवलसिंहजी के बड़े भाई गुलाबसिंहजी भी भगतपुरा आ गये | गुलाबसिंहजी को जीण माता के पास मोहनपुरा गांव मिला था, पर छोटे भाई से विशेष प्रेम के चलते वे मोहनपुरा गांव छोड़ कर भाई नवलसिंहजी के पास रहने के लिए आ गये | दोनों भाइयों ने मिलकर अपनी कृषि भूमि पर एक गांव बसाया जो आज भगतपुरा के नाम से जाना जाता है |

दोनों भाइयों द्वारा गांव को पूर्ण आबाद करने के उद्देश्य से विभिन्न जातियों यथा जाट, ब्राह्मण, बणिया, नाई, मेघवाल, नायक, बावरी, कुम्हार, लुहार, खाती, वाल्मीकि आदि जातियों के परिवारों को लाकर बसाया गया | गांव बसने के समय यहाँ एक शिव मंदिर बना था, जिसकी व्यवस्था के लिए लगभग चार सौ बीघा भूमि दी गई | ठाकुर जी का मंदिर बनवाया गया और भोग के लिए कई बीघा जमीन मंदिर को दान की गई, ताकि उसकी आय से पुजारी का खर्च भी चल सके | जाट, मेघवाल, बावरी, नायक आदि जाति के लोग कृषि करते थे, कुम्हार बर्तन बनाने, लुहार लोहे व खाती लकड़ी का काम करते थे | बावरी, कुम्हार, नायक, मेघवाल आदि जातियों के कुछ लोग निर्माण कार्य व हस्तशिल्प के अच्छे कारीगर भी थे | बनियों की दूकान थी जो ग्रामीणों की आम आवश्यकता की वस्तुओं की आपूर्ति कर देती थी | इस तरह हर जाति एक दूसरे पर निर्भर थी और सब मिलजुलकर आत्मनिर्भर थे |

वि.सं. 1837 सन 1780 को मुग़ल सेनापति मुर्तजा अली भड़ेच ने पचास हजार सैनिकों के साथ शेखावाटी पर आक्रमण किया और थोई, श्रीमाधोपुर, रींगस को लूटता हुआ खाटूश्यामजी पहुँच गया | जिसका मुकाबला करने के लिए शेखावाटी के सौलह हजार वीर सीकर के राजा देवीसिंहजी के नेतृत्व में एकत्र हुए, जयपुर की सेना भी इन वीरों की सहातार्थ आ डटी, जिनमें नागा साधुओं की खतरनाक टुकडियां भी थी | शेखावाटी के वीरों में सभी  जातियों के वीर थे, पर राजपूत योद्धाओं की संख्या ज्यादा थी | इस युद्ध में खूड़ के ठाकुर बख्तसिंहजी ने अपूर्व वीरता प्रदर्शित की और वीरगति को प्राप्त हुए | भगतपुरा के दोनों ठाकुर भाई गुलाबसिंहजी व नवलसिंहजी ने भी इस युद्ध में अपनी तलवार का जौहर दिखलाया और वे दुश्मन के वार से घायल भी हुये | इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए ठाकुर बखतसिंहजी के नाम को चिरस्थाई बनाये रखने के लिए ही उनके दोनों छोटे भाइयों ने अपने द्वारा बसाए गांव का नाम बख्तपुरा रखा, जो आज सरकारी रिकार्ड में भगतपुरा के नाम से जाना जाता है |

रियासती काल में इस गांव के ठाकुर गुलाबसिंहजी व नवलसिंहजी ने खाटू युद्ध में भाग लिया था तो ठाकुर हरिसिंहजी व कई अन्य योद्धाओं ने द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लिया था | ठाकुर हरिसिंहजी जयपुर की सवाई मानसिंह गार्ड्स में थे और द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने इटली सहित यूरोप के कई देशों में युद्ध में भाग लिया था | आजादी के बाद भी चीन व पाकिस्तान के साथ युद्धों में भगतपुरा के कई वीरों ने भाग लिया और वर्तमान में भी गांव की कई जातियों के लोग भारतीय सेना में देश की सुरक्षा के लिए तैनात है |

गांव में प्राचीन शिव मंदिर है, इस मंदिर की मूर्ति के नाम से लगभग चौर सौ बीघा भूमि राजस्व रिकार्ड में दर्ज है | यह ठाकुर जी का मंदिर है, जिसमें गांव के आराध्य ठाकुर जी की प्रतिमा स्थापित है | गांव में प्रवेश करते ही यह देवी का मंदिर है, गांव के राजपूत परिवारों द्वारा बनवाये इस मंदिर में हर जाति के लोग पूजा अर्चना कर सकते हैं, जो उन गावों के लोगों के लिए प्रेरक है जहाँ के मंदिरों में हर जाति का प्रवेश नहीं होता | यह गांव का कुआँ है, वर्षों तक इसी कुँए से गांव में जल आपूर्ति होती थी | गांव के कुए के पास ही यह हनुमानजी का मंदिर है, साथ में सांड शाला बनी है | गांव से बाहर बना यह केसरिया कँवर जी का मंदिर कभी बहुत प्रसिद्ध था | यहाँ भरने वाले मेले में दूर दूर से लोग आते थे, पर अब वह रौनक नहीं रही | पूर्व में यहाँ सांप काटे का सफलतापूर्वक इलाज किया जाता था इसलिए इस मंदिर की दूर दूर तक मान्यता थी | इस मंदिर के चमत्कारों की कहानियों आज भी गांव के बुजुर्गों की जुबान है, कहते हैं कि कभी यहाँ के पुजारी के आह्वान पर काले सांप आते थे | मंदिर के चमत्कारों पर हम अलग से लेख में जानकारी देंगे | गांव में लोकदेवता बाबा रामदेव, क्षेत्रपालजी महाराज व एक जैन मंदिर भी है | हालाँकि गांव में एक ही जैन परिवार है, हाल में इस परिवार के एक व्यक्ति को छोड़ सभी प्रवासी है | जैन मंदिर परिसर काफी बड़ा है, परिसर में कुआँ व गांव में पानी सप्लाई के लिए बड़ी टंकी बनी है | हनुमान जी महाराज के देवरे तो गांव के हर खेत में बने हैं, जो गांव के लोगों की धार्मिक आस्था के केंद्र है |

इस गांव में जन्में दिवंगत ठाकुर सौभाग्यसिंहजी शेखावत राजस्थान भाषा साहित्य व इतिहास में एक बहुत बड़ा नाम है | इतिहास व राजस्थानी साहित्य में उनकी साठ से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हुई है | डिंगल व पिंगल जैसी राजस्थान भाषा के वे बड़े विद्वान थे | उनके पुत्र धर्मवीरसिंहजी वर्तमान में बैंक ऑफ़ इंडिया में जनरल मैनेजर की पोस्ट पर है | हवेली वाले चैनसिंह शेखावत नेवी में कमांडर है | अर्जुनसिंह न्योरोलोजी के नामचीन डाक्टर है | भंवरसिंह व जस्सूसिंह शराब के बड़े ठेकेदार हैं तो लाला के नाम से प्रसिद्ध नरेन्द्रसिंह पंचायत राज के बड़े ठेकेदार है | बन्नेसिंह, महावीरसिंह व गुमानसिंह थानेदार पद से रिटायर्ड है |

वीरू फौजी नाम से यूट्यूब पर प्रसिद्ध विरेन्द्रसिंह डिफेन्स एकेडमी चलाते हैं जहाँ देशभर के युवा सेना भर्ती की तैयारी के लिए आते हैं | इतिहास को लेकर गांव के ही रतनसिंह शेखावत की वेबसाइट ज्ञान दर्पण.कॉम और ज्ञान दर्पण यूट्यूब चैनल देश विदेश में प्रसिद्ध है | मेघवालों में गोपालराम सदर कानूनगो रहे तो लक्ष्मणराम पटवारी रहे | राजपूत, जाट, मेघवाल जाति के बहुत से लोग सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बलों व बैंक में रहे हैं और वर्तमान में भी कार्यरत है | वर्तमान में ब्राह्मणों के भी कुछ बच्चे एयरफोर्स में है | बलबीरसिंह, मुकेश जैन, बाबूलाल बावरी, मुकेश बावरी आदि की किराणा दुकाने हैं तो ओमसिंह व राजेन्द्रसिंह का टेंट व्यवसाय है | सरपंच का चुनाव लड़ चुके रामदेव जाट के बेटे ईमित्र चलाते हैं | दुलारामजी जाट के परिवार का जयपुर, सीकर में बेटरी का बड़ा व्यवसाय है | इनकी किसान नाम की बेटरी पूरे प्रदेश में बिकती है | गांव के प्रहलादसिंह बहुत बढ़िया चित्रकार हैं, रलावता में लगी महाराव शेखाजी की प्रतिमा की डिजाइन प्रहलाद सिंह जी ने ही की थी | पूससिंह व भागीरथ बुल्डक जयपुर व सीकर में बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स बनाने वाले बिल्डर है |

आजादी के बाद सूबेदार गोपालसिंह, गोरुराम किरडोलिया, सुगन कँवर, महावीरसिंह आदि सरपंच रह चुके हैं | हवेली वाले भंवरसिंह की पत्नी मंजू कँवर वर्तमान में धोद पंचायत समिति की उपप्रधान है | गांव में सबसे ज्यादा सक्रीय राजकुमार शर्मा सामाजिक न्याय मंच के बैनर पर धोद विधानसभा का चुनाव लड़ चुके, इनसे पूर्व दिवंगत ठाकुर भंवरसिंहजी भी राम राज्य परिषद की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं | साहित्यकार सौभाग्यसिंहजी ने 1952 में राम राज्य परिषद से विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु पर्चा दाखिल किया था पर पर्चा ख़ारिज होने के बाद उन्होंने भैरोंसिंहजी के चुनाव प्रचार की बागडौर संभाली और यही कारण था कि स्व. भैरोसिंहजी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत भगतपुरा गांव से की थी | उस दिन भैरोसिंहजी ऊंट लेकर भगतपुरा आये थे और रातभर अपने मित्र सौभाग्यसिंहजी से चर्चा की व सुबह दोनों ऊंट पर सवार हो प्रचार के लिए जुट गये |

गांव में शिक्षा के लिए माध्यमिक विद्यालय है | विद्यालय के सामने ही रामनिवास जी शर्मा द्वारा बनवाया गया यह गेस्ट हाउस है | रामनिवास शर्मा जी बड़े व्यवसायी है| रामनिवास जी ने ही गांव में गौशाला बनवाई है और उसका सञ्चालन भी करते हैं | स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र है | गांव के हर घर में पेयजल की आपूर्ति हेतु नल लगे हैं, जल आपूर्ति की व्यवस्था का जिम्मा विधायक का चुनाव लड़ चुके राजकुमार शर्मा पास है | गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की नालियां बनी है और गांव के ज्यादातर रास्ते भी पक्के बने हैं | गांव का  पंचायत मुख्यालय सामी गांव में है | यातायात के लिए दिल्ली, जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, अजमेर, सूरत, अहमदाबाद, बड़ौदा आदि शहरों के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है |

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