ब्लॉग पढने के फायदे

ब्लॉग पढने के भी अपने फायदे है अब देखिये न कि कई दिनों से linux सीखने की जिज्ञासा लिए बैठा था लेकिन नही सीख पाया और ब्लॉग जगत की बदोलत आज में linux का इस्तेमाल करने लायक हो गया हूँ |
लिनुक्स का नाम सुनकर बड़ी जिज्ञासा थी कि इस आपरेटिंग सिस्टम को भी इस्तेमाल किया जाए कई साल पहले पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का भी अख़बार में वक्तव्य पढ़ा था कि कंप्यूटर सस्ते करने है तो लिनुक्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए इसी से लिनुक्स के प्रति जिज्ञासा और बढ़ गई थी कि लिनुक्स में आख़िर ऐसा है क्या ?
लेकिन मुझे कोई भी ऐसा व्यक्ति नही मिला जो लिनुक्स इस्तेमाल करता हो और मुझे उससे मार्गदर्शन मिल जाए | लेकिन मुझे तो अपनी जिज्ञासा शांत करनी ही थी सो नेहरू प्लेस से फेडोरा लिनुक्स की एक डी वी डी खरीद लाया और बिना किसी मार्गदर्शन के अपने कंप्युटर में इंस्टाल कर नेट वगेरह तो चलाने में कामयाब हो गया लेकिन गाने, वीडियो आदि चलाने में नाकामयाब रहा और काफी माथापच्ची करने बाद लिनुक्स सिखने का कार्यक्रम बंद करना पड़ा | और अभी कुछ दिन पहले ब्लॉगजगत में टिपयाने के चक्कर में विचरण करते हुए अंकुर गुप्ता का तकनीकी ब्लॉग मिला जिसे खंगालने पर लिनुक्स से सम्बंधित कई जानकारियां मिली और मैंने अपनी प्रॉब्लम भी अंकुर गुप्ता के ब्लॉग पर लिखी सो अंकुर गुप्ता ने मुझे फेडोरा लिनुक्स की जगह उबुन्टु लिनुक्स इस्तेमाल की सलाह दी | उनके ब्लॉग से मुझे उबुन्टु लिनुक्स की वेबसाइट का लिंक मिला और यह भी पता चला की उबुन्टु वेबसाइट वाले फ्री में उबुन्टु लिनुक्स की सी डी भी भेज देते है | बस फ़िर क्या था हम निकल पड़े उबुन्टु लिनुक्स की वेबसाइट की यात्रा पर और भर दिया फ्री सी डी भेजने का अनुरोध फॉर्म |
अनुरोध के चार दिन बाद कल शनिवार को ही हमें कोरियर द्वारा फ्री की उबुन्टु लिनुक्स की सी डी मिल गई और नतीजा आपके सामने है कल ही रात को उबुन्टु लिनुक्स अपने कंप्युटर में इंस्टाल कर आज इसका इस्तेमाल कर रहा हूँ और नए ऑपरेटिंग सिस्टम का मजा ले रहा हूँ यह काम लेने में है बड़ा आसान है बस ज्यादा इस्तेमाल के लिए थोडी सी माथापच्ची और करनी होगी ताकि बाद में विण्डो की जरुरत ही ना पड़े | आपसे भी अनुरोध है कि आप भी यहाँ चटका लगा कर उबुन्टु लिनुक्स की फ्री सी डी मागवा कर लिनुक्स सिखने कि कोशिश करे,क्योकि ये फ्री है, विण्डो से ज्यादा सुरक्षित है साथ इसका प्रचलन बढ़ने से माइक्रो सॉफ्ट का वर्चस्व भी ख़त्म होगा और हमारी आने वाली पीढियाँ लिनुक्स की वजह से सस्ते कंप्युटर का इस्तेमाल कर पाएँगी |
अब तो आप समझ गए ना ब्लॉग जगत की अहमियत | आख़िर ब्लॉगजगत की थोडी सी मदद से ही मै लिनुक्स इस्तेमाल करना सीख पाया |

21 Responses to "ब्लॉग पढने के फायदे"

  1. mehek   December 28, 2008 at 2:13 pm

    waah ye bahut upayukt jankari rahi,sahi hai blog ke faide bhi hai.

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  2. ताऊ रामपुरिया   December 28, 2008 at 2:16 pm

    आपने बहुत बढिया जानकारी दी जी ! खैर हमारे तो क्या पल्ले पडॆगा पर किसी से जोगाड भिडवा लेंगे !

    रामराम !

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  3. रंजन   December 28, 2008 at 2:34 pm

    पहले तो बधाई lunix सिखाने के लिये…और धन्यवाद..

    अभी तक सोचा नहीं था.. पर जल्द ही सिखॆगें..

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  4. pintu   December 28, 2008 at 2:45 pm

    aap ne bahut badhiya jankari!
    dhanyvad!

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  5. hempandey   December 28, 2008 at 2:59 pm

    तकनीकी ही नहीं अन्य जानकारियों के लिए भी ‘ब्लॉग’ पढ़ना लाभकारी है. आज ही मैंने एक अन्य टिप्पणि में कहा है कि ‘ब्लॉग’ आज सूचना प्राप्त करने का नया स्रोत बन गया है.

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  6. MANVINDER BHIMBER   December 28, 2008 at 3:03 pm

    आपने बहुत बढिया जानकारी दी जी सूचना प्राप्त करने का नया स्रोत बन गया है.

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  7. महेंद्र मिश्रा   December 28, 2008 at 3:26 pm

    बहुत बढिया जानकारी दी है भाई मै भी देखता हूँ . धन्यवाद् अच्छी जानकारी देने के लिए .

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  8. उन्मुक्त   December 28, 2008 at 4:08 pm

    लिनेक्स के सारे वितरण, जिसमें फिडोरा भी है, न केवल मुक्त हैं पर मुफ्त भी। कोई व्यक्ति फिडोरा के लिये पैसा नहीं ले सकता है। हां डीवीडी का दाम ले सकता है।

    युबन्टू आसान वितरण है। नये लोगों के लिये अच्छा है पर फिडोरा इससे कहीं बेहतर वितरण है लेकिन कुछ ज्याद ज्ञान होना जरूरी है। सारे लिनुक्स सिस्टम में गाने वा विडियो सुनने एवं देखने के लिये वीएलसी मीडिया प्लेयर या एम प्लेयर उपयुक्त प्रोग्राम है। यह दोनो फिडोरा पर चलते हैं।

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  9. P.N. Subramanian   December 28, 2008 at 4:28 pm

    बधाई हो. लिनक्स की जय हो. आप के लेख से प्रेरित हो कर कयी लोग लिनक्स अपनाएँगे ऐसा हमारा विश्वास है. आभार.

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  10. Laxman Singh   December 28, 2008 at 5:09 pm

    बहुत अच्छी जानकारी !

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  11. अजित वडनेरकर   December 29, 2008 at 4:57 am

    बहुत बढ़िया पोस्ट । हम जैसे तकनीकी निरक्षर क्या करें ? अपने आप कुछ करना संभव नहीं। लिनक्स की तारीफ बरसों से सुनते आए हैं । प्रयोग के स्तर पर कुछ करने की हिमाकत करने की कोशिश करेंगे।

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  12. Raviratlami   December 29, 2008 at 5:31 am

    लिनक्स की दुनिया में आपका स्वागत है. हिन्दी लिनक्स भी चलाकर देखिए. इंटरनेट चालू रहते हुए एड रिमूव प्रोग्राम में हिन्दी भाषा जोड़ने के लिए चुनें और सिस्टम अपडेट करें. फिर जब दोबारा लॉगिन हों तो हिन्दी भाषा का विकल्प लॉगिन खिड़की पर चुनें, और ले हिन्दी लिनक्स का मजा.

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  13. विवेक सिंह   December 29, 2008 at 5:33 am

    ट्राई करेंगे .

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  14. नरेश सिह राठौङ   December 29, 2008 at 8:07 am

    बहुत से नये ब्लोगरो को व गैर तकनीकी लोगों को हिन्दी ब्लोग बहुत कुछ सिखा रहे है । अंकुर जी के ब्लोग को मै तब से पढ रहा हू,जब मुझे पहली बार पता चला कि गुगल बाबा हिन्दी में भी सर्च करते हैं । उसके बाद तो जैसे मेरी लाट्टरी लग आयी हो क्यों कि एक तो अंग्रेजी भाषा मे कमजोर उपर से किसी भी प्रकार की कम्पयुटर शिक्षा या डिप्लोमा नही था । एसे में हिन्दी तकनीकी ब्लोग मेरे लिये तो वरदान साबित हुये है । विशेष कर अंकुर जी,सागर नाहर जी,रवी रतलामी जी, राजीव जी नाम बहुत है कितनो का उपकार है मेरे पर, आपका नाम तो बहुत बाद मे जुडता है । आज मै आराम से एक ब्लोग चला रहा हूं । लिनिक्स के बारे में एक पोस्ट ओर लिखियेगा जिसमें इसमे और xp में जो गुण दोष हो वह विस्तार में हो धन्यवाद ।

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  15. नरेश सिह राठौङ   December 29, 2008 at 8:12 am

    ज्ञान दर्पण के हेडर का चित्र बहुत सुन्दर है । बहुत खोजबीन का परीणाम लग रहा है ।

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  16. Nirmal Sharma   December 29, 2008 at 10:51 am

    बहुत अच्छी जानकारी दी हैं आपने .आज हिन्दी ब्लॉग्गिंग भी नए -नए
    आयाम छू रही हैं .अंकुर गुप्ता और आप का ब्लॉग पढा अच्छा लगा .
    धन्यवाद्

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  17. राजीव जैन Rajeev Jain   December 29, 2008 at 11:35 am

    लाइनेक्‍स से पहले से परिचित था। छोटे भाई की कंपनी में ऊबंतू पर ही काम होता है। और मेरे लैपटॉप के साथ तो ऊबंतू की सीडी आई थी।

    लेकिन वाकई आपने बिना किसी मदद के लाइनेक्‍स पर हाथ अजमा कर बढिया किया।

    बधाई

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  18. Suresh Chiplunkar   December 29, 2008 at 11:51 am

    भाई साहब लिनक्स और एक्सपी के बीच नफ़े-नुकसान का तुलना चार्ट बना देते तो ज्यादा मजा आ जाता, सच तो यही है कि अभी भी लिनक्स किस चिड़िया का नाम है अधिकतर आम लोग नहीं जानते, यहाँ तक कि फ़ायरफ़ॉक्स भी कई लोग नहीं जानते, आम आदमी के लिये कम्प्यूटर का मतलब होता है पेण्टियम, माइक्रोसॉफ़्ट, इंटरनेट एक्स्प्लोरर और आउटलुक, इसके बाहर की दुनिया अजीबोगरीब लगती है फ़िलहाल्…

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  19. Ratan Singh Shekhawat   December 29, 2008 at 12:43 pm

    उन्मुक्त जी आपने बढ़िया जानकारी दी है अगली बार जब फेडोरा ट्राई करूँगा तब आप द्वारा दी गई जानकारी मुझे काम आएगी !

    रवि जी पहले फेडोरा में हिन्दी भाषा काम लेकर देखी थी आब उबुन्टू पर भी ट्राई करूँगा |

    नरेश जी आपने जो तकनिकी ब्लॉग लेखकों के नाम सुझाये है वे वाकई तकनिकी लोग है मैंने तो कंप्युटर चलाना भी दो साल पहले ही सिखा है पिछले १५ महीने से नेट इस्तेमाल कर रहा हूँ उसके पहले मुझे वेबसाइट खोलना भी नही आता था | ऑफिस में भी मै कंप्युटर का इस्तेमाल नही करता बस दो चार घंटे घर पर ही कंप्युटर पर बैठ पाता हूँ | कुछ प्रयोगधर्मी होने और नया सिखने की जिज्ञाषा के चलते जो कुछ सीख पाता हूँ ब्लॉग पर लिख देता हूँ |

    सुरेश जी Linux पर थोड़ा हाथ और आजमा लूँ फ़िर XP व linux के बारे में तुलनात्मक लेख अवश्य लिखूंगा |

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  20. आशीष कुमार 'अंशु'   December 29, 2008 at 12:48 pm

    बढिया जानकारी दी

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  21. Ramesh Kumar   January 17, 2013 at 2:43 am

    sir me shabdo me bayaa nahi kar sakta kamaal kar diya aapne

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