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Saturday, May 28, 2022

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बेटियां

बदनाम ज़माने की शराफत है बेटियां ………
सोचो तो हर सवाल का जवाब है बेटियां ……….

गरम आंच पर जैसे सिकती है रोटियां……….
उस तरह इस दुनिया में रहती है बेटियां ……..

बेटा घर का चिराग है तो ज्योति है बेटियां ……
पिता की आँखों का पानी है बेटियां ……
माँ के कलेजे का टुकड़ा है बेटियां ……

घर भर की आँखों का तारा है बेटा तो ……
उस तारे की रक्षक, पुतली है बेटियां ……..

किसी का होश तो किसी की बेहोशी है बेटियां ……
मायके और ससुराल में जगमगाने वाला दीपक है बेटियां ……..
इतना कुछ होने पर भी पिता के माथे का कर्ज़ है बेटियां ……..

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23 COMMENTS

  1. बहुत ही नायब रचना ,वाकई बेटियां बेटियां ही होती है |

    मायके और ससुराल में जगमगाने वाला दीपक है बेटियां ……..
    @ 100% सच है

    इतना कुछ होने पर भी पिता के माथे का कर्ज़ है बेटियां …
    @ इस विडम्बना के जिम्मेदार हमारे सामाजिक नियम है

  2. Wah Bahut khoob,kaash samaj ke har log iss baat ko samaj jaaye toh betiyon pe ho rahe aatyachar khatam ho jayenge,jahan aaj betiyan Company ki CEO ban rahi hai wahin kahin aur unhe paida hone se pehle hi mar diya jaata hai.Beti maa lakshmi ka roop hai uski izzat aur hifazad humare haath mein hain.Bahut accha laga apki kavita padkar.Thnx

  3. इस तरह की सीधे शब्दों में कही गयी गहरी भाव पूर्ण बात बहुत ही उद्देश्यपूर्ण है | बेटियों का महत्त्व ना पहले कम था और ना ही भविष्य में कम होगा | बेटा तो एक घर की इज्जत होता है लेकिन बेटी दो घरों का मान होती है |

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