बेटियां

बेटियां

बदनाम ज़माने की शराफत है बेटियां ………
सोचो तो हर सवाल का जवाब है बेटियां ……….

गरम आंच पर जैसे सिकती है रोटियां……….
उस तरह इस दुनिया में रहती है बेटियां ……..

बेटा घर का चिराग है तो ज्योति है बेटियां ……
पिता की आँखों का पानी है बेटियां ……
माँ के कलेजे का टुकड़ा है बेटियां ……

घर भर की आँखों का तारा है बेटा तो ……
उस तारे की रक्षक, पुतली है बेटियां ……..

किसी का होश तो किसी की बेहोशी है बेटियां ……
मायके और ससुराल में जगमगाने वाला दीपक है बेटियां ……..
इतना कुछ होने पर भी पिता के माथे का कर्ज़ है बेटियां ……..

23 Responses to "बेटियां"

  1. Mahavir   July 23, 2010 at 7:00 pm

    very nice panktiya usha ji…

    Reply
  2. Mahavir   July 23, 2010 at 7:05 pm

    मायके और ससुराल में जगमगाने वाला दीपक है बेटिया

    Reply
  3. Udan Tashtari   July 24, 2010 at 12:01 am

    बहुत अच्छा लगा पढ़्कर..वाकई बेटियां बेटियां ही होती हैं..

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  4. Ratan Singh Shekhawat   July 24, 2010 at 1:18 am

    बहुत ही नायब रचना ,वाकई बेटियां बेटियां ही होती है |

    मायके और ससुराल में जगमगाने वाला दीपक है बेटियां ……..
    @ 100% सच है

    इतना कुछ होने पर भी पिता के माथे का कर्ज़ है बेटियां …
    @ इस विडम्बना के जिम्मेदार हमारे सामाजिक नियम है

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  5. क्षत्रिय   July 24, 2010 at 2:33 am

    बहुत उम्दा

    Reply
  6. Ravi   July 24, 2010 at 3:04 am

    ati sunder rachna

    Reply
  7. Rambabu Singh   July 24, 2010 at 4:11 am

    sundar umda rachna

    Reply
  8. बेटियों के प्रति आपके भाव आदर के योग्य हैं।
    ——–
    ये साहस के पुतले ब्लॉगर।
    व्यायाम द्वारा बढ़ाएँ शारीरिक क्षमता।

    Reply
  9. Tany   July 24, 2010 at 6:29 am

    Wah Bahut khoob,kaash samaj ke har log iss baat ko samaj jaaye toh betiyon pe ho rahe aatyachar khatam ho jayenge,jahan aaj betiyan Company ki CEO ban rahi hai wahin kahin aur unhe paida hone se pehle hi mar diya jaata hai.Beti maa lakshmi ka roop hai uski izzat aur hifazad humare haath mein hain.Bahut accha laga apki kavita padkar.Thnx

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  10. Saaya   July 24, 2010 at 6:33 am

    betiyo ke bare mai bahut sundar vichar likhe hai aapne.

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  11. Rajul shekhawat   July 24, 2010 at 6:39 am

    bahut hi badiya kavita he … bahut achha laga padh kar…. 🙂

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  12. राज भाटिय़ा   July 24, 2010 at 7:00 am

    बहुत अच्छा लगा. धन्यवाद

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  13. Pagdandi   July 24, 2010 at 7:19 am

    aap sab ka bhut bhut aabhar ………aap logo n jo pyar diya uske liye tahe dil se aabhar ….

    Reply
  14. Tushi   July 24, 2010 at 7:47 am

    Well written. It is truth.
    A son is a son till he gets a wife but a daughter is a daughter through out her life.

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  15. nilesh mathur   July 24, 2010 at 10:35 am

    बेहतरीन !

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  16. प्रवीण पाण्डेय   July 24, 2010 at 11:21 am

    बड़ी सुन्दर और स्पष्ट संदेश देती कविता ऊषा जी की।

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  17. नरेश सिह राठौड़   July 24, 2010 at 11:47 am

    इस तरह की सीधे शब्दों में कही गयी गहरी भाव पूर्ण बात बहुत ही उद्देश्यपूर्ण है | बेटियों का महत्त्व ना पहले कम था और ना ही भविष्य में कम होगा | बेटा तो एक घर की इज्जत होता है लेकिन बेटी दो घरों का मान होती है |

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  18. RAJNISH PARIHAR   July 24, 2010 at 2:11 pm

    वाकई बेटियां बेटियां ही होती है |

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  19. बहुत सुन्दर ….सच बेटियां ऐसी ही होती हैं…बहुत पसंद आई आपकी यह रचना

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  20. RaJput BaNna   July 24, 2010 at 5:04 pm

    jai hoooooooooo hukam jai hoooooooo

    !! BaNna !!

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  21. Akhtar Khan Akela   July 24, 2010 at 5:18 pm

    betiyon pr is lekn ne sbhi ki ankhen khol di he aapne hr jzbaat ko is trh se ukeraa he ke dilon ko jhkjhor diyaa he bdhaayi ho . akhtar khan akela kota rajsthan

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  22. shripal shaktawat   March 8, 2011 at 7:20 pm

    YAHI YATHARTH HAI BETIYON KA.
    इतना कुछ होने पर भी पिता के माथे का कर्ज़ है बेटियां

    -SHRIPAL SHAKTAWAT

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  23. surendar singh bhati tejmalta   January 19, 2013 at 2:57 pm

    bahut umada hukum

    Reply

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