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Friday, October 7, 2022

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बुंदेलखंड के इन महलों की छटा भी कम नहीं राजस्थान के महलों से

राजस्थान में स्वप्नलोक सरीखे एक से बढ़कर महल और किसी तिलिस्म के समान किलों की लम्बी श्रंखला है| पर इस मामले में बुंदेलखंड भी पीछे नहीं है| यहाँ के किलों, महलों, मंदिरों आदि की स्थापत्यकला भी दर्शनीय है| यदि हम बुंदेलखंड के ओरछा की ही  बात करें तो वहां के ऐतिहासिक स्थलों की शिल्पकला अद्भुत है, जिसे देखकर पर्यटक विस्मित हो जाते है|

झाँसी से 19 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व 38 किलोमीटर के घेरे में बसा ओरछा, परकोटों, तोरणों, महलों, किलों, मंदिरों, छतरियों, बगीचों व खंडहरों से घिरा है| यहाँ घरों से अधिक ऐतिहासिक इमारतें है| ओरछा की प्राकृतिक छटा को देखते हुए राजा रूद्रप्रताप ने गढ़कुंडार से अपनी राजधानी यहाँ बदली और 1531 में किले की नींव पड़ी और ओरछा उत्तरोत्तर प्रगति करता गया| वीरसिंह जू देव (1605-27) का शासन काल ओरछा का स्वर्णिम काल रहा| वीरसिंह ने दतिया, झाँसी और ओरछा में कई महलों का निर्माण करवाया|

ओरछा में तीन किले राजमहल, शीश महल और जहाँगीर महल है| पांच खण्डों का जहाँगीरी महल वीरसिंह देव व जहाँगीर की मैत्री का प्रतीक है| मुग़ल व स्थानीय शैलियों के समन्वय से बना यह महल स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है| शीशमहल में भूमिगत तलघरों सहित बड़े शयन कक्ष और चतुर्दिक गलियारे बने है|

महलों के साथ ही ओरछा के मंदिर भी स्थापत्य के उत्कृष्ट नमूने है| यहाँ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान राजा राम का मंदिर है| चंदेरी के कुशक महल जैसा दिखने वाला यह मंदिर पिछले 400 वर्षों से तीर्थ स्थल बन गया है| 1588 में श्री राजा राम को इस किले में प्रतिष्ठित किया गया था| निकट ही चतुर्भुज भगवान का विशाल मंदिर बुंदेलखंड की स्थापत्यकला का सजीव उदाहरण है| इसके गगनचुम्बी शिखर दूर से ही आगुन्तकों को आकर्षित करते है| इस मंदिर का निर्माण 1558 -1573 के मध्य मधुकर शाह ने करवाया था| ओरछा नरेश वीरसिंह जू देव (प्रथम) ने 1605-18 के मध्य इसका पुर्ननिर्माण करवाया था और 1606 में इस पर सवा मन सोने का कलश पन्ना नरेश अमरेश ने चढ़ाया था| रामराजा मंदिर के पीछे लक्ष्मीनारायण मंदिर है| इसमें 1857 के झाँसी के विप्लव, दतिया किला और कुंडार किले के चित्र लगे है| यहाँ के मंदिरों की खास बात है कि मंदिरों में भी दुर्ग निर्माण शैली को अपनाया गया है| इनके अलावा फूलबाग, हरदौल महल, जानकी मंदिर और छतरियां भी देखने लायक है|

आपको बता दें वीरसिंह जू देव ने अकबर के वजीर अबुल फज़ल पर विजय पाई थी और उसी उपलक्ष में झाँसी से 30 किलोमीटर दूर दतिया की स्थापना की| बाद में दतिया अपने पुत्र को सौंपकर उसे ओरछा से पृथक राज्य बनाया| ज्ञात हो इस लेख में हमने सिर्फ ओरछा के महलों, मंदिरों की ही संक्षिप्त जानकारी दी है, जबकि बुंदेलखंड में अजयगढ़ दुर्ग, गढ़कुंडार, तालबेहट, दतिया, झाँसी आदि में कई ऐतिहासिक इमारतें है जो स्थापत्यकला की दृष्टि से राजपूताने के महलों के टक्कर के है| इन्हें देखकर आपके मुंह से अनायास ही निकल जायेगा-  बुंदेलखंड के इन महलों की सौन्दर्य छटा राजस्थान के महलों से कम नहीं !

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