उतर प्रदेश के खेतो में बाजरे की लहलहाती फसल

उतर प्रदेश के खेतो में बाजरे की लहलहाती फसल

कम वर्षा ,रेतीली अनुपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार देने की वजह से बाजरा राजस्थान में होने वाली फसलों में मुख्य फसल है | राजस्थान के हर घर में बाजरा बड़े शौक से खाया जाता है खास कर सर्दियों में तो बाजरा हर एक की खाने में पहली पसंद होता है | बाजरे की रोटी को मारवाड़ जोधपुर में तो सोगरे के नाम से जाना जाता है | सस्ता होने की वजह से बाजरा गरीबों मजदूरों का मुख्य खाद्य अनाज है | राजस्थान में हर कार्य स्थल पर बाजरे की रोटी प्याज की घंटी के साथ खाते श्रमिक अक्सर दिखाई दे जाते है | गवार की फलियों की सब्जी , मुली की पत्तियों सहित सब्जी , सरसों का साग या मांसाहारी लोगों के लिए तरीदार मांस के साथ यदि खाने में सोगरे ( बाजरे की रोटियां ) हो तो खाने का स्वाद ही निराला हो जाता है | यही नहीं सुबह के नाश्ते में ठंडी बाजरे की रोटी दही में चूर कर खाने का तो लुफ्त ही अलग है |
पोष्टिक और स्वास्थ्य वर्धक होने के बावजूद सस्ता होने की वजह से किसानो के लिए बाजरे की फसल मुनाफादायक नहीं होती इसीलिए सिंचित भूमि वाले किसान बाजरे की बजाय अन्य फसलों की खेती को तरजीह देते है | जोधपुर पर आक्रमण के समय रास्ते में ही जोधपुर के सेनापति राव जैता और कुम्पा द्वारा दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी की आधी फौज को मौत के घाट उतार देने पर विचलित हो वापस लौटते हुए शेरशाह सूरी ने भी बाजरे का नाम ले अपनी हार पर टिप्पणी की – ” एक मुट्ठी बाजरे की खातिर मै दिल्ली की सल्तनत खो बैठता |

बोल्यो सूरी बैन यूँ , गिरी घाट घमसान
मुठी खातर बाजरी,खो देतो हिंदवान

कल इसी बाजरे की लहलहाती फसल जब मैंने उत्तर प्रदेश के खेतो में देखि तो मुझे लगा मै राजस्थान के खेतो में तो नहीं पहुँच गया |ग्रेटर नॉएडा की गगन चुम्बी इमारतों ,सुन्दर उद्यानों और शानदार ताज एक्सप्रेस वे से परी-चोक के आगे कासना होते हुए जैसे ही मै सिरसा गांव से खेतो से होकर गुजरने वाली १० की.मी.लम्बी सिकंदराबाद जाने वाली सड़क पर पहुंचा | धान,ज्वार व बाजरे की लहलहाती फसल के खेत देख मन प्रफुल्लित हो गया | उत्तर प्रदेश के खेतो में बाजरे की फसल देख मुझे आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी हुई | खेतो और गांवों के बीच गुजरते हुए तालाबो व नहर में नहाती भेंसों के द्रश्य , बिटोडो (गोबर के कंडो का ढेर ) पर व छप्परों पर उगी लोकी ,तोरई आदि की बेलें देख अपने ग्राम्य जीवन का बचपन याद आ गया | हम भी बचपन में ऐसे ही कच्चे छप्परों व बिटोडो पर वर्षा ऋतू में लोकी ,तोरई ,पेठे आदि की बेलें लगाने के साथ ही घर के पिछवाडे में मक्का ,ज्वार आदि के पौधे उगाते थे | हमारे गांव में मक्का व ज्वार की खेती करने का चलन नहीं था अतः जब अपनी उगाई मक्की के भुट्टे खाने के बाद जो आनन्द और संतुष्टि मिलती थी उसका वर्णन तो शब्दों में करना मुश्किल है |;

अब बाजरे की इतनी सारी महिमा पढ़ली है तो जोधपुर के लोक गायक कालू राम प्रजापत द्वारा बाजरे की महिमा में गाया यह गीत भी सुन लीजिए | बाजरिया थारो खिचडो लागै घणो स्वाद

बाजरिया थारो खिचडो लागै घणो स्वाद

बाजरे पर ताऊ का एक किस्सा
जब बाजरे के खिचडे की बात चलती ताऊ अपने भतीजो से अक्सर कहा करते थे –
ताऊ – कहीं हम मेहमान बनकर गए हो और वहां खाने में थाली में बाजरे का खिचड़ा परोसा हो जिसमे खूब घी डाला गया हो |
भतीजा – तो ताऊ वहां अपना क्या हो ?
ताऊ – अरे भतीजे ! अपनी तो सिर्फ उस खिचडे की थाली में अंगुलिया ही हो |

13 Responses to "उतर प्रदेश के खेतो में बाजरे की लहलहाती फसल"

  1. बाजरा ही है जो सूखे में किसान का साथ देता है। बाजरे का खीचड़ा! वाह क्या स्वाद है?

    Reply
  2. बचपन की जोधपुर की याद है – बख्तावरमल जी के बाग में घर के पीछे गाडुलिये या कोई और बनजारों की औरतें बाजरे की मोटी रोटी सेंक रही होती थीं और मन मेरा ललचाता था! 🙂

    Reply
  3. Arvind Mishra   October 11, 2009 at 3:33 pm

    बाजरे ने कंगाली में आटा गीला होने से बचा लिया किसानों को इस अवर्षण में शेखावत जी !
    खूब लखा और लिखा आपने !

    Reply
  4. रतनजी सही कहा आपने …..बाजरा की रोटी और पालक के शाग के साथ खाने का कुछ और ही मज़ा है |

    Reply
  5. Pankaj Mishra   October 11, 2009 at 4:22 pm

    सही कहा आपने …..बाजरा की रोटी और पालक के शाग के साथ खाने का कुछ और ही मज़ा है

    Reply
  6. HEY PRABHU YEH TERA PATH   October 11, 2009 at 4:43 pm

    nice post sirji

    Reply
  7. ललित शर्मा   October 11, 2009 at 5:09 pm

    वाह रतन सिंग जी बाजरा की तो बात ही कुछ और सै, खैर म्हारो तो जलम ही धान का इलाका में हुयो सै, पण बाजरा की खेती देख्योड़ी है। चालो आज थे पुरखां का देश की याद दि्वा दी, थाने बधाई।

    Reply
  8. AlbelaKhatri.com   October 12, 2009 at 3:31 am

    वाह ठाकरां वाह !

    बाजरै रो खीचडो तो कमाल रो होवे इ है माँ कदे कदे बनावै है पण बाजरै रो सोगरो घपाघप घी अ'र गुड़ मै चूर'र

    खावन रो आनन्द ही आहा …………………..

    प्रजापत जी रो गाणों घणा दिना बाद सुण्यो………..

    आपनै हार्दिक धन्यवाद…………….

    Reply
  9. शरद कोकास   October 12, 2009 at 3:27 pm

    हर साल ठंड मे हम बाजरे की रोटी जरूर खाते है ।

    Reply
  10. कुन्नू सिंह   October 13, 2009 at 6:44 pm

    मेरा गांव याद आ गया 🙂
    मेरा गांव भी तो उत्तर प्रदेश मे ही है…. ही…ही..

    Reply
  11. Laxman   October 19, 2009 at 11:10 am

    बाजरे की रोटी हो और साथ में लाल मिर्च की सिलबट्टे पर घिसी हुई चटनी और ऊपर लुणियों घी हो तो मजा ही मजा है |

    Reply
  12. नरेश सिह राठौङ   November 2, 2009 at 9:19 am

    मेरे लिए यह एक नयी बात है की यु पी में भी बाजरा होता है , बहुत दिन बाद आज थोडी देर के लिए सायबर कैफे की मदद से नेट पर आया हूँ .

    Reply
  13. RAJNISH PARIHAR   November 14, 2010 at 3:51 pm

    bajro go geet sunage to the mharo dil hi jeet liyo….

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.