बस अनन्त अनमोल है माँ


ममता बरसाती बारिश सी है माँ
सागर मे उफनती लहरों सी है माँ
पानी की बूंद को तरसते बच्चो के लिए दुध की धार सी है माँ
अपनी ममता की रक्षा के लिए तलवार सी है माँ
ना इसकी ममता की सीमा है ना इसके प्यार की हद है
मई जून की गर्मी में जाड़े की धुप सी है माँ
कभी उफनते दुध सी है माँ
बस अनन्त अनमोल है माँ
हम सब के लिए रब का वरदान है माँ
हम तेरे कर्जदार कद्रदान है माँ
अंधेरो जलती शंमा सी है माँ
रोग मे दवा सी मुसीबत मे दुआ सी हैं माँ
केशर क्यारी……… उषा राठौड़

27 Responses to "बस अनन्त अनमोल है माँ"

  1. Uncle   November 4, 2010 at 1:54 am

    हमेशा की तरह शानदार रचना

    Reply
  2. संजय भास्कर   November 4, 2010 at 1:57 am

    बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक…
    आज पहली बार आना हुआ पर आना सफल हुआ बेहद प्रभावशाली प्रस्तुति
    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    Reply
  3. संजय भास्कर   November 4, 2010 at 1:59 am

    Maa Par jitna likha jaye kam hai

    Reply
  4. संजय भास्कर   November 4, 2010 at 2:00 am

    बेहद सुंदर और संवेदनशील अभिव्यक्ति
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

    Reply
  5. Ratan Singh Shekhawat   November 4, 2010 at 2:00 am

    सही कहा आपने माँ तो माँ ही होती है |

    Reply
  6. chitrkar   November 4, 2010 at 2:27 am

    बढ़िया अभिव्यक्ति |

    Reply
  7. ललित शर्मा   November 4, 2010 at 2:27 am

    माँ का कोई सानी नही जग में
    माँ समान दानी नहीं जग में।

    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

    Reply
  8. क्षत्रिय   November 4, 2010 at 2:30 am

    सही कहा आपने माँ तो माँ ही होती है |
    शुभकामनाएं

    Reply
  9. प्रवीण पाण्डेय   November 4, 2010 at 2:31 am

    माँ का स्वरूप तो अवर्णनीय है।

    Reply
  10. माँ को नमन!

    प्रेम से करना "गजानन-लक्ष्मी" आराधना।
    आज होनी चाहिए "माँ शारदे" की साधना।।

    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

    Reply
  11. Udan Tashtari   November 4, 2010 at 2:37 am

    माँ को सादर नमन!!

    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

    Reply
  12. डॉ॰ मोनिका शर्मा   November 4, 2010 at 2:54 am

    Bahut sunder Ushaji….
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

    Reply
  13. निर्मला कपिला   November 4, 2010 at 3:59 am

    हम सब के लिए रब का वरदान है माँ
    हम तेरे कर्जदार कद्रदान है माँ

    बहुत सुन्दर रचना है बधाई। आपको व परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

    Reply
  14. बहुत अच्छी भावनायें हैं मां के प्रति.

    Reply
  15. अल्पना वर्मा   November 4, 2010 at 5:14 am

    बहुत ही अच्छी कविता लिखी है उषा जी .
    ——-
    आप सभी को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ

    Reply
  16. अन्तर सोहिल   November 4, 2010 at 5:21 am

    सचमुच अनन्त अनमोल है माँ
    बहुत अच्छी लगी यह रचना

    प्रणाम स्वीकार करें

    Reply
  17. nilesh mathur   November 4, 2010 at 8:44 am

    बहुत सुन्दर! बेहतरीन!
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना!

    Reply
  18. फ़िरदौस ख़ान   November 4, 2010 at 9:28 am

    सुन्दर अभिव्यक्ति…
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं…

    Reply
  19. Akhtar Khan Akela   November 4, 2010 at 11:00 am

    aapki is rchnaa men maan he isliyen yeh bhi bs anmol he adhdhi prstuti he mubark ho dipavli bhi mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

    Reply
  20. सलीम ख़ान   November 4, 2010 at 1:11 pm

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

    Reply
  21. ZEAL   November 4, 2010 at 2:21 pm

    .

    सुन्दर अभिव्यक्ति…

    .

    Reply
  22. नरेश सिह राठौड़   November 4, 2010 at 2:32 pm

    मा की महानता बखान करती सुन्दर पोस्ट | ज्ञान दर्पण परिवार को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाये |

    Reply
  23. ताऊ रामपुरिया   November 4, 2010 at 3:05 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, आपको परिवार एवं इष्ट स्नेहीजनों सहित दीपावली की घणी रामराम.

    रामर

    Reply
  24. राज भाटिय़ा   November 4, 2010 at 4:05 pm

    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

    Reply
  25. अशोक बजाज   November 4, 2010 at 5:33 pm

    दीप-पर्व की आपको ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं ! आपका
    अशोक बजाज रायपुर

    Reply
  26. जी.के. अवधिया   November 5, 2010 at 4:59 am

    दीपावली के इस शुभ बेला में माता महालक्ष्मी आप पर कृपा करें और आपके सुख-समृद्धि-धन-धान्य-मान-सम्मान में वृद्धि प्रदान करें!

    Reply
  27. Tany   November 13, 2010 at 8:25 am

    बहुत खूब उषाजी माँ से बढकर कुछ भी नही स्वयं भगवान को भी माँ की जरुरत होती है ! माँ होती ही ऐसी है जिसके लिए जितना लिखे उतना कम है एक बड़ा प्यारा गाना है दुस्वेदानिया फिल्म का कैलाश खेरजी ने गाया है उसकी पंक्तिया शेयर करना चाहता हूँ.धन्यवाद
    Maa,Meri Maa,Pyaari Maa…Mamaa Hoo Maa,Meri Maa,Pyaari Maa…Mamaa,
    Haatho Ki Lakerien Badal Jayengi,Gum Ki Yeh Zanjeerein Peeghal Jayengi,
    Ho Khuda Pe Bhi Aasar,Tu Duaon Ka Hai Ghar Meri,
    Maa,Meri Maa,Pyaari Maa,Mammaa Hoo Maa,
    Meri Maa,Pyaari Maa..Mammaa,Begdi Kismat Bhi Sawar Jaayegi,
    Zindagi Tarane Khushi Ke Gayegi Tere Hote Kiska Dar,
    Tu Duawon Ka Hai Ghar,Meri
    Maa,Meri Maa,Pyaari Maa… Mammaa Hoo Maa,
    Meri Maa,Pyaari Maa… Mammaa,Yun Toh Mein.. Sab Se Nyara Hoon,Tera Maaa Mein Dulara Hoon,Duniya Mein Jeene Se Jyada Uljhan Hai Maaa Tu Hai Amar Ka Jahan,
    Tu Gussa Karti Hai,Bada Accha Lagta Hai,Tu Kaan Pakadti Hai,Badi Zor Se Lagta Hai,
    Meri Maa… Meri Maa,Meri Maa,Pyaari Maa… Mammaa Hoo Maa,
    Meri Maa,Pyaari Maa Mammaa,Haatho Ki Lakerien Badal Jayengi,
    Gum Ki Yeh Zanjeerein Peeghal Jayengi,Ho Khuda Pe Bhi Aasar,
    Tu Duawon Ka Hai Ghar Meri Maa,Meri Maa,Pyaari Maa.Mammaa Hoo Maa,
    Meri Maa, Pyaari Maa… Mammaa.

    Reply

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