बलात्कार के बाद का बलात्कार

बलात्कार के बाद का बलात्कार


मेरी एक नन्ही सी नादानी की इतनी बड़ी सजा ?

डग भरना सिख रही थी,

भटक कर रख दिया था वो कदम

बचपन के आँगन से बाहर …

जवानी तक तो मै पहुंची भी नहीं थी कि

तुमने झपट्टा मार लिया उस भूखे गिद्ध की मानिंद

नोच लिए मेरे होंसलों के पंख

मेरे सीने का तो मांस भी भरा नहीं था कि

तुमको मांसाहारी समझ के छोड़ दूं

टुकड़ों मे काट दिया है तुमने मेरी जिंदगी को

अब ना समेट पाऊँगी

अपनी नन्ही हथेलियों से

मेरे मुंह पर रख के हाथ जितना जोर से दबाया था

काश एक हाथ मेरे गले पे होता तुम्हारा

तो ये अनगिनित निगाहे यूं ना करती आज मेरा

बलात्कार के बाद का बलात्कार .

केसर क्यारी ….उषा राठौड़

27 Responses to "बलात्कार के बाद का बलात्कार"

  1. Ratan Singh Shekhawat   May 31, 2011 at 12:57 am

    हमेशा की तरह शानदार रचना

    Reply
  2. कुछ कहा ही नहीं जा रहा है, लिखा ही ऐसा है, बेहद मार्मिक

    Reply
  3. Uncle   May 31, 2011 at 2:50 am

    बेहद मार्मिक अभिव्यक्ति | शानदार |

    Reply
  4. बाद में तो आत्मा की हत्या कर दी जाती है..

    Reply
  5. RAJNISH PARIHAR   May 31, 2011 at 3:59 am

    bilkul satya …..

    Reply
  6. रचना   May 31, 2011 at 6:29 am

    kyaa is kavita ko naari kavita blog par dae saktee hun
    email sae swikrtit dae

    Reply
  7. आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है …..

    चिट्ठे आपके , चर्चा हमारी

    Reply
  8. संजय भास्कर   May 31, 2011 at 6:50 am

    मार्मिक अभिव्यक्ति |

    Reply
  9. रश्मि प्रभा...   May 31, 2011 at 6:54 am

    नहीं कहना कुछ … कुछ भी नहीं

    Reply
  10. नि:शब्द करती रचना … और दृश्य जैसे आँखों में तैर गया हो

    Reply
  11. samraat   May 31, 2011 at 9:18 am

    vrtmaan bigdti sanskrti ko darshati ye kavita….kabile tarif….hkm

    Reply
  12. नरेश सिह राठौड़   May 31, 2011 at 9:25 am

    बलात्कार के बाद की त्रासदी क यथार्थ चित्रण |

    Reply
  13. वन्दना   May 31, 2011 at 9:34 am

    यही तो त्रासदी है …………कुछ कहने को बचा ही नही…………बेहद मार्मिक्।

    Reply
  14. निवेदिता   May 31, 2011 at 12:24 pm

    नि:शब्द करते भाव ……

    Reply
  15. Minakshi Pant   May 31, 2011 at 12:52 pm

    काश एसी बातें उन तक पहुँच पाती जो इसके जिम्मेदार होते हैं पर फिर सोचती हूँ जिन्हें किसी के एहसास का कोई इल्म ही न हो वो इस दर्द को कहां जान पाएंगे |
    बेहद सुन्दर रचना |

    Reply
  16. chitrkar   May 31, 2011 at 1:21 pm

    बेहद उम्दा चित्रण किया है आपने |

    Reply
  17. प्रवीण पाण्डेय   May 31, 2011 at 4:05 pm

    समाज का एक सत्य व्यक्त करती दमदार रचना।

    Reply
  18. ललित शर्मा   May 31, 2011 at 4:32 pm

    बलात्कार जैसे जघन्य अपराध समाज के लिए कलंक हैं।

    Reply
  19. राज भाटिय़ा   May 31, 2011 at 5:39 pm

    शव्द नही हे…. मार्मिक….

    Reply
  20. H.K.L. Sachdeva   June 1, 2011 at 5:49 am

    काश एक हाथ मेरे गले पे होता तुम्हारा
    तो ये अनगिनित निगाहे यूं ना करती आज मेरा
    बलात्कार के बाद का बलात्कार

    उषा, तुमने समाज के एक कटु सत्य को उजागर करने का प्रयत्न किया है|
    तुम्हारी यह चेष्टा अत्यंत प्रभावकारी है एवं इसके लिए तुम बधाई की पात्रा हो|

    इसमें कुछ ऐसा भी जोड़ा जा सकता है:-

    और यदि मैं ले लेती निर्णय
    कोर्ट कचहरी का दरवाजा खटखटाने का
    तो वहाँ शुरू होता बलात्कार का तीसरा दौर|

    Reply
  21. Kailash C Sharma   June 1, 2011 at 9:20 am

    बहुत मार्मिक प्रस्तुति….

    Reply
  22. Rakesh Sharma   June 2, 2011 at 10:32 am

    bahut hi achchi kavita hai

    Reply
  23. कमाल की कविता है। एक पीडिता का पूरा दर्द इन पंक्तियों में जिस शैली में रखा गया है,वह अद्भुत है।

    Reply
  24. Rupa   May 30, 2012 at 1:23 pm

    Very heartrending poem Usha Baisa!! Touching…..

    Reply
  25. bharat   September 1, 2012 at 6:29 pm

    ,……वर्तमान हालात पे चोट करती हुई बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति…उषा जी..

    Reply
  26. Thakur Ummed Singh Kariri   December 21, 2012 at 3:37 am

    आपकी प्रभावशाली कलम से निकली हुई अदिव्दित्य और असाधारण अभिवयक्ति !! पीड़िता के क्षत विक्षत अवचेतन की मार्मिक चित्कार …….

    Reply
  27. Thakur Ummed Singh Kariri   December 21, 2012 at 3:38 am

    आपकी प्रभावशाली कलम से निकली हुई अदिव्दित्य और असाधारण अभिवयक्ति !! पीड़िता के क्षत विक्षत अवचेतन की मार्मिक चित्कार …….

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.