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Tuesday, September 27, 2022

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बलात्कार के बाद का बलात्कार


मेरी एक नन्ही सी नादानी की इतनी बड़ी सजा ?

डग भरना सिख रही थी,

भटक कर रख दिया था वो कदम

बचपन के आँगन से बाहर …

जवानी तक तो मै पहुंची भी नहीं थी कि

तुमने झपट्टा मार लिया उस भूखे गिद्ध की मानिंद

नोच लिए मेरे होंसलों के पंख

मेरे सीने का तो मांस भी भरा नहीं था कि

तुमको मांसाहारी समझ के छोड़ दूं

टुकड़ों मे काट दिया है तुमने मेरी जिंदगी को

अब ना समेट पाऊँगी

अपनी नन्ही हथेलियों से

मेरे मुंह पर रख के हाथ जितना जोर से दबाया था

काश एक हाथ मेरे गले पे होता तुम्हारा

तो ये अनगिनित निगाहे यूं ना करती आज मेरा

बलात्कार के बाद का बलात्कार .

केसर क्यारी ….उषा राठौड़

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27 COMMENTS

  1. काश एसी बातें उन तक पहुँच पाती जो इसके जिम्मेदार होते हैं पर फिर सोचती हूँ जिन्हें किसी के एहसास का कोई इल्म ही न हो वो इस दर्द को कहां जान पाएंगे |
    बेहद सुन्दर रचना |

  2. काश एक हाथ मेरे गले पे होता तुम्हारा
    तो ये अनगिनित निगाहे यूं ना करती आज मेरा
    बलात्कार के बाद का बलात्कार

    उषा, तुमने समाज के एक कटु सत्य को उजागर करने का प्रयत्न किया है|
    तुम्हारी यह चेष्टा अत्यंत प्रभावकारी है एवं इसके लिए तुम बधाई की पात्रा हो|

    इसमें कुछ ऐसा भी जोड़ा जा सकता है:-

    और यदि मैं ले लेती निर्णय
    कोर्ट कचहरी का दरवाजा खटखटाने का
    तो वहाँ शुरू होता बलात्कार का तीसरा दौर|

  3. ,……वर्तमान हालात पे चोट करती हुई बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति…उषा जी..

  4. आपकी प्रभावशाली कलम से निकली हुई अदिव्दित्य और असाधारण अभिवयक्ति !! पीड़िता के क्षत विक्षत अवचेतन की मार्मिक चित्कार …….

  5. आपकी प्रभावशाली कलम से निकली हुई अदिव्दित्य और असाधारण अभिवयक्ति !! पीड़िता के क्षत विक्षत अवचेतन की मार्मिक चित्कार …….

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