जातिवादी के दंश ने डसा एक लाचार गरीब परिवार को : फेसबुक मुहीम बनी मददगार

राजस्थान में डीडवाना तहसील के गांव डाबड़ा का मूलसिंह अपंग है वह अपने पैरों पर चलना तो दूर खड़ा भी नहीं हो सकता| एक जगह से दूसरी जगह आने जाने के लिए उसे घसीटते हुए ही आना जाना पड़ता है| उसके परिवार की दूसरी सदस्या है उसकी वृद्ध माँ, जो आँखों से देख नहीं सकती| फिर भी दोनों एक दूसरे का सहारा बन अपना जीवन जैसे तैसे काट रहे है|

इया तरह के गरीब लाचार परिवारों के आवास, खाने पीने व अन्य तकलीफों को कम करने हेतु कई सरकारी योजनाएं बनी है मसलन ऐसे ही गरीब परिवारों के लिए आवास के लिए “इंदिरा आवास योजना” बनी है| फिर भी इस परिवार की ढाणी (गांव से बाहर आवास)में कच्चा झोपड़ा ही बना है| सरकारी “इंदिरा आवास योजना” का लाभ इस परिवार को कभी नहीं मिला| गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को सरकार से जीवन यापन करने हेतु कई सविधाएं मिलती है जिसका गांवों में गांव के सरपंच के नजदीकी कई संपन्न परिवारों को फायदा उठाकर दुरुपयोग करते देखा जा सकता है|
पर इस योजना के लाभ से भी इस गरीब व लाचार परिवार को सिर्फ इसलिए वंचित कर दिया गया कि -ये परिवार सरपंच की जाति का ना होकर राजपूत जाति का है| इस तरह इस लाचार परिवार के लिए गरीबी के साथ राजपूत जाति में जन्म लेना भी अभिशाप बन गया|

चूँकि यह परिवार अपनी लाचारी के चलते सरकारी दफ्तरों में सहायता के लिए आने जाने में भी असमर्थ है इसलिए गांव के ही एक पूर्व सैनिक ने इस लाचार परिवार की मदद के लिए काफी भागदौड़ कर कोशिश की पर उसके सामने भी वही जातिवादी समस्या आ खड़ी हुई| क्षेत्र का एल एल ए रूपाराम राम डूडी भी उसी सरपंच की खास जाति का है सो उसने भी सहायता मांगने पर टका सा जबाब दिया कि- “जिसको वोट दिए उसी से सरकारी सहायता दिलाने को कहो|”
पूर्व सैनिक ने सभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए पर कुछ विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि उस क्षेत्र में जब से यह एम् एल ए जीता है उसने सभी जगह अपनी जाति के लोगों की तैनाती करवा रखी है साथ ही राजस्थान में जब से उस खास जाति को OBC में आरक्षण दिया है तब से OBC कोटे की लगभग सभी सीटों पर इस खास संपन्न जाति के लोगों की ही नियुक्त्याँ होने के चलते राजस्थान के सरकारी दफ्तरों में इनका वर्चस्व बढ़ता जा रहा है और ये खासकर अपने दफ्तरों में राजपूत जाति के लोगों का या तो काम नहीं करते या उन्हें बहुत ज्यादा तंग करते है| इसी रणनीति के तहत इस लाचार परिवार को भी किसी तरह की सरकरी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया|

आखिर इस परिवार की स्थिति की जानकारी करणी सेना, सीकर के संयोजक उम्मेद सिंह को हुई तो वे इस परिवार से मिलने गए उनकी हालत देखकर उन्होंने इस परिवार की सहायता का दायित्व निभाने हेतु सबसे पहले फेसबुक पर “सहायता अभियान” चलाया| श्री उम्मेद सिंह ने फेसबुक पर इस लाचार परिवार की आर्थिक मदद करने की अपील की जिसका प्रभाव ये हुआ कि कई लोगों ने इस परिवार के बैंक खाते में रूपये जमा करवाए साथ ही फेसबुक मुहीम देखकर मिडिया को भी इस मामले का पता चला और स्थानीय मिडिया के साथ राजस्थान के टीवी चैनलों ने भी इस मामले को प्रमुखता से दिखाया|
श्री उम्मेद सिंह मिडिया को लेकर स्थानीय सरपंच से मिले तो उसके पास बगलें झाँकने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं बचा| उपखंड अधिकारी भी जो पहले किसी भी तरह की सहायता नहीं दिलवा रहे थे न ही कुछ सुनने को राजी थे, ने भी मिडिया के आगे इस प्रकरण की जानकारी होने से ही मना कर दिया| और अब उस परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने व जांच करवाने की बात कर रहे है|
खैर … इस परिवार को तो श्री उम्मेद सिंह के प्रयासों से आखिर मदद मिल गयी और अब सरकारी योजनाओं के तहत भी मदद मिल जायेगी पर सवाल यह है कि- ” उन जातिवादी तत्वों का क्या किया जाय? उन पर कैसे नकेल कसी जाय? ताकि आगे इस तरह बेबस व लाचार परिवारों को यह जातिवादी दंश नहीं डस सके|”
यदि इस तरह आरक्षण की आड़ में कुछ जातियों का सरकारी दफ्तरों में कब्ज़ा होता चला गया और इन्होने जातिवादी रवैया अपनाना जारी रखा तो वो दिन दूर नहीं जब राजस्थान ही क्या पूरा देश जातिवाद के संघर्ष में उलझा नजर आयेगा|

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