Home Editorials फूट डालो राज करो की नीति के आज भी है आप शिकार

फूट डालो राज करो की नीति के आज भी है आप शिकार

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मेवाड़ का इतिहास भले ही रक्तरंजित युद्धों के वर्णनों से भरा हो पर मेवाड़ में सदियों से जातीय व साम्प्रदायिक सौहार्द कायम रहा है और यही कारण है कि अकबर जैसा शक्तिशाली बादशाह महाराणा प्रताप को झुका नहीं सका| यह जातीय व साम्प्रदायिक सौहार्द ही मेवाड़ की शक्ति रही है जिसमें सदियों से फूट डालने के षड्यंत्र रचे जाते रहे और आज भी विभिन्न राजनीतिज्ञ समय समय पर ऐसे षड्यंत्र रचते रहते हैं|

आठवीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी को महज दो सीटें मिली थी| नौवीं विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ सम्पूर्ण विपक्ष एक होने के कारण राजस्थान के सभी 25 लोकसभा क्षेत्रों में विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे को जीत मिली, जिसमें भाजपा के सांसद भी विजयी हुए थे| चूँकि मेवाड़ में भाजपा कमजोर रहती थी अत: मेवाड़ के महाराणा महेंद्रसिंहजी को भाजपा में शामिल किया गया वे लोकसभा चुनाव भी जीते| एकलिंगनाथ जी पदयात्रा के साथ उदयपुर में विशाल सभा भी की गई| जिसमें कानून व्यवस्था को कोसा गया, वो बात अलग है कि आज खुद भाजपा के राज में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है| इसी बीच लालकृष्ण आडवानी ने भाजपा का जनधार बढाने के लिए रथयात्रा शुरू की|

एक तरह से कहा जाय कि भाजपा ने भी देश में फूट डालो राज करो की नीति अपनाई और सत्ता की सीढियां चढने के लिए देश को साम्प्रदायिक झगड़ों में धकेल दिया| मेवाड़ भी इस नीति से अछूता नहीं रहा| चितौड़गढ़ में पाडल पोळ के पास चौमुखा शिवलिंग मंदिर में प्रतिमा खंडित की गई ताकि साम्प्रदायिक तनाव फैले| तत्कालीन सांसद महाराणा महेंद्रसिंह जी द्वारा इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को लिखे पत्र पर नजर डालें तो मूर्ति खंडित करने के वाले तीन आरोपियों के नाम मिलते हैं| जिन्हें जानकार आभास हो जाता है कि प्रतिमा साम्प्रदायिक तनाव फ़ैलाने के उद्देश्य से खंडित की गई| ज्ञात हो उन तीन अपराधियों पर आजतक कोई कार्यवाही नहीं हुई| मतलब फूट डालो राज करो की नीति मेवाड़ में लागू की गई| जो आज भी जारी है| वर्तमान लोकसभा चुनावों पर भी नजर डाली जाय तो राजसमन्द से जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीयाकुमारी को टिकट देना इसी रणनीति का अंग है| आपको बता दें दीयाकुमारी एक विवादित चेहरा है और जयपुर से दूर मेवाड़ संभाग में उन्हें टिकट दिया जा रहा है|  दीयाकुमारी के नाम का मेवाड़ में भारी विरोध है और भाजपा की टिकट से उसे चुनाव लड़ाने के बाद राजपूत समाज में ही फूट नहीं पड़ेगी, मेवाड़ के जातीय व साम्प्रदायिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचना तय है|

मेवाड़ के जातीय व साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाये रखने के पक्षधरों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी ना अपनों की है ना दुश्मनों की| यानी भाजपा से दोस्ती व दुश्मनी दोनों भारी पड़ती है क्योंकि भाजपा किसी की भी सगी नहीं, जिस पार्टी ने भगवान राम को नहीं छोड़ा वह इंसानों को क्या छोड़ेगी|

आपको बता दें मेवाड़ में एक कार्यक्रम था जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर.नारायणन को आना था | उक्त कार्यक्रम से मेवाड़ के जातीय सौहार्द बिगड़ने की सम्भावना की खबर जब नारायणन को हुई तब उन्होंने कार्यक्रम में आने के लिए मना कर दिया और कार्यक्रम नहीं हुआ| पर भाजपा ऐसे कार्यक्रम खुद आयोजित करती है उसे समाज में फूट पड़ने व सौहार्द बिगड़ने से कोई लेना देना नहीं|

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