पत्रकारों को फिल्म दिखाना ऐसे भारी पड़ गया भंसाली को

पत्रकारों को फिल्म दिखाना ऐसे भारी पड़ गया भंसाली को

पद्मावती फिल्म विवाद पर अपने धनबल के सहारे अपने पक्ष में मुहल बनाकर विरोध पर डंडा पानी डालने के उद्देश्य से, फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली ने जो दाँव चला वह उसे भारी पड़ता दिख रहा है| आपको बता दें संजय लीला भंसाली ने फिल्म के विवाद को सुलझाने के लिए विरोध कर रहे लोगों को फिल्म दिखाए जाने के बजाय कुछ चुनिन्दा पत्रकारों को फिल्म दिखाई और जिस तरह से फिल्म देखने के बाद चुनिन्दा पत्रकार अपने टीवी चैनलों पर प्राइम शो कर फिल्म के समर्थन में उतरे आये, उससे यह आशंका बलवती हो रही कि दाल में कुछ काला है और पत्रकारों द्वारा अपने चैनलों में फिल्म पर शो आयोजित करने के बदले उन्हें भंसाली ने मोटा धन दिया है| लेकिन भंसाली का यह उल्टा पड़ता पड़ता प्रतीत हो रहा है|

भंसाली द्वारा चुनिन्दा पत्रकारों को रिलीज से पहले फिल्म दिखाना और टीवी चैनलों पर फिल्म समीक्षा आने के बाद फिल्म सेंसर बोर्ड की भृकुटियाँ भी तन गई और बोर्ड ने फिल्म में कमियां निकालकर वापस कर दी| जानकारों के मुताबिक निर्माता अपनी फिल्म रिलीज से पहले दिखा तो किसी को भी सकता है, पर देखने वाले इस तरह टीवी चैनलों पर फिल्म की चर्चा नहीं कर सकते| ऐसा कर भंसाली ने क़ानूनी मुसीबत ले भी ली, क्योंकि उसके इस कृत्य को अब देश काबिल राजपूत वकील न्यायालय में लेकर जायेंगे, जिससे भंसाली की मुसीबतें बढ़ना तय है|

यही नहीं, भंसाली के इस कृत्य के बाद जी टीवी व देश के कई राष्ट्रीय चैनल व रोहित सरदाना जैसे बड़े पत्रकार भी भंसाली के खिलाफ उतर आये है| यही नहीं कल सुदर्शन टीवी के बिंदास बोल कार्यक्रम में क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन के कुंवर बसेठ व कुंवरानी निशाकंवर द्वारा धुनाई करने के बाद फिल्म के कसीदे गढ़ने वाला कथित वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश वैदिक भी फोन पर बगले झांकता महसूस हुआ और आखिर उसने फिल्म पर राजपूत समाज द्वारा किये जा रहे आन्दोलन का स्वागत किया| कुल मिलाकर अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए भंसाली की बांटो और राज करो रणनीति उलटी पड़ती नजर आ रही है|

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