नन्हीं शिकायत

नन्हीं  शिकायत










भगवान जी माँ बाबा को कभी तो मेरा बना दो.
भैया को कभी तो डांट पिलवा दो.
माँ सारी चीजे भैया की पसंद की बनाती हैं .
एक बार तो बाबा के हाथो से मुझे भी एक प्यार का निवाला खिलवा दो.
बाबा सारा प्यार भैया पे क्यों लुटाते हैं .
भैया के हाथो में तो सिक्का देते हैं.
और पानी पीकर खाली गिलास मेरे हाथो पकड़ा देते हैं.
मेरी जीती बाजी छिनकर भैया खुद जीत जाते हैं.
एक बार तो भैया को हरा के मुझे जितवा दो .
अब तो इस घर से नाता भी ना रहेगा .
बस प्यार से विदा करवा दो .
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…………………….
शुक्रिया भगवान जी आपने मुझे जितवा दिया,
मेरे प्यारे भैया को मुझ पे प्यार आ ही गया .
आखिर बूढ़े माँ बाबा को भैया ने हमेशा के लिए मेरे घर भिजवा दिया …………..:-}

केशर क्यारी. . (उषा राठौड)

22 Responses to "नन्हीं शिकायत"

  1. Mahavir   August 18, 2010 at 7:34 pm

    wah sa baton baton me kya khub kahi sa very nice panktiyan hai usha ji

    Reply
  2. Tany   August 18, 2010 at 7:52 pm

    शुक्रिया भगवान जी आपने मुझे जितवा दिया,
    मेरे प्यारे भैया को मुझ पे प्यार आ ही गया .
    आखिर बूढ़े माँ बाबा को भैया ने हमेशा के लिए मेरे घर भिजवा दिया …………..:-}
    inn lines mein kitna dard hai,woh jeet gayi par dil se dukhi bhi hai ke usske maa baap ki aaj yeh haalat hai jis par unhe naaz tha ussi ne aaj unki yeh durdasa kar di.Woh kehte hain na Jaisi karni waisi bharni.Ussne jo chaha usse mila par dukh iss baat ka hai ki khushi ko tutte hue dilon se gujarna pada.Inn bhavnao ko ek aurat ya beti hi samjh sakti hai.Hats off dear bahut acche aur khoobsurat tarike se tumne sukh,dukh,pyar aur dard ko prastut kiya hum sabke sammne.Well Done Keep It Up Proud Of You. 🙂

    Reply
  3. ललित शर्मा-للت شرما   August 18, 2010 at 8:22 pm

    मार्मिक रचना

    आभर

    Reply
  4. Ratan Singh Shekhawat   August 19, 2010 at 12:54 am

    समाज मे पनपी लिंग भेद समस्या व बुढे माता पिता के साथ वर्तमान पीढी के व्यवहार पर आपने बहुत धारदार चोट की है,
    एक कडवे सत्य व्यंग्य के साथ मार्मिक रचना

    Reply
  5. संजय भास्कर   August 19, 2010 at 12:59 am

    व्यंग्य के साथ मार्मिक रचना

    Reply
  6. Uncle   August 19, 2010 at 1:04 am

    हमेशा की तरह नाइस 🙂

    Reply
  7. क्षत्रिय   August 19, 2010 at 1:06 am

    बेटियों के प्रति सामाजिक सोच पर प्रहार करती बढ़िया मार्मिक रचना के लिए धन्यवाद

    Reply
  8. Udan Tashtari   August 19, 2010 at 1:29 am

    बड़ी गहरी बात कह गये…..

    Reply
  9. नरेश सिह राठौड़   August 19, 2010 at 2:06 am

    आपकी रचनाओं की यही खासियत है साधारण तरीके से गहरी बात कही जाती है | इस बढ़िया रचना के लिए आभार |

    Reply
  10. Rajul shekhawat   August 19, 2010 at 2:45 am

    hamesha ki tarah is baar bhi boht achha likha he aapne …. bohat hi achhi kaveeta he aapki……. 🙂

    Reply
  11. प्रवीण पाण्डेय   August 19, 2010 at 3:46 am

    इसके अधिक सशक्त, चुभ सी जाती और भावप्रधान कणिका मैंने आज तक नहीं देखी। आपको व आपकी लेखनी को प्रणाम।

    Reply
  12. Surendra Singh Bhamboo   August 19, 2010 at 3:48 am

    बहुत ही मार्मिक रचना है दिल को छू लिया इस रचना ने तो इसके लिए उषा जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद

    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    मालीगांव
    साया
    आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
    लक्ष्य

    Reply
  13. वन्दना   August 19, 2010 at 5:03 am

    उफ़्………आखिरी लाइन पढते ही रोंगटे खडे हो गये………………एक सिहरन सी दौड गयी…………………बेहद मार्मिक और सत्य को दर्शाती संवेदनशील रचना।

    Reply
  14. रचना   August 19, 2010 at 8:26 am

    wonder ful expression

    Reply
  15. anshumala   August 19, 2010 at 9:59 am

    bahut achchi rachana sachchi or gahari bat kam shabdo me bahut kuch kah diya padh kar achcha laga

    Reply
  16. Rambabu Singh   August 19, 2010 at 12:51 pm

    ह्रदय स्पर्शी व मार्मिक
    बेहत सम्बेदनशील रचना |
    धन्यबाद

    Reply
  17. बहुत बढ़िया!

    ह्रदय स्पर्शी व मार्मिक
    बेहत सम्बेदनशील रचना |

    Reply
  18. काजल कुमार Kajal Kumar   August 19, 2010 at 4:46 pm

    कितनी बड़ी-बड़ी बातें कितने छुटपन से कही जा सकती हैं. सुंदर. बहुत सुंदर.

    Reply
  19. Ratan Singh Shekhawat   August 19, 2010 at 5:10 pm

    ईमल द्वारा मिली टिप्पणी-
    बहुत सुंदर पर मार्मिक कविता के लिए हार्दिक आभार ,धन्यवाद
    सादर,
    Dr.Bhoopendra Singh
    T.R.S.College,REWA 486001
    Madhya Pradesh INDIA

    Reply
  20. राज भाटिय़ा   August 19, 2010 at 5:47 pm

    मैने तो ऎसा आज तक नही देखा, हमारे घरो मै तो बिटिया को बेटे से ज्यादा प्यार ओर अधिकार मिलते है, लेकिन कविता सुंदर लगी धन्यवाद

    Reply
  21. राजीव तनेजा   August 20, 2010 at 6:50 am

    कम शब्दों में गहरी बात…

    Reply
  22. sawai singh   October 1, 2012 at 1:30 pm

    Great……Great………..THANKs.

    Reply

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