देश में बढ़ी राजनैतिक चेतना, आने वाले दिनों में होगा ये

देश में बढ़ी राजनैतिक चेतना, आने वाले दिनों में होगा ये

देश में राजनैतिक चेतना का बढ़ना अपने उच्चतम स्तर पर है| आज हर व्यक्ति हर बात व काम में राजनीति देखता है| देश की कोई भी कितनी ही गंभीर समस्या हो, उसे देखने का हर नागरिक का नजरिया राजनैतिक बन चुका है| अब इस देश में उन्हीं नागरिकों को समस्या नजर आती है जिनकी समर्थित पार्टी सत्ता में ना हो| अपनी पार्टी सत्ता में हो उन्हें कोई भी समस्या समस्या नहीं लगती, विपक्ष द्वारा फैलाया प्रोपेगंडा लगता है| यही नहीं कभी इस महंगाई से वे त्रस्त थे, पर खुद की सरकार बनते ही महंगाई उन्हें वरदान नजर आने लगती है, उसी में उन्हें देशहित की झलक दिखती है|

हमारे देश के नागरिक कितने राजनैतिक हो गए, इसका उदाहरण हाल ही मुझे राजपूत समाज के एक सामाजिक कार्यक्रम में देखने को मिला| एक शहर में राजपूत समाज ने अपने महान पूर्वज वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौड़ की जयंती मनाने का कार्यक्रम रखा| मैं भी कार्यक्रम के पहले दिन उस शहर में पहुँच गया, जिससे मुझे कई लोगों से इस कार्यक्रम के बारे में चर्चा करने का अवसर मिला| पहले ही दिन मुझे अहसास हो गया कि इस सामाजिक कार्यक्रम व अपने महान पूर्वज को याद करने में भी राजनीति हावी है| भाजपा समर्थक राजपूत इस कार्यक्रम से इसलिए दूरी बनाये हुए थे कि मुख्य मुख्य आयोजक कांग्रेस से जुड़ें है, जबकि कार्यक्रम में किसी भी कांग्रेसी नेता को आमंत्रित तक नहीं किया गया था|

बावजूद आयोजन से कांग्रेस से जुड़े कुछ राजपूत युवाओं के चलते भाजपा से जुड़े राजपूतों ने दूरी बनाये रखी और वे खुद भी नहीं आये और दूसरों को भी आने से रोका| इसे मैं राजपूत समाज में बढ़ी अति राजनैतिक चेतना व सक्रियता ही मानूंगा कि उन्होंने अपने ही पूर्वज की जयंती के अवसर पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में भी राजनीति देखी| कार्यक्रम में आये एक ठाकुर साहब से इस मुद्दे पर मेरी चर्चा हो रही थी, तब उन्होंने बताया कि उनके एक रिश्तेदार, एक रिश्तेदार की मौत पर शोक प्रकट करने के लिए सिर्फ इसलिए नहीं आये थे कि मरने वाला रिश्तेदार व उनके परिजन दूसरी पार्टी के है|

हर काम व बात में राजनीति देखने वालों को देखते हुए लगता है कि आने वाले समय में वैवाहिक सम्बन्ध तय करते समय भी कुंडली मिलान की तरह राजनैतिक विचारधारा का मिलान किया जायेगा| यही नहीं रिश्तेदारियां भी राजनैतिक विचारधारा के अनुरूप बनती बिगड़ती रहेगी| न्यायालयों में तलाक के मामले भी बढ़ जायेंगे और तलाक के कारणों में बताया जायेगा कि शादी के वक्त लड़की का पिता हमारी पार्टी में था, अब उसने पार्टी बदल ली तो अपनी बेटी को भी ले जाए या अपने बेटे की शादी अपनी पार्टी में ही कर ले| आपको मेरी यह आशंका भले व्यंग्य लगे पर जिस तरह समाज के लोग पार्टीपूत बन रहे है, उसे देखते हुए तो मेरी आशंका मुझे सच होती नजर आ रही है| यही नहीं आने वाले समय में हो सकता है राजपूत समाज के लोग आपस में भाजपूत, कांग्रेसपूत, अन्य पार्टीपूत के नाम से संबोधन शुरू कर दें, सोशियल मीडिया में तो इसकी शुरुआत भी हो चुकी है|

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