दीयाकुमारी को भाजपा टिकिट देने के पीछे है ये षड्यन्त्र

दीयाकुमारी को भाजपा टिकिट देने के पीछे है ये षड्यन्त्र

दीयाकुमारी को भाजपा टिकिट देने के पीछे है ये षड्यन्त्र  : आदि-काल से क्षत्रियों के राजनीतिक शत्रु उनके प्रभुत्वता  को चुनौती  देते  आये हैं| किन्तु क्षत्रिय अपने क्षात्र-धर्म के पालन से उन सभी षड्यंत्रों का मुकाबला सफलता पूर्वक करते रहे हैं| कभी कश्यप ऋषि और दिति के वंशजो जिन्हें कालांतर के दैत्य या राक्षस नाम दिया गया था, क्षत्रियों से सत्ता हथियाने के लिए भिन्न भिन्न प्रकार से आडम्बर और कुचक्रो को रचते रहे| और कुरुक्षेत्र के महाभारत में जबकि  अधिकांश ज्ञानवान क्षत्रियों ने एक साथ वीरगति प्राप्त कर ली, उसके बाद से ही हमारे इतिहास को केवल कलम के बल पर दूषित कर दिया गया| इतिहास में भरसक प्रयास किया गया कि उसमें हमारे शत्रुओं को महिमामंडित  किया जाये और क्षत्रिय गौरव को नष्ट किया जाये | किन्तु जिस प्रकार किसे  हीरे  के ऊपर लाख  धूल डालो उसकी चमक फीकी नहीं पड़ती ठीक वैसे ही, क्षत्रिय गौरव उस दूषित किये गए इतिहास से भी अपनी चमक  बिखेरता रहा |

फिर धार्मिक आडम्बरो के जरिये क्षत्रियों को प्रथम स्थान से दुसरे स्थान पर धकेलने का कुचक्र प्रारम्भ  हुआ | जिसमे आंशिक सफलता भी मिली,  किन्तु क्षत्रियों की राज्य शक्ति को कमजोर करने के लिए उनकी साधना पद्दति को भ्रष्ट करना जरुरी समझा गया इसिलिय्रे अधर्म को धर्म बनाकर पेश किया गया | सात्विक यज्ञों के स्थान पर कर्म्-कांडो और ढोंग को प्रश्रय दिया गया | इसके विरोध में क्षत्रिय राजकुमारों द्वारा धार्मिक आन्दोलन चलाये गए जिन्हें धर्मद्रोही पंडा-वाद ने धर्म-विरोधी घोषित कर दिया |  इस कारण इन क्षत्रिय राजकुमारों के अनुयायियों ने नए पंथों का जन्म दिया जो आज अनेक नामों से धर्म कहलाते हैं | ये नए धर्म चूँकि केवल एक महान व्यक्ति की विचारधारा के समर्थक रह गए और मूल क्षात्र-धर्म से दूर हो गये, इस कारण कालांतर में यह भी अपने लक्ष्य से भटक कर स्वयं ढोंग और आडम्बर से ग्रषित हो गये |

इसके बाद इन्ही धर्मो में से इस्लाम ने बाकी धर्मो को नष्ट करने हेतु तलवार का सहारा लिया | जिसका क्षत्रियों ने इसका जम कर विरोध किया और इस्लाम के समर्थकों ने राज्य सत्ता को धर्म विस्तार के लिए आसान तरीका समझ, आदिकाल से स्थापित क्षत्रिय साम्राज्यों को ढहाना शुरू कर दिया | क्षत्रियों ने शस्त्र तकनीकि को तत्कालीन वैज्ञानिक समुदाय यानि ब्राह्मणों के भरोसे  छोड़ दिया तो परिणाम हुआ क्षत्रिय तोप के आगे तलवारों से लड़ते रहे | चंगेज खान से लेकर गौरी तक तो सिर्फ भारत को लूटते रहे किन्तु बाबर ने भारत में अपना स्थायी साम्राज्य स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली |

षड्यन्त्र अभी समाप्त नहीं हुए, मुगलों से 4-5 पीढ़ियाँ लड़ने के बाद कुछ राहत मिलती कि इसी बीच व्यापारी के भेष में अंग्रेज आ गये । वो राज्यों का सौदा व्यापारिक तौर पर करने लगे | लार्ड मैकाले ने स्थायी रूप से मानसिक दासता की जंजीरें डालने के लिए आधुनिक शिक्षा का ढांचा तैयार किया ताकि हम अपने गौरवमयी सभ्यता,  संस्कृति और संस्कार के बजाए पश्चिम जगत को ही अपना आदर्श बना लें । खैर मात्र 100 वर्ष में ही अंग्रेजों की चूलें हिल गई, जब 1857 का स्वतंत्रता के लिए सशक्त विद्रोह हुआ | तब अंग्रेजियत ईसाइयत को स्थायित्व देने के लिए एक अंग्रेज अफसर ए ओ ह्यूम ने कांग्रेस पार्टी की नींव रख दी जिसने सत्य सनातन धर्म एवं क्षात्र धर्म को सदा सदा के लिए समाप्त करने के सफलतम षड्यन्त्र रचे । जैसे तैसे बिखरी हुये एवं शक्तिहीन भग्नावेषों को कर्मठ क्षत्रियों ने श्री क्षत्रिय युवक संघ बनाकर ऊर्जावान किया । लंबे संघर्ष के बाद वीपी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की जड़ो में मट्ठा डालकर उसे खोखला किया गया किन्तु वीपी की अटपटी रणनीति को कोई पकड़ नहीं पाया और उन्होंने अपयश का बिषपान कर लिया ।

श्रीराम के सहारे और भारतीय संस्कृति की रक्षा की पैरोकार बनकर जनसंघ की नवीनीकृत रूप बनकर बीजेपी सामने आई जिसे क्षत्रियों ने जनसंघ के जमाने से ही अपने खून पशीने से सींचा, किन्तु समय अनुसार उसने अपनी प्राथमिकता राष्ट्र, धर्म और संस्कृति से हटाकर दलित, मुस्लिम और महिला तुष्टिकरण में बदल ली । दलित हितैषी दिखने एवं अधिक मॉडर्न दिखने के चक्कर में उसने अपने जन्मदाता क्षत्रियों के इतिहास, संस्कृति एवं धर्म को अपमानित करने में सहायक होना ही उचित समझा । परिणाम हुआ क्षत्रिय युवाओं का क्रोधित होना । एक के बाद एक कई वार क्षत्रिय समाज पर होने लगे जिसमें सबसे गहरा घाव माँ पद्मावती के अपमान में आरएसएस और मोदी के सबसे विश्वस्त प्रसून जोशी, अम्बानी और स्मृति ईरानी की भूमिका । क्षत्रिय युवा,  क्षत्राणी एवं क्षत्रिय समाज के अनुभवी जन कुछेक को छोड़कर एक ध्वज के नीचे एकत्रित हो गए और बीजेपी को पहले लोक सभा उपचुनावों में करारे तमाचे मारे किन्तु फिर भी जब बीजेपी में सुधार नही हुआ तो #NOTA का #SOTA उठाकर अपनी सबसे बड़ी शत्रु कांग्रेस को भी जीत के बहुत नजदीक पहुंचा दिया ।

क्षत्रियो की इस एकजुटता एवं शक्तिवान होने से बीजेपी और कांग्रेस सहित समस्त राजनीतिक पार्टियां भौचक्की रह गयी कि आखिर इनकी शक्ति एवं ऊर्जा का स्रोत्र क्या है ? अच्छी तरह दिमाग खपाने के बाद आरएसएस इस बात में सफल हो गया कि क्षत्रिय समाज की ऊर्जा का एकमात्र स्रोत्र इनका चरित्र है जिसके कारण ये संख्या बल में कम होते हुए भी इस संख्या प्रभावी लोकतंत्र में अपार बहुमत की सरकारों के घुटने टिकाने में भी सफल हो जाते है । इन सभी आंदोलनों में भी क्षत्रियो का एक ही शस्त्र था चरित्र और चरित्र उसमें भी क्षत्राणियो का पूजन करने योग्य सतीत्व एवं चरित्र । आरएसएस के कान खड़े होना स्वभाविक है अतः उसने एक बहुत ही सटीक युक्ति निकाल ली कि क्षत्रिय चरित्र इतना घृणित दिखाई दे कि आमजन के मन मष्तिष्क में वर्तमान क्षत्रिय या क्षत्राणी का नाम लेते ही नफरत और हिकारत भरी छवि उभर जाए । लेकिन यह होगा कैसे ? आरएसएस के षड्यंत्रकारियों ने इसका उपाय खोज निकाला कि अब धीरे धीरे चरित्रवान क्षत्रियों को तो किनारे कर दिया जाए और एक घृणित,  कलंकित और महापापी चेहरों को चिन्हित किया जाए जो  क्षत्रियो के ऊँचे घरानों में पैदा हुए हो और यदि क्षत्रिय समाज उनके कुकर्मो से तिलमिया हो तो और भी अच्छा हो ।

ऐसे ही बहिष्कृत, घृणित और कलंकित चेहरे की खोज जयपुर में ही पूरी हो गई । दुर्योग से वो मोदी लहर में MLA भी उन्ही की पार्टी से ऐसे क्षेत्र से रह ली जहाँ क्षत्रिय मतदाता नगण्य थे । तो अब षड्यन्त्र शुरू हुआ कि किस प्रकार ऐसे कलंक को समाज में आदर्श क्षत्रिय नेता बनाकर जन मानस में प्रस्तुत किया जाए । तो ऐसी सुरक्षित सीट ढूंढी जाए जहाँ क्षत्रियों के पास और कोई विकल्प ही न हो । इसमे कांग्रेस भी साथ हो गई क्योंकि यदि कांग्रेस वहाँ से किसी लोकप्रिय सच्चरित्र क्षत्रिय को टिकिट देती है तो आरएसएस का यह षड्यन्त्र कभी सफल नहीं हो पाता । किन्तु कांग्रेस ने जानबूझकर राजसमंद जैसी क्षत्रियों के लिए सुरक्षित सीट से ऐसे व्यक्ति को टिकिट दिया जिससे क्षत्रिय नाम से चिढ़ते हो । तो आरएसएस ने आखिर अपने षड्यन्त्र के लिए राजसमंद से ऐसे घृणित,  कलंकित चेहरे को भारत की सर्वोच्च पंचायत में भेजना निश्चित कर लिया । आरएसएस जानता है कि जो राजनीति के शिखर पर होता है वो ही समाज के चाल चरित्र का प्रतिनिधित्व करता है, अतः जब घृणित, कलंकित और महापापी वो भी ऐसे कि जो आजतक के सनातन सँस्कृति में कभी उदाहरण ही न मिले कि जिसके कारण उसके पिता को राजपूत सभा के स्थायी अध्यक्ष से बेइज्जत कर बर्खास्त किया गया हो,  जिसके कारण उसकी बदतमीज माँ ने सम्पूर्ण क्षत्रिय समाज को “राजपूत समाज माय फुट” अर्थात क्षत्रिय समाज मेरी जूती तक कहा हो, जिसके कारण सर्वाधिक सभ्य एवं सुसंस्कृत क्षत्रिय समाज ने एक योद्धा महाराजा भवानी सिंह को 22 वर्ष पूर्व महाराजा पद, राजपूत जाति एवं सनातन संस्कृति से न केवल बाहर कर दिया बल्कि यह फरमान भी सुना दिया कि इसको सपरिवार अग्नि को समर्पित कर दिया जाय ।

जिस परिवार को जयपुर से दिल्ली भागना पड़ा हो और 2013 तक गुमनामी में जीना पड़ा हो ? ऐसा क्या कुकर्म कर लिया था उसने ? जी हाँ उसने अपने ही बहुत ही नजदीकी पिता के कुल के भाई के साथ कुकर्म कर लिया था । ऐसे घृणित कृत्य को न धार्मिक आधार पर विवाह कहा जा सकता है न ही हिन्दू विवाह  कानूनी तौर पर । ऐसे घृणित चेहरे को जब क्षत्रियों का प्रतिनिधित्व मिल जाएगा तब जब क्षत्रिय और क्षत्राणी चरित्र की बात होगी तब आम जनता जो अबतक क्षत्राणियों के चरित्र के आगे नतमस्तक रही वो थूकेगी कि क्षत्राणियों का क्या चरित्र वे तो अपने भाइयों से भी कुकर्म को विवाह की मान्यता दे लेती है वो देखे वो राजपूत सांसद, मंत्री रही । तब क्षत्रियों की ऊर्जा एवं शक्ति स्रोत्र वो उज्ज्वल चरित्र सदा सदा के लिए समाप्त होकर ये आरएसएस के जो पतिछोड, पत्निछोड, आदर्श बने घूम रहे है ये समाज मे सदा सदा के लिए आदर्श बन पाएंगे तब इन्हें कभी किसी क्षत्रिय से कोई चुनौति नही रहेगी । तब न कोई वीपी कांग्रेस के लिए चुनौती बन पाएगा, न कोई प्रतिभा पाटिल जैसे धार्मिक एवं संस्कारी क्षत्राणी राष्ट्रपति बन पाएगी,  न कोई भैरोसिंह शेखवात जैसा स्वाभिमानी, बेदाग उज्ज्वल चरित्र का धनी उपराष्ट्रपति बन पाएगा |  राजनाथ सिंह, योगी जी, गजेन्द्रसिंह, राज्यवर्धनसिंह जैसे लोग तो नकारा समझे जाएंगे ।

क्या सरल स्वभाव का साधारण क्षत्रिय इस षड्यन्त्र को समझ पायेगा ?

लेखक : कुँ. राजेन्द्रसिंह नरुका

संयोजक, श्री क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन

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