तड़प

तड़प


आज जाना है की तड़प क्या होती हैं ,
किसी से बिछड़ने की कसक क्या होती हैं

जितना करीब जाना था उसके
वो उतना परे खिंच जाता हैं

जब भी डूबना चाहा मैने उसमे,
वो खुद सूखता जाता हैं

कब समझेगा वो पागलपन मेरा ,
खुद ही जब बावला बना बैठा हैं

ना जाने क्या हरा दिया उसने मुझे कि,
जीत के जश्न में बैठा हैं

कोई मोह वाले ने तो कब का समा लिया होता खुद में.
पर मुझे भी इस निर्मोही का आगोश भा गया हैं |
केशर क्यारी….उषा राठौड़

12 Responses to "तड़प"

  1. Tany   January 1, 2011 at 8:01 pm

    Simply Awesome.
    कोई मोह वाले ने तो कब का समा लिया होता खुद में.
    पर मुझे भी इस निर्मोही का आगोश भा गया हैं
    Bahut khoob badi hi khoobsurati se dard bayan kiya aapne kiske haale dil.Kuch lines umeed hai aapko pasand aayengi.
    "मुझसे वो पूछती है वफाओं के मायने
    उसकी ये सादा – दिली मार न डाले मुझको !

    तुम ऐ मत समझना,
    कि तुम्हारे बगैर जी नहीं सकते,
    बस तुम पास न हो,
    तो साँस रुक जाती है….!!!
    तुम ऐ भी मत समझना ,
    कि तुमसे मोहब्बत है मुझे
    बस तुम साथ न हो तो,
    कुछ अच्छा नहीं लगता…!!!
    तुम ऐ मत समझना,
    कि तुमसे कोई रिश्ता है मेरा
    बस तुमको दुःख हो तो,
    आँखे नम हो जाती हैं….!!!
    तुम ऐ भी मत समझना ,
    कि तुम मेरी जान हो
    बस तुम दिल की धड़कन हो,
    और कुछ भी नहीं…!
    तुम कभी ये भी मत समझना
    कि कभी मै भूल गया तुम्हे,
    बस सांसे रुक गई होंगी मेरी,
    और कुछ भी नहीं…!

    Reply
  2. डॉ. मनोज मिश्र   January 2, 2011 at 1:18 am

    वाह,एक से बढ़ कर एक.

    Reply
  3. ललित शर्मा   January 2, 2011 at 2:21 am

    वाह, बहुत सुन्दर रचना।

    Reply
  4. प्रवीण पाण्डेय   January 2, 2011 at 2:46 am

    सामाजिक सरोकारों की सुन्दर अभिव्यक्ति।

    Reply
  5. Ratan Singh Shekhawat   January 2, 2011 at 3:41 am

    बढ़िया अभिव्यक्ति के साथ सुन्दर रचना

    Reply
  6. निर्मला कपिला   January 2, 2011 at 4:45 am

    सुन्दर रचना। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

    Reply
  7. padmsingh   January 2, 2011 at 5:35 am

    कोई मोह वाले ने तो कब का समा लिया होता खुद में.
    पर मुझे भी इस निर्मोही का आगोश भा गया हैं |

    …. यही तो प्यार की तासीर है… बढ़िया अभिव्यक्ति

    Reply
  8. Asha   January 2, 2011 at 9:46 am

    सुन्दर प्रस्तुति ,बधाई |
    आशा

    Reply
  9. वाणी गीत   January 2, 2011 at 12:02 pm

    ना जाने क्या हरा दिया है उसने जो जीत के जश्न में बैठा है …
    सुन्दर !

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    Reply
  10. Gupta   January 2, 2011 at 12:24 pm

    aapne apne dil ki baat ko kagaj ke panno par uatar diya wah wah kya baat hai usha ji

    Reply
  11. राज भाटिय़ा   January 2, 2011 at 5:32 pm

    बहुत सुंदर जी, धन्यवाद, क्या आप बेव साईट बना सकते हे, एग्रीगेट्र के लिये? जरुर बताये? धन्यवाद

    Reply
  12. Rajul shekhawat   January 3, 2011 at 5:27 am

    woOooww boht hi achhi poem he ……….. niceeeeeeeeee

    Reply

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