त्रासदी


आज हम सब गणतंत्र दिवस की ख़ुशी में झूम रहे है ,आज ही के दिन दस साल पहले गुजरात के भुज मे एक आपदा आई थी
आज पुरे १० साल हो गए हैं पर कुछ परिवार और कुछ लोग आज भी इस हादसे से उबर नहीं पाए हें
जब ये त्रासदी हुई थी उस वक़्त अख़बार में आई खबरों से मन विचलित हो उठा था और मेने अपनी डायरी में कुछ पंक्तिया
लिख दी थी आज आप लोगो के समक्ष वही पुरानी पंक्तिया हें …..आप सब को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

जब समूचा देश थिरक रहा था ,गणतंत्रता की ख़ुशी में .

हर गाँव शहर नाच रहा था ,इसी गणतन्त्र की ख़ुशी में.

तभी भारत माता को भी एक शौक चरमराया थिरकने का .

अपनी ख़ुशी को नाचकर जाहिर करने का

अपनी भुजा उठाई ‘भुज ‘ से, तो मच गई तबाही भूकंप से

अब इस माँ को कौन समझाए भला ,समझ लेंगे हम

गर ये मौन ख़ुशी करे जाहिर

इसके थिरकने से लगता है डर ,

इसकी थिरकन लाखो को कर देती है बेघर

7 Responses to "त्रासदी"

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