ताऊ ने पीना छोड़ा

उल्टे सीधे धंधो और राजनीती में कुछ कमाने के बाद ताऊ ने कई अन्य शौक पालने के अलावा शराब भी पीना शुरू कर दिया | अब ताऊ अपने दोस्त हरखू के साथ रोज अपने मकान की छत पर बने बगीचे में बैठ कर दारू पीने लगा |
हरखू के साथ ताऊ की बड़ी अच्छी दोस्ती थी और हरखू राजनीती में ताऊ की काफी मदद भी करता था इसी दोस्ती के चलते ताऊ कभी भी अपने दोस्त हरखू के बिना अकेले शराब नहीं पीता था | कुछ समय बाद हरखू तिकड़म लगाकर विदेश चला गया और ताऊ रह गया अकेला | वह अपने दोस्त के बिना शराब कैसे पी सकता था सो ताऊ ने हमेशा की तरह छत पर टेबल पर बोतल के साथ दो गिलास रखे और उनमे शराब डाल वैसे ही पीने लगा जैसे हरखू के साथ पीया करता था अब जब भी ताऊ शराब पीता टेबल पर हरखू के लिए भी गिलास रखता और उसमे भी शराब डाल पैग बनाता अपना पैग पीने के बाद ताऊ हरखू के लिए बना पैग भी खुद ही पी लिया करता |
आस पड़ोस के लोग अक्सर ताऊ को ऐसा करते देखा करते थे उन्हें ताऊ और हरखू की गहरी दोस्ती का पता था | और ताऊ का यह कार्यक्रम निर्बाद कई महीनो तक चलता रहा | एक दिन एक पडौसी ने देखा कि आज ताऊ छत पर टेबल लगा कर बैठा है और शराब की बोतल के साथ गिलास एक ही रखा है | पडोसी को दो की जगह एक गिलास देखकर बड़ी हैरानी हुई उसने सोचा लगता है ताऊ की हरखू के साथ दोस्ती टूट गई लगती है सो हिम्मत करके पडोसी ने ताऊ से पूछ ही लिया कि ताऊ क्या बात है ? आजकल अकेले ही पी रहे हो क्या दोस्त से फोन पर कोई मनमुटाव हो गया क्या ?
ताऊ — नहीं जी , ऐसा कुछ भी नहीं है , हरखू के साथ दोस्ती तो इस शरीर छोड़ने तक बनी रहेगी | दरअसल बात यह है कि मुझे डाकदर साहब ने दारू पीने के लिए मना कर दिया है इसलिय मैंने अब दारू पीना छोड़ दिया है अब ये जो आपको पैग दिखाई दे रहा है मेरा नहीं हरखू का है और अब दारू मै नहीं सिर्फ हरखू ही पी रहा है |

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