तन्हा

तन्हा

माफ कर दे मुझे में तेरे इश्क में शामिल न हो सका .
मै ही अदना रह गया मुझे वो हक़ हासिल न हो सका .

उतना प्यासा ना था मै तब, जितने अपने अश्क तूने पिलाये मुझे
आज दरख़्त सा खड़ा मै ,कोई पूछता नहीं मुझे

आज भी तू मेरे आस पास दोड़ती है सिरहन बन के
मेरा रोम रोम तेरे अहसानों से भरा पड़ा है

भुला नहीं हूँ मै वो सवाल ,जो जाने से पहले तेरी अश्को मै थे .
आज भी तन्हाई मे उन्ही के जवाब ढूंढता हूँ .

मेरी तमन्ना ,बन के गुजारिश तेरे दर पे खड़ी है .
तन्हा कर दे मुझे अपनी यादो से
एक बार मेरे आगोश मे आके मेरी पलकों को नम कर दे

केसर क्यारी ….उषा राठौड़

8 Responses to "तन्हा"

  1. बहुत खूब… क्या बात है..

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  2. Tany   January 5, 2011 at 6:40 pm

    वाह बहुत खूब बड़ी ही सादगी से आपने दर्द को बयां किया है अब सोचने वाली बात ये है की ये इस सूखे बेजान पेड़ का दर्द है या किसी के आस में बैठे एक दिल के दर्द की दास्ताँ बयां करता है ! हर बार की तरह सोचने पे मजबूर करदे और दिल को टटोलने वाली कविता ! Well Done Keep It Up !

    दिल में अरमाँ जगा लिया मैंने,दिन ख़ुशी से बिता लिया मैंने।
    इक समंदर को मुँह चिढ़ाना था,रेत पर घर बना लिया मैंने।
    अपने दिल को सुकून देने को,इक परिन्दा उड़ा लिया मैंने।
    आईने ढूंढ़ते फिरे मुझको,ख़ुद को तुझ में छुपा लिया मैंने।
    ओढ़कर मुस्कुराहटें लब पर,आँसुओं का मज़ा लिया मैंने।
    ऐ 'किरण' चल समेट ले दामन,जो भी पाना था पा लिया मैंने।

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  3. Ratan Singh Shekhawat   January 6, 2011 at 1:35 am

    वाह ! दिल को छूने वाली शानदार रचना !!

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  4. प्रवीण पाण्डेय   January 6, 2011 at 2:08 am

    बेहतरीन। त्यक्त, स्थिर जैसी भावनाओं को प्रेम के स्वरूप में सजाया है।

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  5. arganikbhagyoday   January 6, 2011 at 9:21 am

    darde dil ke waste paida kiya insan ko , barana ibadat ke liye fariste kam the |

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  6. Gupta   January 6, 2011 at 12:34 pm

    ek insaan hi hai jo choti si baat par bhi sory maang leta hai or apne dil ki sari tarap fir ushke samne khol kar rakh deta hai kya rachna likhi hai usha ji aapko badhaie dene ka dil karta hai par darte hai kahi aap ham se ish baat par na ruth jaao ki aap to bas comments hi karte rahoge ish liye aap se gujarish hai :-

    Dua"mile"badho"se "sath"mile"apno"se "kushiya"mile"jag"s
    "rahmat"mile "rab"s "pyar"mile"sabse"
    yahi"dua"hai"rab s"
    ki aap khush rahe"HUM SE

    GUPTA

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  7. Rahul Singh   January 9, 2011 at 4:26 am

    गहरे आत्‍मीय जज्‍बात.

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  8. piper38   April 2, 2011 at 10:30 am

    very touching and heartfelt emotions of true love (unrequitted?) expressed beautifully..I like the simplicty of your writing style

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