जो बात सब पर भारी उसे ही पद्मावती फिल्म में नहीं दिखा पाया भंसाली

जो बात सब पर भारी उसे ही पद्मावती फिल्म में नहीं दिखा पाया भंसाली

फिल्म पद्मावती पर पहले संजय लीला भंसाली ने वीडियो जारी कर सफाई दी कि- फिल्म में रानी पद्मिनी के सम्मान व राजपूत मान-मर्यादा का पूरा ख्याल रखा गया है| भंसाली के बाद कुछ कथित पत्रकारों ने फिल्म देखकर फिल्म के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की कि फिल्म शानदार है| कथित वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश वैदिक जो अपने आपको राजस्थान का निवासी बताते है, ने फिल्म में रानी पद्मावती के दिखाए सौन्दर्य की तारीफों के पुल बांधे|  वैदिक राजस्थानी मूल के है पर शायद वे राजस्थान में रहे ही नहीं, यदि राजस्थान में रहे होते तो उन्हें पता होता कि राजस्थान की राजपूत महिलाएं सदियों से कैसे कपड़े पहनती आ रही है? वैदिक को राजपूत महिलाओं की पोशाक की सही जानकारी नहीं थी, तो कम से कम वह अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला से ही पूछ लेते जो थोड़े बहुत दिन ही राजस्थान में रही हो|

आपको बता दें, राजपूत महिलाओं ने सदियों से आजतक अपनी पौशाक नहीं बदली है| देश में कितने भी परिधान फैशन आये हों, पर राजपूत महिलाओं (चाहे वे पढ़ी लिखी आधुनिकाएं हों या गांव की अनपढ़ महिला) ने अपनी पौशाक के आगे आधुनिक फैशन को कभी तवज्जो नहीं दी| यही नहीं राजपूत महिलाओं की पोशाक का शाही लुक अन्य जातियों की महिलाओं को भी बहुत भाता है| आज राजस्थान की अन्य जातियों की महिलाओं ने बाजार में उपलब्ध नई नई फैशन के परिधानों को ठोकर मारकर राजपूत पोशाक को अपना लिया है| एक तरह से कहा जाय कि सदियों से चली आ रही राजपूत महिला पोशाक आज भी आधुनिक फैशन पर भारी है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी| जिसका सबूत है- “राजस्थान के हर शहर, कस्बे, गांव में खुले राजपूती शाही परिधानों की बड़ी बड़ी दुकाने और पीठ पर गठरी लादकर कपड़ा बेचने वाले की गठरी में राजपूती महिला पोशाक के कपड़े की उपस्थिति है|”

जो परिधान आधुनिक फैशन पर भारी है, उसे ही पद्मावती फिल्म का निर्माता संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म में शामिल नहीं कर सका और दुनिया जहान का ज्ञान रखने का दिखावा करने वाले कथित पत्रकारों को इतनी भी जानकारी नहीं कि देश में एक ऐसा परिधान भी है जो सदियों से चला आ रहा है और आधुनिक फैशन भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई, उलटा यह प्राचीन राजपूती महिला परिधान आधुनिक फैशन पर भारी पड़ता है| किसी भी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विषयों पर फिल्म बनाने से पहले निर्माता उस काल के रहन-सहन, पहनावा, बोलचाल आदि पर विस्तृत शोध करवाता है| लेकिन देश दुनिया में चर्चित रानी पद्मिनी पर फिल्म बनाते समय निर्माता भंसाली ने इस विषय पर शोध तो दूर, किसी राजपूत महिला से सम्पर्क कर यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि राजपूत महिला पोशाक कैसी होती है?

यदि संजय लीला भंसाली फिल्म में राजपूत महिला पोशाक का प्रयोग करता तो फिल्म के घूमर नृत्य (जो घूमर किसी लिहाज से है ही नही) पर जो अंगुलियाँ उठ रही है, शायद वे कम उठती|

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