जोधपुर का मंडोर उद्यान

राजस्थान के जोधपुर शहर से 9 km उत्तर दिशा में स्थित है जो पुराने समय में मारवाड़ राज्य की राजधानी हुआ करती थी| राव जोधा ने मंडोर को असुरक्षित मान सुरक्षा के लिहाज से चिडिया कूट पर्वत पर मेहरानगढ़ का निर्माण कर अपने नाम से जोधपुर नगर बसा मारवाड़ की राजधानी बनाया | वर्तमान में मंडोर दुर्ग जो बोद्ध स्थापत्य शैली के आधार पर बना था के भग्नावशेष ही बाकी है इस दुर्ग में बड़े-बड़े प्रस्तरों को बिना किसी मसाले की सहायता से जोड़ा गया था खँडहर हुआ यह खजुरनुमा दुर्ग आज भी अपनी वीर गाथा बखान करता प्रतीत होता है | वर्तमान समय में मंडोर में एक सुन्दर उद्यान बना है जिसमे अजीत पोळ, उद्यान में अजीत पोळ से प्रवेश करने पर एक बड़ा बरामदा दिखाई देता है जिसमे विभिन्न देवी-देवताओं ,लोक देवताओं व मारवाड़ के वीर पुरुषों की मूर्तीयाँ एक पहाड़ी चट्टान को काट कर उत्कीर्ण की गयी है |

देवताओं की साळ के साथ ही एक सुन्दर मंदिर तथा एक पानी की बावडी बनी है और साथ ही बना है जानना महल | जानना महल में वर्तमान समय में राजस्थान के पुरातत्व विभाग ने एक सुन्दर संग्रहालय बना रखा है जिसमे पाषाण प्रतिमाएँ,शिलालेख,चित्र एवं विभिन्न प्रकार की कलात्मक सामग्री प्रदर्शित कर रखी है | जानना महल का निर्माण महाराजा अजीत सिंह (1707-1724) के शासन काल में हुआ जो स्थापत्य कला की द्रष्टि से एक बेजोड़ नमूना है | जानना महल के प्रवेश द्वार पर एक कलात्मक द्वार का निर्माण झरोखे निकाल कर किया गया है | इस भवन का निर्माण राजघराने की महिलाओं को राजस्थान में पड़ने वाली अत्यधिक गर्मी से निजात दिलाने कराया गया था इसके प्रांगण में फव्वारे भी लगाये गए | महल प्रांगण में ही एक पानी का कुंड है जिसे नाग गंगा के नाम से जाना जाता है इस कुंड में पहाडों के बीच से एक पानी की छोटी सी धारा सतत बहती रहती है | महल व बाग के बाहर एक तीन मंजिली प्रहरी ईमारत बनी है स्थापत्य कला की इस बेजोड़ ईमारत को एक थम्बा महल कहते है | इसका निर्माण भी महाराजा अजीत सिंह जी के शासन काल में ही हुआ है |

मंडोर उद्यान के मध्य भाग में दक्षिण से उत्तर की और एक ही पंक्ति में जोधपुर के महाराजाओं के देवल (स्मारक) ऊँची प्रस्तर की कुर्सियों पर बने है जिनकी स्थापत्य कला में हिन्दू स्थापत्य कला के साथ मुस्लिम स्थापत्य कला का उत्कृष्ट समन्वय देखा जा सकता है इन देवलो में महाराजा अजीत सिंह का देवल सबसे विशाल है | देवलों के पास ही एक फव्वारों से सुसज्जित नहर बनी है जो नागादडी से शुरू होकर उद्यान के मुख्य दरवाजे तक आती है नागादडी झील का निर्माण कार्य मंडोर के नागवंशियों ने कराया था जिस पर महाराजा अजीत सिंह जी व महाराजा अभय सिंह जी शासन काल में बांध का निर्माण कराया गया |

मंडोर उद्यान के नागादडी झील से आगे सूफी संत तनापीर की दरगाह है जो श्रधालुओं की आस्था का केंद्र है यहाँ दूर-दूर से यात्री दर्शनार्थ आते है | इस दरगाह के दरवाजों व खिड़कियों पर सुन्दर नक्काशी की हुई है | दरगाह पर प्रतिवर्ष उर्स के अवसर पर मेला लगता है | दरगाह के पास ही फिरोज खां की मस्जिद है |

तनापीर की दरगाह से कुछ आगे पञ्च कुंड नामक पवित्रतीर्थ स्थल है यहाँ पॉँच कुंड बने है साथ ही मंडोर के राजाओं के देवल (स्मारक) बने है जिनमे राव चुंडा,राव रणमल और राव गंगा के देवल का स्थापत्य दर्शनीय है | पास ही मारवाड़ की रानियों की 56 छतरियां बनी है यह छतरियां भी शिल्प कला का सुन्दर उदहारण है |

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