जिन्हें जनता भगवान मानती है वे शैतानी राह पर

जिन्हें जनता भगवान मानती है वे शैतानी राह पर

भारत में सदियों से चिकित्सक को जनता भगवान् के समान मानती आई है, क्योंकि जनता समझती है कि बीमारी की हालत में भगवान के बाद  उसे कोई बचा सकता है तो वह डाक्टर ही है| इसलिए आज भी देश में अन्य पेशों के तुलना में डाक्टरों का सबसे ज्यादा सम्मान है| लेकिन वर्तमान में डाक्टर जिस राह पर चल रहे है उसे शैतानी राह की संज्ञा दी जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं| जिस मरीज को कभी डाक्टर की में छवि में भगवान नजर आते थे, आज उसी मरीज को डाक्टर की छवि में शैतान की झलक नजर आने लगी है|

जो पेशा कभी सेवा के लिए मशहूर था आज पूर्ण रूप से व्यवसाय बन चुका है| अब डाक्टर मरीज को मरीज नहीं, ग्राहक समझकर व्यवहार करता है| जबकि मरीज उसे व्यवसायी नहीं डाक्टर समझकर उसकी क्लिक्निक पर जाता है| कई बार जानते हुए कि डाक्टर ने कुछ जांच अनावश्यक लिख दी या जिस दवा की जरुरत नहीं थी, वह भी ज्यादा कमाने के चक्कर में लिख दी, फिर भी मरीज डाक्टर की बात सर्वोपरि समझ, बिना प्रश्न किये मानता है|

शहरों में ही नहीं, गांवों में भी डाक्टर मरीज को ईलाज के नाम पर जमकर लूटने में लगे है| निजी अस्पतालों का अनुभव बताता है कि सुविधा के नाम पर ये लूट के सबसे बड़े अड्डे है| हाल में जयपुर में चिरायु नाम के अस्पताल में एक नवजात बच्ची के जलने की खबर ने झकझोर दिया| ख़बरों के अनुसार इस अस्पताल की एक मशीन में रखी बच्ची बिजली शार्ट सर्किट के चलते जल गई| लेकिन बेशर्मी की हद देखिये सोशियल मीडिया में अस्पताल के पक्ष में कई डाक्टरों में इसे महज दुर्घटना लिखा और उक्त अस्पताल के लापरवाह डाक्टरों की तरफदारी की| ऐसे प्रकरण डाक्टरों की संवेदनशीलता बेनाकाब करते है|

आज गरीब आदमी को ईलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की और आशा की किरण नजर आती है| सरकार भी सरकारी अस्पतालों में गरीब के ईलाज के लिए अच्छा ख़ासा बजट आंवंटित करती है, पर भ्रष्टाचार के बाद साधन बचते है, उनपर भी डाक्टरों का व्यवहार पलीता लगा देता है| रही सही कसर समय समय पर होने वाली डाक्टरों की हड़ताल पूरी कर देती है| आज डाक्टरों को सरकार मोती तनखा देती है, घर पर प्रेक्टिस करने की छूट देती है| मरीज भी सरकारी डाक्टरों के घर फीस देकर उनकी आय बढाते है, फिर भी इनकी भूख नहीं भागती|

डाक्टरों की लूट पर मुझे कुछ वर्ष पटना में बिहार डाक्टर्स एशोसिएशन के अध्यक्ष डा.सिंह की अनोपचारिक चर्चा याद आ गई| जिसमें डा. सिंह कह रहे थे कि जिस तरह ईलाज फाइव स्टार और महंगा होता जा रहा है उसे देखते हुए आने वाले समय में मरीज इलाज करान एके बजाय मरना पसंद करेगा|

यही नहीं यदि डाक्टर इसी तरह मरीजों को लूटने व समय पर ईलाज नहीं करने की शैतानी राह पर चलते रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब अख़बारों में डाक्टरों के साथ मारपीट व हत्या ख़बरें सबसे ज्यादा पढने को मिलेगी| जिसका आभास यदा कदा ईलाज में लापरवाही बरतने व फर्जी बिल बनाने के चक्कर में मरीजों के परिजनों द्वारा अस्पताल में तोड़फोड़ व डाक्टरों के साथ मारपीट की ख़बरें पढ़कर हो जाता है|

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