राजस्थान : जातिवादी तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा

राजस्थान : जातिवादी तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा

ज्ञान दर्पण पर मैंने अभी पिछले दिनों एक पोस्ट “जातिवादी के दंश ने डसा एक लाचार गरीब परिवार को : फेसबुक मुहीम बनी मददगार” में राजीनीति व प्रशासन में घुसे कुछ जातिय तत्वों द्वारा एक लाचार गरीब परिवार को जातिय आधार पर तंग करने व उसे सरकारी योजनाओं से वंचित करने की घटना का जिक्र किया था| उस मामले पर फेसबुक पर भी काफी चर्चा हुई थी कई लोगों ने जातिय तत्वों द्वारा उस लाचार गरीब परिवार के उत्पीडन की वजह उसकी गरीबी व लाचारी को माना| मान लिया वह परिवार लाचार था गरीब था, जो पूरी तरह अपनी जिंदगी से नहीं लड़ पा रहा वह जातिय तत्वों से कैसे निपटता? पर हाल ही में राजस्थान में एक पूर्व मंत्री व प्रभावशाली राजनेता को इसी तरह राजीनीति व सीबीआई में घुसे थोड़े से जातिय तत्वों के षड्यंत्र का शिकार होकर जेल जाना पड़ा |

जी हाँ मैं जिक्र कर रहा हूँ राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे श्री राजेन्द्र राठौड़ की| जो पांच मई को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए| उन्हें एक अपराधी दारासिंह की कथित फर्जी मुटभेड़ में शामिल होने के आरोप में फंसाया गया है |दारासिंह की ये कथित मुटभेड़ २००६ में हुई थी|उसकी मुटभेड़ में मौत के बाद उसके भाई व उसकी पत्नी द्वारा दर्ज करवाई रिपोर्ट में पूर्व मंत्री के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी पर मामले में जातिय तत्वों के सक्रिय होने के बाद चार साल बाद अचानक पूर्व मंत्री को फंसाने के लिए कई सारे लोगों के बयान आने लगे और सीबीआई को जिसके निदेशक एपी सिंह ने सोलिसिटर जनरल की सलाह पर माना था कि “पूर्व मंत्री राठौड़” के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है को अपनी ताजा चार्जशीट में अचानक एक इस कथित मुटभेड़ में एक पैटर्न व तारतम्य नजर आया और श्री राठौड़ को फंसा दिया| और जेल भेज दिया गया पर आखिर आज जयपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने राजेंद्र राठौड़ को आरोप साबित नहीं होने पर दोष मुक्त कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीसी जैन ने चार्ज बहस के बाद अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सीबीआई की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया।
न्यायालय का यह फैसला राजस्थान सरकार और राजस्थान में सक्रिय जाट जातिवादी तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा है |
कौन थे ये जातिवादी तत्व ? व कैसे फंसाया इन्होंने पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ को ? इनका खुलासा होता है इण्डिया टुडे के 18 अप्रेल 2012 में छपी एक रिपोर्ट में | इस रिपोर्ट के अनुसार —

“राठौड़ को अभियुक्त बनाये जाने पर सीबीआई में दो राय थी, आला अफसरों को संदेह था कि जाटों के एक छोटे से वर्ग में राजा राम मील के नेतृत्व वाला गुट राजेंद्र राठौड़ को इस मामले में फंसाना चाहता था, इस गुट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन प्राप्त है. यह गुट सीबीआई के कुछ अधिकारियों के साथ सांठ गांठ करने में सफल रहा| सीबीआई के जांचकर्ता जातिगत आधार पर बुरी तरह बंटे हुए थे|
हालाँकि संदिग्ध माने गए जाट पुलिस अधीक्षक आर.एस पूनिया को अदालत के आदेश पर हटा दिया गया था, लेकिन पहली चार्जशीट तभी दर्ज की गयी थी, जब मुख्य प्रभार उन्हीं के पास था|

सीबीआई के मुताबिक “राठौड़ एक राजपूत थे और जाटों का एक छोटा सा वर्ग उन्हें निशाना बना रहा था, इस तथ्य ने कुछ जाट अफसरों को राठौड़ के खिलाफ कर दिया था|” राठौड़ के खिलाफ सक्रिय गुट ने सबूत गढ़ने में सारी हदें पार कर दी| इन सबूतों की विश्वसनीयता की परख सुनवाई के दौरान ही हो सकेगी|
हैरत की बात है कि राजस्थान के कुछ जाट पुलिस अफसरों ने खूद पुलिस अधिकारियों समेत कुछ अभियुक्तों के खिलाफ सबूत दिए, सीबीआई के आला अफसर कुछ गवाहों के बयानों से नाखुश थे, जो हू-ब-हू एक जैसे है, जिनसे साफ़ लगता है कि गवाहों को सिखाया-रटाया गया है| यहाँ सीबीआई एक साल से ज्यादा पुराने कॉल डिटेल्स जुटाने सफल रही जबकि मोबाइल कंपनियां अमूमन एक साल से ज्यादा समय के पुराने डिटेल्स नष्ट कर देने की बात कहती है|”
इण्डिया टुडे की उपरोक्त रिपोर्ट और अब न्यायालय द्वारा राठौड़ को दोष मुक्त करने के बाद साफ़ जाहिर है कि -राजनीति में व सीबीआई में शामिल कुछ जातिय तत्वों ने षड्यंत्र के तहत श्री राठौड़ को इस मामले में फंसाया था| और इस गुट को मुख्यमत्री अशोक गहलोत के समर्थन का कारण भी जातिवादी वोट बैंक की राजनीति है| भंवरी देवी की हत्या और उसके साथ गहलोत सरकार में मंत्री रहे मदेरणा की सीडी आने के बाद भी अशोक गहलोत ने मदेरणा पर कार्यवाही करने में इसलिए देरी की थी कि कहीं मदेरणा के जाट नेता होने के कारण उन पर कार्यवाही करने से जाट नाराज होंगे और चुनावों में कांग्रेस को नुकसान होगा पर मामला मिडिया में पूरी तरह खुलने व उपरी दबाव के चलते गहलोत को मदेरणा को मंत्री पद से हटाना पड़ा और उनके खिलाफ न चाहते हुए भी कार्यवाही करनी पड़ी| अब गहलोत मदेरणा प्रकरण से हुए जातिय वोटों के नुकसान की भरपाई के लिए राजाराम मील जैसे जातिय नेताओं को आँख मूंद कर समर्थन दे रहे है और ऐसे जातिय नेताओं के षड्यंत्रों व कृत्यों से राजस्थान में एक जातिय संघर्ष की नींव डालने पर आमादा है|
ऐसे कई प्रकरण सामने आये है कि प्रशासन में आरक्षण की आड़ में घुसे जाट जातिवादी तत्वों के षड्यंत्र के शिकार राजपूत समाज के लोग हुए है ,कई बार किसी राजपूत जाति के व्यक्ति की हत्या के मामले को पुलिस में घुसे ऐसे जातिय तत्व दुर्घटना का रूप दे देते है जबकि किसी स्व जातिय की दुर्घटना में इन जातिय तत्वों का पूरा प्रयास रहता है कि उसी क्षेत्र के किसी राजपूत युवक को फंसा दिया जाए ताकि उस क्षेत्र में जातिय विद्वेष फैलाया जा सके| इन जातिय तत्वों का निशाना अक्सर राजपूत जाति ही होती है|इन जातिय तत्वों द्वारा इस तरह के कृत्य इस देश की साझा संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा है |
चूँकि लोहे को लोहा काटता है इसलिए राजपूत समाज के नेता लोकेन्द्र सिंह कालवी ने ऐसे ही जातिय तत्वों के षड्यंत्रों में फंसे राजपूत समाज के पीड़ित लोगों को सहयोग देने के लिए श्री राजपूत करणी सेना का गठन किया था| करणी सेना सदैव इन जातिय तत्वों द्वारा पीड़ित व्यक्ति के साथ संघर्ष को तत्पर रहती है ऐसे कई मामले सामने आये है जब इन जातिय तत्वों के खिलाफ करणी सेना सड़कों पर उतरी है और पीड़ित को न्याय दिलाया है और शासन में घुसे उन षड्यंत्रकारी जातिवादी तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करने को प्रशासन को मजबूर किया है| अब हालात यह है कि राजपूत समाज को भी इन जातिवादी तत्वों से लड़ने के लिए जातिवाद का ही सहारा लेना पड़ रहा है| शासन में घुसे इन जातिय तत्वों के खिलाफ संघर्ष के चलते आज करणी सेना राजस्थान के राजपूत युवकों का सबसे चहेता संघठन है| अभी तक करणी सेना का नेतृत्व बहुत जिम्मेदार व समझदार लोगों के हाथ में है साथ इससे जुड़े कार्यकर्ता भी जिम्मेदार है वे इन जातिय तत्वों के खिलाफ संघर्ष में बहुत सयंमित रहते है और पुरी सतर्कता बरतते है कि उन जातिय तत्वों के खिलाफ कार्यवाही में उनकी पूरी जाति के लोगों का अपमान ना हो |
पर राजनीति व आरक्षण की आड़ में शासन में घुसे इन कतिपय जातिय तत्वों के षड्यन्त्र यदि इसी तरह बढते रहे और उनके खिलाफ करणी सेना के संघर्ष में भी यदि असामाजिक व गैरजिम्मेदार लोग घुस गए तो राजस्थान में जातिय संघर्ष बढ़ने की संभावना को कोई टाल नहीं सकेगा|
हाँ इस तरह के संघर्ष की नींव ना पड़े और आज दोनों जातियां जिस तरह से गांवों में आपसी सौहार्द व सांझा संस्कृति के तहत साथ रहती है, इस सौहार्द व सांझा संस्कृति को बचाने के लिए दोनों जातियों के जिम्मेदार लोगों को आगे आना होगा और अपने राजनैतिक फायदे के लिए इस तरह के जातिय षड्यंत्र रचने वालों तत्वों का बहिष्कार करना होगा| पूर्व में भी इस तरह का प्रयोग राजपूत समाज के नेता स्व.कल्याणसिंह जी कालवी और जाट नेता स्व.श्री नाथूराम जी मिर्धा ने किया था, जिसका परिणाम यह रहा कि उनके क्षेत्र नागौर जिले में दोनों जातियों के लोगों के बीच बड़े तो क्या छोटे-मोटे झगड़े भी एकदम बंद हो गए थे| ऐसा ही प्रयास पुरे प्रदेश में अब भी किया जा सकता है|

19 Responses to "राजस्थान : जातिवादी तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा"

  1. DR. ANWER JAMAL   June 1, 2012 at 5:39 am

    जिंदगी के इंद्रधनुषी रंग भी बेशुमार है।

    Nice post.

    Reply
  2. anitakumar   June 1, 2012 at 5:58 am

    पता नहीं इस जातिवाद के विष को पीने वाला शिव कब पैदा होगा

    Reply
    • Ratan Singh Shekhawat   June 1, 2012 at 12:12 pm

      अनीता कुमार जी
      @ शिव का तो पता नहीं कब पैदा होगा? हाँ इसे बढाने हेतु राक्षक रोज जन्म जरुर ले रहे है!!

      Reply
  3. हिन्दुस्तानी   June 1, 2012 at 6:17 am

    तथाकथित आजादी के चौसठ वर्ष बाद भी जातिवाद और तुष्ठिकरण की नीतियों को ही पकडे रख कर अपनी नैय्या पार लगाने वाली काग-रेस से और क्या उम्मीद की जा सकती है भाई साहब,
    जातिवाद और प्रबल हो रहा है और ये हमारी वर्तमान सरकार के कारन भी हो रहा है, अब एक मुद्दा पद्दोंन्न्ती मैं आरक्षण का ही लो, न्यायलय के फैसलों को भी नहीं माना जा रहा यहाँ तक की अवमानना तक की नोबत आ गई किन्तु जाती और धर्म पर अपनी राजनितिक रोटियों को सकने वाली सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है .. अपितु अपनी सभावों मैं ये तक कहते हैं की मिशन72 जैसे लोग समाज मैं वैमनस्यता फैला रहे हैं… (संविधान की मूलभावना का विरोध और अवमानना तक गिर जाते हैं) संवैधानिक संस्थाओं का अपने फायदे के लिए दुरूपयोग संविधान की दुहाई देने वाले इन काग-रसियों ने खूब किया है ||

    बहुत अच्छा और सारगर्भित लेख लिखा है जो आँखों को खोलने के लिए काफी है
    जे रामजी की

    Reply
  4. Vinod Saini   June 1, 2012 at 2:14 pm

    राजस्‍थान मे जातिवादी विचारधारा कम ही देखने को मिलती है पर फिर भी इसका पूर्ण रूप से खात्‍मा नही हुआ है यह अभी भी कभी कभी अपनी कलुषित विचारधारा को मनुष्‍य मस्तिष्‍क को प्रभ‍ावित कर देती है

    युनिक तकनीक ब्‍लाग

    Reply
  5. D.S.Shekhawat   June 2, 2012 at 8:18 am

    kahte hai ki "ati sarvtra varjayte" ,aj andhe kanoon or swarth ki rajniti me samaj ka ek warg jo ki kisaan kahlata hai par sabse dhani hai,or resesvation ki aad me har compitition me,har admission me 60% post kha raha hai. Agar aisa hi hota raha to jatiya sangharsh to hoga hi. Pata nahi sabko samanta ka sanvidhan ka vada kaha gaya.

    Reply
  6. D.S.Shekhawat   June 2, 2012 at 8:19 am

    kahte hai ki "ati sarvtra varjayte" ,aj andhe kanoon or swarth ki rajniti me samaj ka ek warg jo ki kisaan kahlata hai par sabse dhani hai,or resesvation ki aad me har compitition me,har admission me 60% post kha raha hai. Agar aisa hi hota raha to jatiya sangharsh to hoga hi. Pata nahi sabko samanta ka sanvidhan ka vada kaha gaya.

    Reply
  7. D.S.Shekhawat   June 2, 2012 at 8:19 am

    kahte hai ki "ati sarvtra varjayte" ,aj andhe kanoon or swarth ki rajniti me samaj ka ek warg jo ki kisaan kahlata hai par sabse dhani hai,or resesvation ki aad me har compitition me,har admission me 60% post kha raha hai. Agar aisa hi hota raha to jatiya sangharsh to hoga hi. Pata nahi sabko samanta ka sanvidhan ka vada kaha gaya.

    Reply
  8. Pradeep Beedawat   June 2, 2012 at 6:15 pm

    tanhayion ke khauf dard-e-zigar me utar gaye
    wo shaman e wafa bujhakar jane kahan ko gaye
    pedon ko chhodkar jo ude unka to vajood hi kya
    yahan to paale hue bhi gairon ki chhat pe utar gaye.

    Reply
  9. Rajput   June 17, 2012 at 6:29 am

    इस तरह के प्रकरण किसी बड़े बवंडर को जन्म देंगे जो किसी भी जाति के हित में तो कतई नहीं होगा,और फिर शुरू होगा जातीय संघर्ष का कभी न थमने वाला सिलसिला .

    Reply
  10. Dulesingh Rathore   June 17, 2012 at 6:45 am

    Agar ye najayaj sarkar aage bhi rahi to ye desh barbad ho jayega.
    Jald se Jald is congress sarkar ka Jas khatm karna he dosto.

    Reply
  11. naren   April 12, 2013 at 5:28 pm

    Jatiwad ka esa hi udaharan me aapke batata hun pali jille ke xetra me ek rajput ki kafi samay se bus chalti hai,uske aage usi samay par jato ne bus chalu kar di.usi area me police department me dy sp se sipahi tak jatiwadi jat bhare hue pade hai.us rajput ki bus ko jatiwati policewale sipahi se thanedar tak rukwate chalan katate aur paresan karte usi vibhag me ek rajput sipahi bhi hai usne bhi ek bar jato ki bus rukva di…bus ko rukwane ke turant baad sipahi ke mobile phone par jatiwadi dy sp ka phone aata hai aur kahta hai 'Tumhari himmat kese hue bus rukwane ki jane de use' ise aap kya kahoge

    Reply
  12. Yogesh   April 25, 2013 at 4:38 pm

    Jati wad ne Rajasthan bata hindu hindustan toda des ki taraki ko kamjor kiya jati wad sodo hindu Hindustan ki madat karo

    Reply
  13. Yogesh   April 25, 2013 at 4:56 pm

    Sabut hai to girftar

    Reply
  14. Yogesh   April 25, 2013 at 5:01 pm

    Sabut hai to giraftar kare jati wad ke nam par ane wale ka enkautar

    Reply
  15. Yogesh   April 25, 2013 at 5:05 pm

    Sabut hai to girftar

    Reply
  16. Yogesh   April 25, 2013 at 5:11 pm

    rajput to raksa khud kar sakata hai Pakistan me jakar musaraf ko mar sakta hai hame to hindu ki raksa karni hai

    Reply
  17. Yogesh   April 25, 2013 at 5:14 pm

    Rajputo ki hifajat ke liye policy ki kaya jarurat

    Reply
  18. parmar   June 8, 2013 at 6:37 am

    It is very true that many cases of murders of rajputs are created by these basterd by accidents and if any criminal of these caste has been killed ,they gethered whole and creat innocence like donkey's ,they are taking advantage of resevation and the orignal obc's are far from benifit, in rajasthan ,obc reservation should be divided in three category like in up (rajnath singh jee formula)

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.