जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला

जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला


जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला
अरे जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला

ऊपर से है चेहरा गोरा अंदर से दिल गहरा काला
जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला

जब तक रहे मतलब किसी से उसे सर पर बिठाये फिरते है
जब तक रहे मतलब किसी से उसे सर पर बिठाये फिरते है

जो मतलब निकल गया तो फिर पदचिन्ह भी नहीं दिखाई देते है
कहते है ये तन मन धन तेरा ही तो है सब यारा
कहते है ये तन मन धन तेरा ही तो है सब यारा

जो आई मुसीबत तो पता चला कौन है तेरा किसको है तू प्यारा

जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला
ऊपर से है चेहरा गोरा अंदर से दिल गहरा काला

महफ़िल में कई बार लोगो को, सचाई का दम भरते देखा है
में हूँ सचा में हूँ अच्छा, ये कहते मैंने देखा है

फिर मैंने ही उन लोगो को कालेपण की छाप छोड़ते देखा है
कहते है जो में सबसे सच्चा, सबसे झूठापण भी मैंने उनमे देखा है

जो भी देखा, जैसा देखा, जग का भेद मैंने देखा है
जग में आ के देखा हमने जग वालो का भेद निराला
ऊपर से है चेहरा गोरा अंदर से दिल गहरा काला

वक्त है ऐसा पता चले ना, कोण है गोरा कोण काला
जितना बड़ा देखा है किसी को अंदर से उतना ही काला

जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला
ऊपर से है चेहरा गोरा अंदर से दिल गहरा काला

चारो तरफ में देख उन्ही को, चारो तरफ में देख उन्ही को
पी जाता हू ज़हर का प्याला, .

जग में आ के जाना हमने जग वालो का भेद निराला
ऊपर से है चेहरा गोरा अंदर से दिल गहरा काला

उपरोक्त रचना के लेखक –
सुल्तान सिंह राठौड़ “पटवारी”
कोल्लेक्ट्राते, चुरू
मोबाइल . ०७७४२९०४१४१

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