छोटी सी उमर

छोटी सी उमर

सिक्को की खनखनाहट सी हँसी मेरी …………..
कंधो पर झूलती दो चोटियों सी मस्ती मेरी …….

तार पर गीली चुनर सुखा दी हो किसी ने ,,
उस में से गुजर कर आने वाली ठंडी हवा सी खुशबू मेरी ……
ओस की बूंदों ने जमावड़ा लगाया हो जैसे पंखुड़ियों पर वैसी बातें मेरी

नृत्य करती मोरनी सी चंचलता मेरी ………
कमर पर टिकी करधनी सी अधर में टिकी निगाहे मेरी ……….
पानी में उछलती मछलियों की छपछपाहट सी आहट मेरी …..

ये सब थी मेरी जिंदगी के झोले में ……अब खो गई है …

……….आपने देखा है इन्हें कही ???????????????????????????……..

25 Responses to "छोटी सी उमर"

  1. Ratan Singh Shekhawat   July 20, 2010 at 2:38 pm

    बहुत सुन्दर भावों के साथ उम्दा प्रस्तुति

    Reply
  2. honesty project democracy   July 20, 2010 at 3:10 pm

    अच्छी व मन की गहराइयों को छूती रचना …

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  3. प्रवीण पाण्डेय   July 20, 2010 at 3:47 pm

    आपको पहली बार कविता करते देख रहा हूँ, बहुत ही सुन्दर। अधिक की प्रतीक्षा।

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  4. नरेश सिह राठौड़   July 20, 2010 at 3:54 pm

    जितनी सुन्दर रचना है उतनी ही सुन्दर फोटो भी लगाई है |

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  5. Mahavir   July 20, 2010 at 4:44 pm

    really bahut achi kavita hai sa

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  6. राज भाटिय़ा   July 20, 2010 at 6:52 pm

    बहुइत सुंदर जी

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  7. Etips-Blog Team   July 20, 2010 at 6:54 pm

    उम्दा
    रोचक
    सानदार
    अच्छा
    बेहतरीन
    सुन्दर
    खूबसुरत
    दिल को छू लेने वाली
    सिधे दिल से निकली
    इस पोस्ट के लिये आपका आभार ।

    Reply
  8. Tany   July 20, 2010 at 7:14 pm

    bahut hi sunder,sahej aur badiya kavita likhi hai aapne.Paani mein uchalti machliyon ki chahchapahat si aahat meri.wah aapki soch mein kitni gehrai hai.u hav been blessed by God gift plz isse kabhi bhi waste mat hone dena.Proud of u 🙂

    Reply
  9. अजय कुमार   July 21, 2010 at 2:07 am

    भावपूर्ण रचना । बचपन तो ऐसा ही होता है ।

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  10. सुन्दर अभिव्यक्ति….अब तो झोले में और बहुत कुछ भर गया है…यह सब कहीं नीचे दब गया है

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  11. रंजन   July 21, 2010 at 5:29 am

    बहुत सुन्दर…

    Reply
  12. एक विचार   July 21, 2010 at 5:35 am

    उम्दा प्रस्तुति

    Reply
  13. रचना दीक्षित   July 21, 2010 at 8:30 am

    बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

    Reply
  14. Pagdandi   July 21, 2010 at 8:33 am

    aap sab ne itna pyar aur saneh diya, uske liye tahe dil se aabhar ……..

    Reply
  15. हमारीवाणी.कॉम   July 21, 2010 at 9:44 am

    हिंदी ब्लॉग लेखकों से आग्रह – हमारीवाणी.कॉम

    ब्लॉग लेखकों का अपना ब्लॉग संकलक हमारीवाणी अभी साज-सज्जा की अवस्था पर है, इसलिए इसके फीचर्स पर संदेह करना उचित नहीं है. यह आपका अपना ब्लॉग संकलक है इसलिए यह कैसा दिखना चाहिए, कैसे चलना चाहिए, इन जैसी सभी बातों का फैसला ब्लॉग लेखकों की इच्छाओं के अनुसार ही होगा.

    Feedcluster संस्करण के समय प्राप्त हुए ब्लॉग जोड़ने के आवेदनों को नए संस्करण में जोड़ने में आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमारीवाणी के पूर्णत: बनने की प्रक्रिया के बीच में ही आप लोगों के सामने रखने का फैसला किया गया था.

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    हमारीवाणी टीम</

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  16. Divya   July 21, 2010 at 10:07 am

    क्यूँ खो जाती उन्मुक्त हँसी ?….चंचल चितवन ?….शोख जुल्फें ? …..गालों की लाली ?

    आखिर क्यूँ ?

    इतनी बाली उम्र में ?

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  17. M VERMA   July 21, 2010 at 12:48 pm

    तार पर गीली चुनर सुखा दी हो किसी ने ,,
    उस में से गुजर कर आने वाली ठंडी हवा सी खुशबू मेरी ……
    अद्भुत रचना ….
    स्पर्श की कोमलता है
    एहसास का अद्भुत समावेश है ..

    Reply
  18. वन्दना   July 21, 2010 at 1:54 pm

    bhavon ko bahut hi khoobsoorti se ukera hai.

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  19. काजल कुमार Kajal Kumar   July 21, 2010 at 3:32 pm

    सुंदर. एक ताज़े हवा के छोंके सी कविता.

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  20. Udan Tashtari   July 22, 2010 at 11:09 am

    बहुत भावनात्मक अभिव्यक्ति!! शानदार!

    Reply
  21. Etips-Blog Team   July 22, 2010 at 1:40 pm

    @GYANDARPAN.COM

    आपके ब्लाँग को ईटिप्स ब्लाँग टीम के द्वारा ब्लाँग आँफ द मंथ के लिये चुना गया है एक बार यहाँ आएँ

    http://etips-blog.blogspot.com/2010/07/blog-post_22.html

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  22. .राजुल शेखावत   July 23, 2010 at 4:05 am

    bahut hi sunder aur badiya kavita likhi hai aapne.really bahut achhi kavita hai … 🙂

    Reply

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