चोरी के लेखों से ऐसे धन कमाते है फेसबुक पर लेखचोर

इंटरनेट की दुनिया में अपने ब्लॉग, वेबसाइट्स पर कई लोग अलग अलग विषय पर लेख लिखते है, ताकि सम्बंधित विषय की जानकारी इंटरनेट पर आम लोगों को उपलब्ध हो सके| इंटरनेट के बढ़ते दायरे को देखकर उत्पादक, विक्रेता इन ब्लॉगस, वेब साइट्स पर गूगल के जरिये अपने विज्ञापन देने लगे, तब लोगों ने अपने लेखन को व्यवसाय बना लिया और लेखन पर ज्यादा ध्यान देने लगे| चूँकि इंटरनेट पर हिंदी लेखन से आय नहीं के बराबर होती है अत: ज्यादातर हिंदी लेखक स्वंत सुखाय व जनहित में लिखते रहे है| उनका लिखा शौकिया लोग या अपने आपको बड़ा लेखक, बुद्धिजीवी साबित करने के लिए कॉपी कर अपने ब्लॉग, फेसबुक वाल पर सजाने लगे| लेकिन आपने देखा होगा कि आजकल अचानक से लेखन चोरी की बाढ़ सी आ गई|

इसका बड़ा कारण है फेसबुक द्वारा शुरू की गई इंस्टंट आर्टिकल सुविधा| फेसबुक इंस्टंट आर्टिकल में अपने विज्ञापन लगाती है और लिखने वाले को धन भी देती है| इसी चक्कर में तकनीकि के जानकार जो लिख तो नहीं सकते पर तकनीक जानते है, वे अन्य लोगों की वेब साइट्स व ब्लॉगस से सामग्री चोरी कर फेसबुक इंस्टंट आर्टिकल में जोड़ कर मोटी कमाई कर रहे है| चूँकि फेसबुक सर्च इंजन नहीं है अत: वह असली-नकली सामग्री की पहचान नहीं कर पाती और इसी कमी का फायदा उठाकर ये चोर लोगों की मेहनत चुराकर अपनी जेबें भर रहे है|

यही नहीं इन लोगों ने आपकी धार्मिक, जातीय भावनाओं का दोहन करने के लिए आपकी जाति, धर्म के नाम से फेसबुक पर पेज बना रखें और वहां आपकी रूचि के अनुसार चोरी की सामग्री आपको परोसकर एक तरफ अपनी जेबें भर रहे है दूसरी और आपकी नज़रों में जातीय व धार्मिक हितैषी बने बैठे है| जबकि इन्हें आपकी जाति-धर्म से कोई लेना देना नहीं|

यदि इस तरह के धंधेबाजों की जांच की जाए तो आप पायेंगे कि एक ही व्यक्ति एक पेज आपकी जाति या धर्म का महिमामंडन करने वाला पेज व दूसरा आपकी जाति व धर्म के खिलाफ विषवमन करने वाला पेज चलाता रहा है| क्योंकि इनका मकसद सिर्फ आपकी भावनाओं का दोहन व दूसरों के लिखे को चोरी कर कमाना मात्र है|

ज्ञान दर्पण.कॉम से चोरी किये लेख आपको बहुत जगह मिल जायेंगे| ज्ञान दर्पण से चोरी करने वालों को कई बार बेनकाब भी किया गया पर बेशर्म लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता|

One Response to "चोरी के लेखों से ऐसे धन कमाते है फेसबुक पर लेखचोर"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.