घुटन

घुटन

बचपन मे कही से बिखर कानो मे पड़ गया था…..ये शब्द घुटन

तब सोचा घुटन से मर जाता होगा इन्सान

पर आज जब मे घुट रही हूँ तो क्यूँ नहीं निकलता मेरा दम

घुटन घुटन मे घुटते घुटते मैं सब काम निपटा लेती हूँ

जब सब निपट जाता हैं , तो मुझ में क्यू कुछ बाकी रह जाता हैं,

ये सारा गम तह बन कर क्यू मुझ पर ही आके जम जाता हैं

इतना भी क्या कठोर हो गया मेरा ह्रदय

की सब कुछ चुप चाप सह जाता हैं

और जब कठोर हो ही गया हैं

तो अकेले में फिर आंसू बन कर क्यू बह जाता हैं .

18 Responses to "घुटन"

  1. Mahavir   October 9, 2010 at 6:48 pm

    nice panktiyan usha ji

    Reply
  2. Tany   October 9, 2010 at 7:17 pm

    वह बहुत खूब किसी के दर्द को आप बहुत अच्छी तरह और बहुत खूबी से समझती हैं ! क्या कहूँ मैं सब्द नही मिल रहे है आपकी तारीफ में बस दो पंक्तियाँ मेरी तरफ से उम्मीद करता हून आपको पसंद आएगी !

    इतने दोस्तो मे भी एक दोस्त की तलाश है मुझे
    इतने अपनो मे भी एक अपने की प्यास है मुझे
    छोड आता है हर कोइ समन्दर के बीच मुझे.
    अब डूब रहा हु तो एक सािहल की तलाश है मुझे
    लडना चाहता हु इन अन्धेरो के गमो से
    बस एक शमा के उजाले की तलाश है मुझे
    तंग आ चुका हु इस बेवक्त की मौत से मै
    अब एक हसीन िजन्द्गी की तलाश है मुझे
    दीवना हु मै सब यही कह कर सताते है मुझे
    जो मुझे समझ सके उस शख्श की तलाश है मुझे.

    Reply
  3. DEEPAK BABA   October 9, 2010 at 8:21 pm

    भावपूर्ण –

    सुंदर

    Reply
  4. Udan Tashtari   October 9, 2010 at 8:55 pm

    घुटन और दिल को टीसता दर्द….

    Reply
  5. Ratan Singh Shekhawat   October 10, 2010 at 1:35 am

    बहुत बढ़िया ! दर्द को महसूस कराती पंक्तियाँ !

    Reply
  6. काजल कुमार Kajal Kumar   October 10, 2010 at 2:26 am

    सुंदर संवेग.

    Reply
  7. संगीता स्वरुप ( गीत )   October 10, 2010 at 7:00 am

    मनोभाव की सटीक अभिव्यक्ति

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  8. निर्मला कपिला   October 10, 2010 at 7:25 am

    मन की कशमकश , भावपूर्ण रचना। बधाई।

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  9. Uncle   October 10, 2010 at 7:35 am

    पिछली बार की तरह इस बार भी बढ़िया रचना

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  10. mahendra verma   October 10, 2010 at 9:09 am

    घुटन का आंसू बनकर बह जाना अच्छा है, एक तरह से यह भी कविता का सृजन ही है।…भावपूर्ण रवना।

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  11. राज भाटिय़ा   October 10, 2010 at 9:43 am

    बहुत भाव पूर्ण रचना, धन्यवाद

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  12. अजय कुमार झा   October 10, 2010 at 11:58 am

    वाह क्या खूब परिभाषित किया घुटन को आज तक ऐसे नहीं सोचा था बहुत ही सुंदर

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  13. नरेश सिह राठौड़   October 10, 2010 at 12:41 pm

    घुटन जिसकी किस्मत में लिखी गयी है उसे भोगना ही होगा | कुछ घुटन अस्थाई होती है उनके टूटने का इन्तजार होता है |लेकिन स्थाई का कोइ इन्तजार नहीं करता है |

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  14. कल से बाहर था इसलिए इस पोस्ट को नही देख सका!

    आपने बहुत ही उम्दा रचना लगाई है!

    साधुवाद!

    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जय माता जी की!

    Reply
  15. Ratan Singh Shekhawat   October 10, 2010 at 1:33 pm

    संध्या पांडे ने इस रचना पर ईमेल के जरिए ये टिप्पणी की –
    वाह क्या बात कही है . मुझे लगा की यह मेरी कहानी है. उषाजी कहाँ से हर व्यक्ति के मन की बात को कविता में पिरोती है .बहुत दिनों से आप की रचना का इंतजार था .इतना देर मत लगाया करिए .आप को नवरात्री का ढेरो शुभ कामनाएं .

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  16. प्रवीण पाण्डेय   October 10, 2010 at 2:02 pm

    दर्द की गहराई में डूबी पंक्तियाँ।

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  17. परमजीत सिँह बाली   October 10, 2010 at 5:33 pm

    बहुत भावपूर्ण।

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  18. Pagdandi   October 10, 2010 at 5:51 pm

    aap sab ka bhut bhut aabhar ……..aap logo ka pyar aur prohtsan hi h jo likhne p majboor karta h …..n thnx ratan sing ji hukum ka jinhone apne blog m mujhe jagah di h …..

    Reply

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