गरीब की रात

गरीब की रात

सड़क किनारे झोपड़ी गरीब की …
गहन अँधेरा रात का …….
पर उसे तो है रात भर जागना…..
आज रात को जागना है उसे ….
दाई से खबर सुनने को …..
आधी रात यूं बोली दाई ……
गरीब तेरे घर लक्ष्मी आई ,
आधी रात बाद जगा बेटी की ख़ुशी में …
आज दिन भर उसे काम नहीं मिला ……
फिर रात भर जागा सवेरे चूल्हा कैसे जलेगा ………
आज उसकी बेटी सयानी हो गई …..
फिर रात भर जागा ……
ब्याह के लिए कर्ज कहां से लाऊं
क्या है मेरे पास जिसे बेच दूं …..
आज बेटी विदा हो गई ………
फिर रात भर जागना ….…
सवेरे कहां जायेगा ……….
बीमार बीवी को लेकर ……….
क्योंकि ठोर ठिकाना तो साहूकार ने ले लिया …………..

19 Responses to "गरीब की रात"

  1. राज भाटिय़ा   July 29, 2010 at 10:33 pm

    हे राम … गरीब किसी को ना बना…

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  2. Ratan Singh Shekhawat   July 30, 2010 at 12:29 am

    गरीबी अपने आप में एक अभिशाप है

    Reply
  3. क्षत्रिय   July 30, 2010 at 1:26 am

    badhiya rachna

    Reply
  4. Uncle   July 30, 2010 at 1:28 am

    Nice

    Reply
  5. Uncle   July 30, 2010 at 1:29 am

    गरीब के दर्द को महसूस कराती बढ़िया रचना

    Reply
  6. Mahavir   July 30, 2010 at 5:24 am

    bahut hi acha likha aapne garibi pe

    Reply
  7. वन्दना   July 30, 2010 at 7:16 am

    गरीबी से बडा कोई अभिषाप नहीं।

    Reply
  8. Rajul shekhawat   July 30, 2010 at 8:46 am

    बढ़िया लिखा है ……. गरीबी के दर्द को महसूस कराया ……….
    भगवान् किसी को इतना गरीब न बनाए !…..
    सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद …….!!!

    Reply
  9. प्रवीण पाण्डेय   July 30, 2010 at 10:01 am

    निर्धनता का मार्मिक चित्रण।

    Reply
  10. Akhtar Khan Akela   July 30, 2010 at 11:25 am

    aapkaa grib hut achchaa he jo prim location pr sdk ke kinaare vyvsaayik jgh pr jhonpdi lgaa kr bethaa he bhut khub prsuti krpyaa mere mzaaq ko anythaa naa len. akhtar khan akela kota rajsthan

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  11. Pagdandi   July 30, 2010 at 12:08 pm

    akhtar khan sahab tabhi to sahukar ki najar thi uski jhopadi p aakhir prime loction p jo thi .hahhahhahhahahahaha

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  12. sajid   July 30, 2010 at 12:29 pm

    हमारे देश में अनगिनत ऐसे लोग है !
    जब भी हमें इस तरह का कोई परिवार मिले तो
    जितना हो सके इन की मदद करे
    इससे प्रेम और खुशहाली दोनों बढ़ेगी !
    अच्छे लेख के लिए धन्यवाद !

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  13. वाणी गीत   July 30, 2010 at 12:31 pm

    मार्मिक …

    Reply
  14. ताऊ रामपुरिया   July 30, 2010 at 1:29 pm

    बहुत बारीकी से गरीबी को उकेरा इस रचना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  15. राज भाटिय़ा   July 30, 2010 at 2:43 pm

    नरेश सिह राठौड़ जी… क्यो?? बहुत मार्मिक है यह रचना क्या इस लिये?

    Reply
  16. अविनाश वाचस्पति   July 30, 2010 at 3:13 pm

    गरीब की नींद ऐसे ही उड़ती है
    अमीरों की थोड़े ही है जो
    बी पी बढ़ने का इंतजार करती है।

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  17. Tany   July 30, 2010 at 8:36 pm

    Dua hai Ki Kamyabi ke har sikhar pe aap ka naam hoga,
    aapke har kadam par duniya ka salam hoga,
    Himat se mushkilon ka samana karna hamari dua hai ki waqt
    bhi ek din aapka gulam hoga.
    Happy Birthday.

    Reply
  18. नरेश सिह राठौड़   July 31, 2010 at 11:45 am

    गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है | क्या इसे पाटने की सरकार द्वारा कोशिश भी की जावेगी ?

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  19. Monti Bhati   December 20, 2012 at 5:23 am

    बहुत बारीकी से गरीबी को उकेरा इस रचना. शुभकामनाएं.

    Reply

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