ख्वाहिश

ख्वाहिश

ख्वाहिश
सितारे तोड़ना या चाँद छूना नहीं चाहती…….
बस सितारों को निहारने की खवाहिश है ….
पंख फेला कर आसमाँ समेटना कौन नहीं चाहता …….
पर मेरी आसमाँ में सिमट जाने की ख्वाहिश है …… इमारतों का गुबंद बनने का होंसला है ………
पर अब नीव का पत्थर बनने की ख्वाहिश है ……
पता है दुनिया की भीड़ से अलग हू ………
पर अब इस भीड़ में गुम हो जाने की ख्वाहिश है इस जहाँ के अहसान इतने हो गए हम पर ……
अब अहसान फरामोश होने की ख्वाहिश है ……….
पत्थर दिल जोश था हिम्मत थी हम में ….
अब अपने आप से डर जाने की ख्वाहिश है ……..
जिंदगी हँसने का नाम है सब से कहा था ……..
अब अकेले में रोने की ख्वाहिश है ……………….

17 Responses to "ख्वाहिश"

  1. मनोज कुमार   July 18, 2010 at 4:49 pm

    बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  2. Mahavir   July 18, 2010 at 4:54 pm

    bahut achi panktiya hai sa usha ji ko congratulation

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  3. श्याम कोरी 'उदय'   July 18, 2010 at 5:04 pm

    …प्रसंशनीय !!!

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  4. Jandunia   July 18, 2010 at 5:35 pm

    शानदार पोस्ट

    Reply
  5. Ratan Singh Shekhawat   July 19, 2010 at 12:31 am

    बहुत शानदार पंक्तियों के साथ बढ़िया प्रस्तुति।

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  6. Rambabu Singh   July 19, 2010 at 2:53 am

    रचना खुबसूरत है |

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  7. प्रवीण पाण्डेय   July 19, 2010 at 3:46 am

    पंख फेला कर आसमाँ समेटना कौन नहीं चाहता …….
    पर मेरी आसमाँ में सिमट जाने की ख्वाहिश है …

    मैं आसमाँ हूँ या अलग हूँ, छा रहा फिर भी,
    समझना क्या मेरा रिश्ता, नहीं है यह तेरे बस का,

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  8. राजकुमार सोनी   July 19, 2010 at 10:25 am

    बहुत ही शानदार प्रस्तुति

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  9. Tany   July 19, 2010 at 11:00 am

    हमने हमेशा से कहा था की आप में कुछ बात है और आज आपने हमें सही साबित कर दिया.कांग्रट्स एंड थेंक यू सो मच.आपकी इस कविता को पड़कर में एक लाइन कहना चाहूँगा "की करना तोह चाहते हैं बहुत कुछ दोस्तों के लिए पर कुछ कर नहीं पते बस हर जनम में आप जैसा प्यारा दोस्त मिले येही ख्वाइश है.तहे दिल से बधाइयाँ

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  10. नरेश सिह राठौड़   July 19, 2010 at 11:22 am

    इस नायाब रचना को ज्ञान दर्पण पर लाने का आभार |

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  11. Pagdandi   July 19, 2010 at 12:14 pm

    aap sab ka bhut bhut aabhar………..}

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  12. अल्पना वर्मा   July 19, 2010 at 11:44 pm

    अच्छी प्रस्तुति है और चित्र जैसे कविता के भावों का पूरक.
    बहुत अच्छा चयन ,केसर जी को बधाई,सुन्दर भावपूर्ण कविता के लिए.

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  13. वाणी गीत   July 20, 2010 at 1:32 am

    एहसानफरामोश होने के अलावा और सभी ख्वाहिशें अच्छी हैं …!

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  14. honesty project democracy   July 20, 2010 at 2:35 am

    जिंदगी हँसने का नाम है सब से कहा था ……..
    अब अकेले में रोने की ख्वाहिश है …………

    अच्छे लोग कभी अकेले में रोते है तो स्वयं भगवान उनकी आंशु पोछने आता है ,बहुत ही अच्छी कविता साथ ही सम्बेदना से भरी हुयी …
    आपको एक नेक इन्सान ब्रह्मपाल प्रजापति (आजाद पुलिस) को स्वेक्षिक सहायता देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ,आपने ऐसा कर इंसानी सम्बेदनाओं को जिन्दा करने का काम किया है ….
    आपकी चर्चा यहाँ भी हुयी है -http://padmsingh.wordpress.com/2010/07/

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  15. मन विचलित होता है तो ऐसी सोच उभर आती है….पर एहसानफरामोश वाली मत रखिये

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  16. SULTAN RATHORE " JASRASAR"   July 16, 2012 at 7:26 am

    बहुत सुन्दर रचना दीदी,

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  17. SULTAN RATHORE " JASRASAR"   July 16, 2012 at 7:56 am

    बहुत सुन्दर दीदी,

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